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Father's Day 2025: संघर्ष की कहानी 'पापा' की जुबानी, बच्चों की वर्दी खरीदने के लिए लेना पड़ता था उधार; जानें
Sun, 15 Jun 2025 11:28 AM IST
अंकेश डोगरा
दीक्षा सरोय, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
दीक्षा सरोय, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Sun, 15 Jun 2025 11:28 AM IST
सार
एक पिता जिन्होंने करीब 40 साल में होटल में खाना बनाकर अपने बच्चों को पढ़ाया लिखाया। एक समय ऐसा भी था जब उनके पास सिर्फ बच्चों की फीस के पैसे ही हो पाते थे। उनके लिए वर्दी खरीदने के लिए भी पैसे उधार लेने पड़ते थे। पापा कितना संघर्ष करते हैं जानिए विस्तार से कहानी उन्हीं की जुबानी...
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रामपाल शर्मा, कमल सिंह, मिरजू राम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
कहा जाता है कि पिता अपने अधूरे सपने बच्चों की आंखों में देखता है और उन्हें पूरा करने के लिए जिंदगी भर मेहनत करता है। जब ये सपने पूरे हो जाते हैं तो बच्चों से ज्यादा खुशी माता-पिता को होती है। कुछ ऐसी ही संघर्ष की कहानी आईजीएमसी शिमला में कार्यरत एक डॉक्टर के पिता की है।
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शिमला निवासी मिरजू राम ने बताया कि वह करीब 40 साल में होटल में खाना बनाने का काम कर रहे हैं। इसकी कमाई से ही उन्होंने अपने चार बच्चों का पालन-पोषण और पढ़ाई करवाई है। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब उनके पास सिर्फ बच्चों की फीस के पैसे ही हाे पाते थे। उनके लिए वर्दी खरीदने के लिए भी पैसे उधार लेने पड़ते थे। लेकिन अब सुकून है। उनका छोटा बेटा आईजीएम में डॉक्टर के रूप में सेवाएं दे रहा है। बाकी तीन भी अच्छी जगह पर कार्य कर रहे हैं।
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शिमला के टक्का बेंच के पास गोलगप्पे बेचने वाले रामपाल शर्मा ने बताया कि वह करीब 55 वर्ष से यहां स्टॉल लगा रहे हैं। सुबह पांच बजे उठकर तैयारी में जुट जाते हैं और स्टॉल पर रात को जबतक ग्राहक हों, तब तक काम करते हैं। उन्होंने बताया कि वह सिर्फ पांच घंटे सोते हैं और दो वक्त खाना खाते हैं। उन्होंने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं और तीनों ने शिमला में ही पढ़ाई की है। उनकी बड़ी बेटी चंडीगढ़ में एक कंपनी में अच्छे पद पर काम करती हैं और छोटी बेटी एनजीओ में काम करती है।
बेटी ने पापा के साथ शादियों में लगाई मेहंदी, अब सॉफ्टवेयर इंजीनियर
शिमला के कालीबाड़ी मंदिर के पास फास्टफूड का स्टॉल लगाने वाले कमल सिंह ने बताया कि वह 25 साल से मेहंदी और फास्टफूड का स्टॉल लगाते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं। बड़ी बेटी दिल्ली में नामी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। बेटी की कामयाबी से उन्हें अपनी मेहनत सफल हाेने और गर्व का अनुभव होता है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी ने भी उनके साथ शादियों में मेंहदी लगाने का काम किया है। इसके साथ कड़ी मेहनत के साथ पढ़ाई करके 10वीं और 12वीं में टॉप किया। इसके बाद चंडीगढ़ विश्वविद्यालय से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की। उन्होंने बताया कि वह अपनी बड़ी बेटी की तरह ही छोटे बेटे और बेटी को भी अच्छे मुकाम पर पहुंचाना चाहते हैं।
शिमला के कालीबाड़ी मंदिर के पास फास्टफूड का स्टॉल लगाने वाले कमल सिंह ने बताया कि वह 25 साल से मेहंदी और फास्टफूड का स्टॉल लगाते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं। बड़ी बेटी दिल्ली में नामी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। बेटी की कामयाबी से उन्हें अपनी मेहनत सफल हाेने और गर्व का अनुभव होता है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी ने भी उनके साथ शादियों में मेंहदी लगाने का काम किया है। इसके साथ कड़ी मेहनत के साथ पढ़ाई करके 10वीं और 12वीं में टॉप किया। इसके बाद चंडीगढ़ विश्वविद्यालय से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की। उन्होंने बताया कि वह अपनी बड़ी बेटी की तरह ही छोटे बेटे और बेटी को भी अच्छे मुकाम पर पहुंचाना चाहते हैं।