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Bilaspur News: विनय के बाद भी जब नहीं माने सागर राज
Mon, 29 Sep 2025 11:20 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Mon, 29 Sep 2025 11:20 PM IST
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डियारा में आयोजित रामलीला का दृश्य। संवाद
प्रभु श्री राम ने क्रोध में आकर सागर को सुखाने का लिया संकल्प
दूसरे दृश्य में दिखाई रामेश्वरम की स्थापना और भगवान शिव की उपासना
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के डियारा सेक्टर में चल रही रामलीला में पहले दृश्य में भगवान राम की सागर राज से भेंट को दर्शाया गया। अनुनय विनय के बावजूद जब सागर राज ने मार्ग देने से इनकार किया तो प्रभु राम अपने क्रोध से सागर को सुखाने का संकल्प लेते हैं। इस पर सागर राज भयभीत होकर प्रकट हुए और विनती की कि ऐसा न करें, क्योंकि इससे प्रकृति और सभी जीव-जंतु प्रभावित होंगे।
सागर राज ने यह भी बताया कि राम सेना के नल और नील विशेष शक्ति वाले योद्धा हैं, जिनके द्वारा फेंके गए पत्थर पानी में नहीं डूबते। इस कारण से सेतुबंध का कार्य उन्हीं के सहयोग से संभव है। दूसरे दृश्य में रामेश्वरम की स्थापना और भगवान शिव की उपासना के बाद लंका पर आक्रमण की विधिवत घोषणा की गई। तीसरे दृश्य में रावण द्वारा प्रभु राम की पैरवी करने पर विभीषण को दरबार से निष्कासित किया जाता है। चौथे दृश्य में भगवान राम अपने भाई कुंभकरण को रत्न गुहा से उठाने के प्रयास में दिखाई दिए। पांचवें दृश्य में बाली के पुत्र अंगद प्रभु राम के दूत बनकर रावण की सभा में माता सीता को लौटाने का आग्रह करते हैं, लेकिन रावण उनका तिरस्कार करते हुए उन्हें वापस भेज देता है। इस संध्या के मुख्य अतिथि डॉ. श्वेता पठानिया रहीं। दर्शकों ने मंचन की सराहना की।
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दूसरे दृश्य में दिखाई रामेश्वरम की स्थापना और भगवान शिव की उपासना
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के डियारा सेक्टर में चल रही रामलीला में पहले दृश्य में भगवान राम की सागर राज से भेंट को दर्शाया गया। अनुनय विनय के बावजूद जब सागर राज ने मार्ग देने से इनकार किया तो प्रभु राम अपने क्रोध से सागर को सुखाने का संकल्प लेते हैं। इस पर सागर राज भयभीत होकर प्रकट हुए और विनती की कि ऐसा न करें, क्योंकि इससे प्रकृति और सभी जीव-जंतु प्रभावित होंगे।
सागर राज ने यह भी बताया कि राम सेना के नल और नील विशेष शक्ति वाले योद्धा हैं, जिनके द्वारा फेंके गए पत्थर पानी में नहीं डूबते। इस कारण से सेतुबंध का कार्य उन्हीं के सहयोग से संभव है। दूसरे दृश्य में रामेश्वरम की स्थापना और भगवान शिव की उपासना के बाद लंका पर आक्रमण की विधिवत घोषणा की गई। तीसरे दृश्य में रावण द्वारा प्रभु राम की पैरवी करने पर विभीषण को दरबार से निष्कासित किया जाता है। चौथे दृश्य में भगवान राम अपने भाई कुंभकरण को रत्न गुहा से उठाने के प्रयास में दिखाई दिए। पांचवें दृश्य में बाली के पुत्र अंगद प्रभु राम के दूत बनकर रावण की सभा में माता सीता को लौटाने का आग्रह करते हैं, लेकिन रावण उनका तिरस्कार करते हुए उन्हें वापस भेज देता है। इस संध्या के मुख्य अतिथि डॉ. श्वेता पठानिया रहीं। दर्शकों ने मंचन की सराहना की।
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