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Chamba News: डंडों के सहारे टिकाई छत, जान हथेली में रखकर रातें काट रहा परिवार
Sun, 22 Sep 2024 09:46 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 22 Sep 2024 09:46 PM IST
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डंडे के सहारे टिकाई गई छत।स्त्रोत जागरूक पाठक
चंबा। डंडों के सहारे टिकाई छत, हथेली पर जान और डर के साये में कट रहीं रातें। बारिश हो जाए तो बच्चों समेत पड़ोसियों के घर में शरण लेनी पड़ती है। विकास खंड चंबा की सुंगल पंचायत के बन्नू निवासी आत्मा राम का परिवार कुछ इसी तरह समय व्यतीत कर रहे हैं।
बीपीएल से संबंधित परिवार में सात सदस्य हैं। इनमें दो बच्चे हैं। आत्मा राम ने बताया एक सप्ताह पहले भारी बारिश के दौरान मकान के पीछे भूस्खलन हो गया था। मलबे के साथ आए पत्थरों ने घर की दीवार तोड़ दी थी। इससे घर की छत भी गिर गई। कमरे में सो रहीं दो पोतियों को सुरक्षित निकाल लिया गया। बताया कि आवास योजना के लिए पंचायत प्रबंधन को सूचित किया, लेकिन अभी तक अपना मकान नहीं मिल पाया है। उन्होंने बताया कि दो वर्ष पहले भी मूसलाधार बारिश के कारण भारी बारिश के बाद मलबा उनके घर में घुस गया था। इससे मकान क्षतिग्रस्त हो गया था। गनीमत रही कि परिवार का कोई सदस्य चोटिल नहीं हुआ।
इसके बाद पंचायत प्रतिनिधियों और राजस्व विभाग को सूचित किया गया। राजस्व विभाग ने दस हजार रुपये की फौरी राहत दी। इससे मकान पर चादरें डालीं। पंचायत ने कई बार मकान का सर्वे किया, लेकिन आज तक बीपीएल परिवार से संबंधी इस परिवार को अपना मकान तक नसीब नहीं हो पाया है।
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अब पंचायत प्रतिनिधि 2018 के सर्वेक्षण के जरिये पहले क्रम में 30 प्रभावित परिवारों में से महज 18 परिवारों को ही मकान मिलने की बात कह रहे हैं। प्रभावित परिवार ने भेदभाव कर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान आवंटित करने के आरोप भी लगाए हैं। परिवार में उनके अलावा उनकी पत्नी, तीन बेटियां, बेटा-बहू और दो पोतियां हैं। बेटी और पोती को खंडहर बन चुके मकान में पढ़ाई कर रही हैं।
पंचायत प्रधान सुंगल लवली शर्मा ने बताया कि प्रभावित परिवार बीपीएल श्रेणी में है। प्रधानमंत्री आवास योजना में 2018 में प्रस्तावित 30 मकानों में से महज 18 मकान स्वीकृत हुए हैं। प्रभावित परिवार का ग्राम सभा के जरिये भी कई बार प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव स्वीकृत होने पर परिवार को लाभान्वित किया जाएगा।
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बीपीएल से संबंधित परिवार में सात सदस्य हैं। इनमें दो बच्चे हैं। आत्मा राम ने बताया एक सप्ताह पहले भारी बारिश के दौरान मकान के पीछे भूस्खलन हो गया था। मलबे के साथ आए पत्थरों ने घर की दीवार तोड़ दी थी। इससे घर की छत भी गिर गई। कमरे में सो रहीं दो पोतियों को सुरक्षित निकाल लिया गया। बताया कि आवास योजना के लिए पंचायत प्रबंधन को सूचित किया, लेकिन अभी तक अपना मकान नहीं मिल पाया है। उन्होंने बताया कि दो वर्ष पहले भी मूसलाधार बारिश के कारण भारी बारिश के बाद मलबा उनके घर में घुस गया था। इससे मकान क्षतिग्रस्त हो गया था। गनीमत रही कि परिवार का कोई सदस्य चोटिल नहीं हुआ।
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इसके बाद पंचायत प्रतिनिधियों और राजस्व विभाग को सूचित किया गया। राजस्व विभाग ने दस हजार रुपये की फौरी राहत दी। इससे मकान पर चादरें डालीं। पंचायत ने कई बार मकान का सर्वे किया, लेकिन आज तक बीपीएल परिवार से संबंधी इस परिवार को अपना मकान तक नसीब नहीं हो पाया है।
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अब पंचायत प्रतिनिधि 2018 के सर्वेक्षण के जरिये पहले क्रम में 30 प्रभावित परिवारों में से महज 18 परिवारों को ही मकान मिलने की बात कह रहे हैं। प्रभावित परिवार ने भेदभाव कर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान आवंटित करने के आरोप भी लगाए हैं। परिवार में उनके अलावा उनकी पत्नी, तीन बेटियां, बेटा-बहू और दो पोतियां हैं। बेटी और पोती को खंडहर बन चुके मकान में पढ़ाई कर रही हैं।
पंचायत प्रधान सुंगल लवली शर्मा ने बताया कि प्रभावित परिवार बीपीएल श्रेणी में है। प्रधानमंत्री आवास योजना में 2018 में प्रस्तावित 30 मकानों में से महज 18 मकान स्वीकृत हुए हैं। प्रभावित परिवार का ग्राम सभा के जरिये भी कई बार प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव स्वीकृत होने पर परिवार को लाभान्वित किया जाएगा।