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3:00 बजे रेफर की घायल महिला को 4:20 पर मिल पाई एंबुलेंस की सुविधा
Thu, 20 Aug 2026 10:40 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 20 Aug 2026 10:40 PM IST
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बिना ऑक्सीजन घायल को टांडा ले जाने के लिए पहुंची जीवनदायिनी एंबुलेंस
15 मिनट खाली सिलिंडरों को निकालने और भरे को लगाने में हो गए व्यर्थ
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। दिन : वीरवार, समय : शाम 3 बजे, स्थान : मेडिकल कॉलेज चंबा। पिकअप दुर्घटना में घायल अलका देवी को डॉक्टरों ने टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
रिश्तेदारों ने एंबुलेंस सेवा पर फोन कर बुकिंग करवाई। 3:30 बजे तक भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। परिजन अन्य एंबुलेंस कर्मचारियों से जीवनदायिनी एंबुलेंस के चालक का नंबर ले रहे हैं। चालक को फोन किया तो जवाब मिला कि बालू के पास पहुंचे हैं। जल्द अस्पताल आ जाएंगे। शाम को 4 बजे एंबुलेंस अस्पताल पहुंचती है। परिजन घायल को एंबुलेंस में डालने की बात करने लगे तो एंबुलेंस कर्मचारियों ने कहा कि पहले ऑक्सीजन सिलिंडर लोड करने पड़ेंगे। एंबुलेंस में दोनों सिलिंडर खाली निकले।
4:15 बजे घायल के रिश्तेदारों ने ऑक्सीजन प्लांट में पहले एंबुलेंस के खाली ऑक्सीजन सिलिंडरों को पहुंचाया, उसके बाद भरे हुए सिलिंडर लाए। मदद के लिए वहां कोई मौजूद नहीं था। एंबुलेंस कर्मचारियों ने दोनों सिलिंडर एंबुलेंस में फिट किए। उसके बाद घायल को आपातकालीन कक्ष से लाया गया और टांडा रवाना किया गया। यह एंबुलेंस घायल को टांडा पहुंचाने के लिए 6600 रुपये लेती है। बावजूद इसमें उसमें जीवन के लिए सबसे जरूरी ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं थी। उधर, मेडिकल कॉलेज की आपातकालीन कक्ष में तैनात डॉक्टर ने एंबुलेंस कर्मचारियों को इस लचर व्यवस्था के लिए लताड़ भी लगाई। घायल की जिंदगी को ध्यान में रखकर उन्होंने मेडिकल कॉलेज में रखे दोनों सिलिंडरों को एंबुलेंस में लगाने के लिए कहा। 4:20 पर एंबुलेंस घायल को टांडा लेकर रवाना हो पाई। मेडिकल कॉलेज प्रवक्ता डॉ. मानिक सहगल ने बताया कि एंबुलेंस समय पर क्यों नहीं पहुंची, इसको लेकर एंबुलेंस प्रदाता कंपनी से जवाब मांगा जाएगा।
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15 मिनट खाली सिलिंडरों को निकालने और भरे को लगाने में हो गए व्यर्थ
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। दिन : वीरवार, समय : शाम 3 बजे, स्थान : मेडिकल कॉलेज चंबा। पिकअप दुर्घटना में घायल अलका देवी को डॉक्टरों ने टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
रिश्तेदारों ने एंबुलेंस सेवा पर फोन कर बुकिंग करवाई। 3:30 बजे तक भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। परिजन अन्य एंबुलेंस कर्मचारियों से जीवनदायिनी एंबुलेंस के चालक का नंबर ले रहे हैं। चालक को फोन किया तो जवाब मिला कि बालू के पास पहुंचे हैं। जल्द अस्पताल आ जाएंगे। शाम को 4 बजे एंबुलेंस अस्पताल पहुंचती है। परिजन घायल को एंबुलेंस में डालने की बात करने लगे तो एंबुलेंस कर्मचारियों ने कहा कि पहले ऑक्सीजन सिलिंडर लोड करने पड़ेंगे। एंबुलेंस में दोनों सिलिंडर खाली निकले।
4:15 बजे घायल के रिश्तेदारों ने ऑक्सीजन प्लांट में पहले एंबुलेंस के खाली ऑक्सीजन सिलिंडरों को पहुंचाया, उसके बाद भरे हुए सिलिंडर लाए। मदद के लिए वहां कोई मौजूद नहीं था। एंबुलेंस कर्मचारियों ने दोनों सिलिंडर एंबुलेंस में फिट किए। उसके बाद घायल को आपातकालीन कक्ष से लाया गया और टांडा रवाना किया गया। यह एंबुलेंस घायल को टांडा पहुंचाने के लिए 6600 रुपये लेती है। बावजूद इसमें उसमें जीवन के लिए सबसे जरूरी ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं थी। उधर, मेडिकल कॉलेज की आपातकालीन कक्ष में तैनात डॉक्टर ने एंबुलेंस कर्मचारियों को इस लचर व्यवस्था के लिए लताड़ भी लगाई। घायल की जिंदगी को ध्यान में रखकर उन्होंने मेडिकल कॉलेज में रखे दोनों सिलिंडरों को एंबुलेंस में लगाने के लिए कहा। 4:20 पर एंबुलेंस घायल को टांडा लेकर रवाना हो पाई। मेडिकल कॉलेज प्रवक्ता डॉ. मानिक सहगल ने बताया कि एंबुलेंस समय पर क्यों नहीं पहुंची, इसको लेकर एंबुलेंस प्रदाता कंपनी से जवाब मांगा जाएगा।
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