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सोच बदलो, बेटों और बेटियों में भेदभाव न करें लोग : रेणू
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हमीरपुर। ‘अमर उजाला’ की ओर से अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम का आयोजन शनिवार को ग्राम पंचायत दडूही में किया गया। इसमें उप पुलिस अधीक्षक रेणु शर्मा ने बतौर मुख्यातिथि, जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग से सीडीपीओ बलवीर बिरला विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग से प्रोटेक्शन ऑफिसर प्रदीप चौहान, पंचायत समिति हमीरपुर उपाध्यक्ष शारदा कौंडल, पंचायत प्रधान ऊषा बिरला और उपप्रधान पवन कुमार आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के तहत बेटी को जन्म देने वाली दस महिलाओं को ‘बधाई संदेश’ प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
डीएसपी ने महिलाओं को विभिन्न कानूनों के बारे में जागरूक किया। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण के लिए लोगों को अपनी सोच बदलनी पड़ेगी। साथ ही बेटियों और बेटों के जन्म पर किसी तरह का भेदभाव न करें। डीएसपी ने कहा कि महिला के पास बेटा ही हो, इस धारणा को अकसर औरतें ही ज्यादा बढ़ावा दे रही हैं। औरतों को ही पोता चाहिए, पुरुष कभी ऐसी बात नहीं कहता है। औरतों की ऐसी सोच भी गलत भावना को बढ़ावा देती है। डीएसपी ने घरेलू हिंसा अधिनियम और अन्य तरह के महिला अपराध पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बेटी को जन्म से पहले ही गर्भ में मार दिया जाता है, जो कि शर्म की बात है। डीएसपी ने कहा कि जितनी एजूकेशन बेटों को दी जाए, उतनी ही शिक्षा बेटी को भी देनी चाहिए। बेटी को कभी बोझ नहीं समझना चाहिए। घर में बेटे और बेटी का होना बहुत जरूरी है। इस मौके पर प्रोटेक्शन ऑफिसर प्रदीप चौहान ने प्रदेश सरकार की ओर से महिलाओं के उत्थान के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी दी।
बाक्स:
सीडीपीओ बलवीर बिरला ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत महिलाओं को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से बेटी को जन्म देने वाली महिलाओं को बधाई संदेश प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जा रहा है। बिरला ने कहा कि 2011 में लिंगानुपात काफी कम था, लेकिन अब बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत इसमें सुधार होने लगा है।
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महिलाओं ने भी साझा किए विचार
महिलाओं के लिए उपयोगी साबित हो रहा कार्यक्रम
ग्राम पंचायत दडूही की प्रधान ऊषा बिरला ने कहा कि अपराजिता अभियान के तहत महिलाओं को महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं होना चाहिए। दोनों को एक समान प्यार देना चाहिए। प्रधान ने कहा कि महिलाओं के लिए यह कार्यक्रम काफी उपयोगी साबित हो रहा है।
कार्यक्रम में मिली अहम जानकारी
पंचायत समिति हमीरपुर की उपाध्यक्ष शारदा कौंडल ने कहा कि डीएसपी ने जो भी बाते कहीं हैं, उन सब बातों के बारे में वह अन्य लोगों को भी जागरूक करेंगी। महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। महिलाओं के बिना यह संसार नहीं चल सकता है।
बेटी को बेटे जैसा दें प्यार
राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित मटाहनी स्कूल की अध्यापक पवन बाला ने कहा कि अपराजिता अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण बातों के बारे में उन्हें जानकारी मिली है। महिलाओं के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए। महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा मेहनत कर रही हैं। हर क्षेत्र में अपना नाम ऊंचा कर रही हैं। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वह बेटी को बेटे जैसा प्यार दें।
बेटियों के प्रति जागरूक होना जरूरी
मटाहनी स्कूल की अध्यापक वीना धीमान ने कहा कि इस कार्यक्रम में उन्हें जो भी जानकारी मिली है, उसे वह अन्य लोगों को बताएंगी। लोगों को बेटियों के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। वीना ने कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना से काफी लोग जागरूक हुए हैं। इसके बारे में वह अन्य लोगों को भी बताएंगी।
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डीएसपी ने महिलाओं को विभिन्न कानूनों के बारे में जागरूक किया। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण के लिए लोगों को अपनी सोच बदलनी पड़ेगी। साथ ही बेटियों और बेटों के जन्म पर किसी तरह का भेदभाव न करें। डीएसपी ने कहा कि महिला के पास बेटा ही हो, इस धारणा को अकसर औरतें ही ज्यादा बढ़ावा दे रही हैं। औरतों को ही पोता चाहिए, पुरुष कभी ऐसी बात नहीं कहता है। औरतों की ऐसी सोच भी गलत भावना को बढ़ावा देती है। डीएसपी ने घरेलू हिंसा अधिनियम और अन्य तरह के महिला अपराध पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बेटी को जन्म से पहले ही गर्भ में मार दिया जाता है, जो कि शर्म की बात है। डीएसपी ने कहा कि जितनी एजूकेशन बेटों को दी जाए, उतनी ही शिक्षा बेटी को भी देनी चाहिए। बेटी को कभी बोझ नहीं समझना चाहिए। घर में बेटे और बेटी का होना बहुत जरूरी है। इस मौके पर प्रोटेक्शन ऑफिसर प्रदीप चौहान ने प्रदेश सरकार की ओर से महिलाओं के उत्थान के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी दी।
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सीडीपीओ बलवीर बिरला ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत महिलाओं को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से बेटी को जन्म देने वाली महिलाओं को बधाई संदेश प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जा रहा है। बिरला ने कहा कि 2011 में लिंगानुपात काफी कम था, लेकिन अब बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत इसमें सुधार होने लगा है।
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महिलाओं ने भी साझा किए विचार
महिलाओं के लिए उपयोगी साबित हो रहा कार्यक्रम
ग्राम पंचायत दडूही की प्रधान ऊषा बिरला ने कहा कि अपराजिता अभियान के तहत महिलाओं को महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं होना चाहिए। दोनों को एक समान प्यार देना चाहिए। प्रधान ने कहा कि महिलाओं के लिए यह कार्यक्रम काफी उपयोगी साबित हो रहा है।
कार्यक्रम में मिली अहम जानकारी
पंचायत समिति हमीरपुर की उपाध्यक्ष शारदा कौंडल ने कहा कि डीएसपी ने जो भी बाते कहीं हैं, उन सब बातों के बारे में वह अन्य लोगों को भी जागरूक करेंगी। महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। महिलाओं के बिना यह संसार नहीं चल सकता है।
बेटी को बेटे जैसा दें प्यार
राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित मटाहनी स्कूल की अध्यापक पवन बाला ने कहा कि अपराजिता अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण बातों के बारे में उन्हें जानकारी मिली है। महिलाओं के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए। महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा मेहनत कर रही हैं। हर क्षेत्र में अपना नाम ऊंचा कर रही हैं। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वह बेटी को बेटे जैसा प्यार दें।
बेटियों के प्रति जागरूक होना जरूरी
मटाहनी स्कूल की अध्यापक वीना धीमान ने कहा कि इस कार्यक्रम में उन्हें जो भी जानकारी मिली है, उसे वह अन्य लोगों को बताएंगी। लोगों को बेटियों के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। वीना ने कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना से काफी लोग जागरूक हुए हैं। इसके बारे में वह अन्य लोगों को भी बताएंगी।