{"_id":"5cc5d4c7bdec22073226174c","slug":"71556468935-chamba-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रिटायरमेंट पार्टी छोड़ घायलों की मदद को दौड़ पड़े ग्रामीण","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम","slug":"crime"}}
रिटायरमेंट पार्टी छोड़ घायलों की मदद को दौड़ पड़े ग्रामीण
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डलहौजी (चंबा)। डलहौजी का पंजपुला इलाका शनिवार शाम सात बजे उस समय चीख पुकार की आगोश में चला गया। जब शाम सात बजे तीस सवारियों से भरी एक निजी बस गहरी खाई में गिर गई। जिस स्थान पर बस गिरी उसके ठीक सामने गांव में रिटायरमेंट पार्टी चल रही थी। बस के नीचे गिरने से आवाज आई और एक बड़ा गुबार आसमान की तरफ उठा। ग्रामीणों ने सोचा कि जेसीबी सड़क का मलबा नीचे पहाड़ी में फेंक रही है।
कुछ ही देर में गांव के एक व्यक्ति को फोन आ गया कि यहां बस हादसा हुआ है। हादसे की सूचना मिलते ही रिटायरमेंट पार्टी छोड़ सभी लोग मदद के लिए घटनास्थल पर पहुंच गए। गहरी खाई में उतर कर लोगों ने घायलों को सड़क तक पहुंचाया। जहां से निजी वाहनों व एंबुलेंस के जरिए घायलों को बनीखेत, डलहौजी और ककीरा अस्पताल पहुंचाया गया।
इस राहत कार्य में आर्मी, पुलिस व पर्यटकों के अलावा स्थानीय लोगों ने भरपूर सहयोग दिया। सड़क से जाने वाले पर्यटकों ने अपनी गाड़ियों से घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। सात बजे से लेकर रात दस बजे तक बचाव कार्य चलता रहा। घायलों को साढ़े आठ बजे तक स्वास्थ्य संस्थानों में पहुंचा दिया गया, जबकि शवों को निकालने में रात के दस बज गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
कुछ ही देर में गांव के एक व्यक्ति को फोन आ गया कि यहां बस हादसा हुआ है। हादसे की सूचना मिलते ही रिटायरमेंट पार्टी छोड़ सभी लोग मदद के लिए घटनास्थल पर पहुंच गए। गहरी खाई में उतर कर लोगों ने घायलों को सड़क तक पहुंचाया। जहां से निजी वाहनों व एंबुलेंस के जरिए घायलों को बनीखेत, डलहौजी और ककीरा अस्पताल पहुंचाया गया।
विज्ञापन
इस राहत कार्य में आर्मी, पुलिस व पर्यटकों के अलावा स्थानीय लोगों ने भरपूर सहयोग दिया। सड़क से जाने वाले पर्यटकों ने अपनी गाड़ियों से घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। सात बजे से लेकर रात दस बजे तक बचाव कार्य चलता रहा। घायलों को साढ़े आठ बजे तक स्वास्थ्य संस्थानों में पहुंचा दिया गया, जबकि शवों को निकालने में रात के दस बज गए।
विज्ञापन