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जनजातिय क्षेत्र पांगी में 16 उप-स्वास्थ्य केंद्र चपरासी के सहारे
Updated Fri, 06 Jul 2018 11:14 PM IST
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पांगी (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र पांगी की 16 पंचायतों में उपस्वास्थ्य केंद्र चपरासी के सहारे चल रहे हैं। इसके चलते लोगों को स्वास्थ्य सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है। पांगी क्षेत्र इतना दुर्गम है कि वहां पर लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पंचायतों में स्वास्थ्य सुविधा न मिलने से लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। सरकार ने नाम के लिए तो हरेक पंचायत में उपस्वास्थ्य केंद्र खोल हैं। परंतु उनमें मरीजों की जांच व दवाई देने के लिए किसी फार्मासिस्ट को नियुक्त नहीं किया है। इलाज के लिए घाटी की 24 हजार आबादी को इकलौते सिविल अस्पताल किलाड़ पर निर्भर रहना पड़ता है। नजदीकी पंचायतों के लोग तो वहां तक पहुंच जाते हैं। दूर दराज की पंचायतों के लोग किलाड़ नहीं पहुंच पाते। लोगों में साच, जगदीश, सुरदेव, मान सिंह, सतीश, भीम राम, सुरेश, प्रेम सिंह, संजय, मेघ नाथ, राजेंद्र, चंद्र भागा, राम सिंह, आदर्श ठाकुर, देवेंद्र ठाकुर, गुरमीत सिंह, दाव छेलिंग व टेक राम ने बताया कि पांगी घाटी में चल रहे स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर सहित अन्य स्टाफ का टोटा है। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार व स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि पांगी घाटी के स्वास्थ्य केंद्रों में जल्द से जल्द डॉक्टरों व फार्मासिस्ट के रिक्त पद भरे जाएं।
सिविल अस्पताल किलाड़ के बीएमओ डॉ. महिंद्र ठाकुर ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर व स्टाफ की कमी के बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी को अवगत करवा दिया गया है। जल्द ही स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर व फार्मासिस्ट आने की उम्मीद है।
इन उपस्वास्थ्य केंद्रों में नहीं कोई फार्मासिस्ट
उपस्वास्थ्य केंद्र मिंधल, पुर्थी, सुराल, सहाली, कुमार, लुज, हुडान, रेई, करेल, साच, धरवास, सेचु नाला, करयूनी, करयास, किलाड़ व उदीन में मरीजों की जांच के लिए कोई भी फार्मासिस्ट तैनात नहीं है।
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इन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में नहीं कोई डॉक्टर
पांगी घाटी में चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चल रहे हैं। जहां पर भी कोई डॉक्टर तैनात नहीं है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र साच, पुर्थी, सेचु नाला व धरवास में लोग डॉक्टर नियुक्त करने की मांग कर रहे हैं। चिकित्सक के अभाव में यदि कोई क्षेत्र में यकायक बीमार पड़ जाता है तो उसे सिविल अस्पताल ही लेकर जाना पड़ता है। सिविल अस्पताल किलाड़ से रेफर होने वाले मरीज को मेडिकल कॉलेज चंबा या फिर किश्तवाड़ इलाज के लिए ले जाना पड़ता है। कुल मिला कर लचर स्वास्थ्य सेवाओं का खामियाजा पांगी के बाशिंदों को ही उठाना पड़ रहा है।
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सिविल अस्पताल किलाड़ के बीएमओ डॉ. महिंद्र ठाकुर ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर व स्टाफ की कमी के बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी को अवगत करवा दिया गया है। जल्द ही स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर व फार्मासिस्ट आने की उम्मीद है।
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इन उपस्वास्थ्य केंद्रों में नहीं कोई फार्मासिस्ट
उपस्वास्थ्य केंद्र मिंधल, पुर्थी, सुराल, सहाली, कुमार, लुज, हुडान, रेई, करेल, साच, धरवास, सेचु नाला, करयूनी, करयास, किलाड़ व उदीन में मरीजों की जांच के लिए कोई भी फार्मासिस्ट तैनात नहीं है।
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इन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में नहीं कोई डॉक्टर
पांगी घाटी में चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चल रहे हैं। जहां पर भी कोई डॉक्टर तैनात नहीं है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र साच, पुर्थी, सेचु नाला व धरवास में लोग डॉक्टर नियुक्त करने की मांग कर रहे हैं। चिकित्सक के अभाव में यदि कोई क्षेत्र में यकायक बीमार पड़ जाता है तो उसे सिविल अस्पताल ही लेकर जाना पड़ता है। सिविल अस्पताल किलाड़ से रेफर होने वाले मरीज को मेडिकल कॉलेज चंबा या फिर किश्तवाड़ इलाज के लिए ले जाना पड़ता है। कुल मिला कर लचर स्वास्थ्य सेवाओं का खामियाजा पांगी के बाशिंदों को ही उठाना पड़ रहा है।