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चंबा के जंगलो से नाग छतरी की अवैध तस्करी को मुस्तैद हुआ वन विभाग
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चंबा के जंगलो में तैयार हो रही नाग छतरी जड़ी बूटी।
- फोटो : Chamba
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चंबा। चंबा जिले के जंगलों में नाग छतरी नामक जड़ी बूटी तैयार हो चुकी है। ऐसे में इसकी तस्करी करने वाले लोग भी सक्रिय हो गए हैं। इन तस्करों पर शिकंजा कसने के लिए वन विभाग सतर्क हो गया है। जंगलों में वन रक्षकों की गश्त बढ़ा दी है। सभी कर्मचारियों को जंगलों पर कड़ी निगरानी रखने को कहा है। जिन जंगलों में नाग छतरी भारी मात्रा में तैयार होती है। उन इलाकों में रोजाना पेट्रोलिंग के आदेश दिए गए हैं। चंबा वन मंडल के सुंदरी बीट, दरकुुंड, जोत, बकाणी सहित अन्य दर्जनों जंगलों में इसकी पैदावार होती है। जहां पर वन रक्षकों की ड्यूटी बढ़ा दी गई है।
वहीं, वन विभाग ने जिले में कुछ लोगों को इस जड़ी बूटी को निकालने के परमिट भी जारी किए हैं। परमिट धारक लोग इस जड़ी बूटी को जंगल से निकालकर बेच सकते हैं। जड़ी-बूटी निकालकर बेचने से पहले उन्हें विभाग को इसकी सूचना देनी होती है। विभागीय टीम जड़ी बूटी की मात्रा का आकलन करती है। इसके बाद इसे बेचने की अनुमति दी जाती है। लेकिन, अन्य लोगों को इसे निकालने की अनुमति नहीं हैं। पिछले साल नाग छतरी की तस्करी के आरोप में वन विभाग और पुलिस ने कई लोगों को नाकों के दौरान पकड़ा था। इस बार बर्फबारी और बारिश की वजह से जंगलों में इस जड़ी बूटी की पैदावार काफी अधिक मात्रा में हुई है। इसलिए वन विभाग इसकी तस्करी रोकने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है।
दवाइयों में होता है इसका इस्तेमाल
नाग छतरी का इस्तेमाल हर्बल टॉनिक, च्यवनप्राश और यौवन शक्ति बढ़ाने वाली दवाइयों को बनाने में किया जाता है। इसलिए इस जड़ी बूटी की बाहरी देशों में काफी मांग है। चंबा जिले में यह बूटी काफी मात्रा में पाई जाती है। इसलिए बाहरी राज्यों के लोग जिले के तस्करों के साथ मिलकर इस जड़ी बूटी को अन्य देशों में पहुंचाने का कार्य करते हैं।
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वनमंडल अधिकारी चंबा अमित शर्मा ने बताया कि नाग छतरी जड़ी-बूटी जंगलों में तैयार हो चुकी है। इसकी अवैैध तस्करी रोकने के लिए विभागीय टीमें मुस्तैद कर दी गई हैं। वन रक्षक अपनी बीटों पर रूटीन में पेट्रोलिंग कर रहे हैं। इस बार किसी भी तरीके से इस जड़ी बूटी की अवैध तस्करी नहीं होने दी जाएगी।
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वहीं, वन विभाग ने जिले में कुछ लोगों को इस जड़ी बूटी को निकालने के परमिट भी जारी किए हैं। परमिट धारक लोग इस जड़ी बूटी को जंगल से निकालकर बेच सकते हैं। जड़ी-बूटी निकालकर बेचने से पहले उन्हें विभाग को इसकी सूचना देनी होती है। विभागीय टीम जड़ी बूटी की मात्रा का आकलन करती है। इसके बाद इसे बेचने की अनुमति दी जाती है। लेकिन, अन्य लोगों को इसे निकालने की अनुमति नहीं हैं। पिछले साल नाग छतरी की तस्करी के आरोप में वन विभाग और पुलिस ने कई लोगों को नाकों के दौरान पकड़ा था। इस बार बर्फबारी और बारिश की वजह से जंगलों में इस जड़ी बूटी की पैदावार काफी अधिक मात्रा में हुई है। इसलिए वन विभाग इसकी तस्करी रोकने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है।
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दवाइयों में होता है इसका इस्तेमाल
नाग छतरी का इस्तेमाल हर्बल टॉनिक, च्यवनप्राश और यौवन शक्ति बढ़ाने वाली दवाइयों को बनाने में किया जाता है। इसलिए इस जड़ी बूटी की बाहरी देशों में काफी मांग है। चंबा जिले में यह बूटी काफी मात्रा में पाई जाती है। इसलिए बाहरी राज्यों के लोग जिले के तस्करों के साथ मिलकर इस जड़ी बूटी को अन्य देशों में पहुंचाने का कार्य करते हैं।
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वनमंडल अधिकारी चंबा अमित शर्मा ने बताया कि नाग छतरी जड़ी-बूटी जंगलों में तैयार हो चुकी है। इसकी अवैैध तस्करी रोकने के लिए विभागीय टीमें मुस्तैद कर दी गई हैं। वन रक्षक अपनी बीटों पर रूटीन में पेट्रोलिंग कर रहे हैं। इस बार किसी भी तरीके से इस जड़ी बूटी की अवैध तस्करी नहीं होने दी जाएगी।