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अंग्रेजो के शासन काल में बना ओसवाड चर्च का मिटा नामोनिशान
Updated Wed, 30 May 2018 10:16 PM IST
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जंगलों की आग बेकाबू, रिहायशी और सेना क्षेत्र भी खतरे में
आग लाखों की वन संपदा को राख करने के बाद गांवों की बढ़ी
जंगल की आग को बुझाना दमकल विभाग और वन विभाग के लिए कड़ी चुनौती
विशाल आनंद
डलहौजी (चंबा)। जिले के जंगलों में लगी आग पर बेकाबू होती जा रही है। हालत यह है कि आग में जहां रिहायशी इलाकों के लिए खतरा पैदा हो गया है तो वहीं सेना का क्षेत्र भी आग से सुरक्षित नहीं है। डलहौजी क्षेत्र में कई जंगलों में आग की घटनाएं सामने आ चुकी हैं और बकलोह में ब्रिटिश शासनकाल बना ओसवाड चर्च मंगलवार को जंगल में लगी आग में जलकर राख हो गया। यह क्षेत्र भी सेना के अधीन ही आता है। जबकि एमईएस का भवन भी जल गया है। 133 वर्ष पुराने इस चर्च का निर्माण वर्ष 1884 में किया गया था। इस चर्च को देखने के लिए देश और प्रदेश के अलावा विदेशों से भी पर्यटक पहुंचते थे। बताया जाता है कि चर्च को विदेशी कारीगरों ने बनाया था। मगर अब पर्यटक इस एतिहासिक चर्च को नहीं देख पाएंगे। क्योंकि जंगल की आग ने एतिहासिक चर्च को जलाकर राख कर दिया। वहीं ईसाई समुदाय के लोग रविवार प्रार्थना के अलावा त्यौहारों को मनाने के लिए इसी चर्च में इकट्ठा होते थे। चर्च के जलने से अब उन्हें भी त्यौहार मनाने के लिए दूसरे चर्च में जाना होगा। चर्च जलने से लोगों की आस्था को भी ठेस पहुंची है। चर्च की बनावट में पुरानी कला दिखाई देती थी। इसकी बनावट इस प्रकार की थी कि इसे देखने वाला देखता ही रह जाता था। मगर अब लोग चर्च की उस बनावट को दोबारा नहीं देख पाएंगे। चर्च के भीतर भी कई ऐसी ऐतिहासिक आकृतियां लगी थीं, जिसे देखकर लोग दंग रह जाते थे। सरकार और प्रशासन चाहे चर्च को दोबारा से खड़ा कर दे। मगर उसकी पुरानी बनावट को नहीं बना पाएंगे। बताया जा रहा है कि अंग्रेजों ने इस चर्च को बनवाने के लिए विदेशों से विशेष कारीगर बुलाए थे। जोकि अब नहीं आ पाएंगे। इसलिए ओसवाड चर्च अब इतिहास बनकर रह जाएगा।
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कलोनीमोड़ जंगल में आग, एक दर्जन पेड़ जले
वन विभाग और दमकल विभाग के कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद पाया काबू
अमर उजाला ब्यूरो
तीसा(चंबा)। चुराह उपमंडल के तहत ग्राम पंचायत तीसा के समीप कलोनीमोड़ जंगल में शरारती तत्वों ने आग लगा दी। इस आग में करीब एक दर्जन चील के पेड़ जल गए हैं। सूचना मिलते ही वन विभाग और दमकल विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग को बुझाया। इसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली। गौरतलब है कि इन दिनों जंगलों में आग लगने के मामले नहीं थम रहे हैं। लगातार वन संपदा आग में धू-धू कर जल रही है। मंगलवार को आग बुझाते समय एक अधिकारी पैर फिसलने से खाई मे गिरकर काल का ग्रास बन चुका है। मगर अभी भी शरारती तत्व वन संपदा में आग लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। इससे जहां पर्यावरण को नुकसान हो रहा है तो वहीं दूसरी तरफ बेशकीमती वन संपदा भी जलकर राख हो रही है। वन परिक्षेत्र अधिकारी जोगिंद्र सिंह ने बताया कि दो बजे आग लगी थी। मौके पर पहुंचकर विभाग की टीम ने दमकल विभाग के सहयोग से आग को बुझाया है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया है कि वह जंगलों में आग न लगाएं।
काथलू गांव में तीन गौशालाएं जलीं
अमर उजाला ब्यूरो
चुवाड़ी (चंबा)। भटियात उपमंडल के तहत ग्राम पंचायत परछोड़ के गांव काथलू में तीन गौशालाएं जंगल की आग से जल गईं। यह मामला मंगलवार देर शाम को सामने आया। गनीमत रही कि आग के दौरान गौशाला में पशु नहीं बंधे थे। अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। पूर्व पंचायत प्रधान राज कुमार चंबियाल ने बताया कि घटना में प्रभावित कमर सिंह पुत्र किरपोराम, चैन सिंह पुत्र भगतो राम और केवल सिंह पुत्र कमर सिंह की गौशाला जल गई है। गौरतलब है कि उपमंडल में आग लगने की घटनाएं दिनप्रतिदिन बढ़ती जा रही है। पूर्व प्रधान राज कुमार चंबियाल ने लोगों से आह्वान किया है कि वह वन संपदा को आग न लगाएं।
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आग लाखों की वन संपदा को राख करने के बाद गांवों की बढ़ी
जंगल की आग को बुझाना दमकल विभाग और वन विभाग के लिए कड़ी चुनौती
विशाल आनंद
डलहौजी (चंबा)। जिले के जंगलों में लगी आग पर बेकाबू होती जा रही है। हालत यह है कि आग में जहां रिहायशी इलाकों के लिए खतरा पैदा हो गया है तो वहीं सेना का क्षेत्र भी आग से सुरक्षित नहीं है। डलहौजी क्षेत्र में कई जंगलों में आग की घटनाएं सामने आ चुकी हैं और बकलोह में ब्रिटिश शासनकाल बना ओसवाड चर्च मंगलवार को जंगल में लगी आग में जलकर राख हो गया। यह क्षेत्र भी सेना के अधीन ही आता है। जबकि एमईएस का भवन भी जल गया है। 133 वर्ष पुराने इस चर्च का निर्माण वर्ष 1884 में किया गया था। इस चर्च को देखने के लिए देश और प्रदेश के अलावा विदेशों से भी पर्यटक पहुंचते थे। बताया जाता है कि चर्च को विदेशी कारीगरों ने बनाया था। मगर अब पर्यटक इस एतिहासिक चर्च को नहीं देख पाएंगे। क्योंकि जंगल की आग ने एतिहासिक चर्च को जलाकर राख कर दिया। वहीं ईसाई समुदाय के लोग रविवार प्रार्थना के अलावा त्यौहारों को मनाने के लिए इसी चर्च में इकट्ठा होते थे। चर्च के जलने से अब उन्हें भी त्यौहार मनाने के लिए दूसरे चर्च में जाना होगा। चर्च जलने से लोगों की आस्था को भी ठेस पहुंची है। चर्च की बनावट में पुरानी कला दिखाई देती थी। इसकी बनावट इस प्रकार की थी कि इसे देखने वाला देखता ही रह जाता था। मगर अब लोग चर्च की उस बनावट को दोबारा नहीं देख पाएंगे। चर्च के भीतर भी कई ऐसी ऐतिहासिक आकृतियां लगी थीं, जिसे देखकर लोग दंग रह जाते थे। सरकार और प्रशासन चाहे चर्च को दोबारा से खड़ा कर दे। मगर उसकी पुरानी बनावट को नहीं बना पाएंगे। बताया जा रहा है कि अंग्रेजों ने इस चर्च को बनवाने के लिए विदेशों से विशेष कारीगर बुलाए थे। जोकि अब नहीं आ पाएंगे। इसलिए ओसवाड चर्च अब इतिहास बनकर रह जाएगा।
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कलोनीमोड़ जंगल में आग, एक दर्जन पेड़ जले
वन विभाग और दमकल विभाग के कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद पाया काबू
अमर उजाला ब्यूरो
तीसा(चंबा)। चुराह उपमंडल के तहत ग्राम पंचायत तीसा के समीप कलोनीमोड़ जंगल में शरारती तत्वों ने आग लगा दी। इस आग में करीब एक दर्जन चील के पेड़ जल गए हैं। सूचना मिलते ही वन विभाग और दमकल विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग को बुझाया। इसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली। गौरतलब है कि इन दिनों जंगलों में आग लगने के मामले नहीं थम रहे हैं। लगातार वन संपदा आग में धू-धू कर जल रही है। मंगलवार को आग बुझाते समय एक अधिकारी पैर फिसलने से खाई मे गिरकर काल का ग्रास बन चुका है। मगर अभी भी शरारती तत्व वन संपदा में आग लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। इससे जहां पर्यावरण को नुकसान हो रहा है तो वहीं दूसरी तरफ बेशकीमती वन संपदा भी जलकर राख हो रही है। वन परिक्षेत्र अधिकारी जोगिंद्र सिंह ने बताया कि दो बजे आग लगी थी। मौके पर पहुंचकर विभाग की टीम ने दमकल विभाग के सहयोग से आग को बुझाया है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया है कि वह जंगलों में आग न लगाएं।
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काथलू गांव में तीन गौशालाएं जलीं
अमर उजाला ब्यूरो
चुवाड़ी (चंबा)। भटियात उपमंडल के तहत ग्राम पंचायत परछोड़ के गांव काथलू में तीन गौशालाएं जंगल की आग से जल गईं। यह मामला मंगलवार देर शाम को सामने आया। गनीमत रही कि आग के दौरान गौशाला में पशु नहीं बंधे थे। अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। पूर्व पंचायत प्रधान राज कुमार चंबियाल ने बताया कि घटना में प्रभावित कमर सिंह पुत्र किरपोराम, चैन सिंह पुत्र भगतो राम और केवल सिंह पुत्र कमर सिंह की गौशाला जल गई है। गौरतलब है कि उपमंडल में आग लगने की घटनाएं दिनप्रतिदिन बढ़ती जा रही है। पूर्व प्रधान राज कुमार चंबियाल ने लोगों से आह्वान किया है कि वह वन संपदा को आग न लगाएं।
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