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Bilaspur News: एसीसी बरमाणा में आधी से भी कम रह गई ढुलाई, चार महीने से कमाई पर असर

Fri, 18 Sep 2026 12:57 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Sep 2026 12:57 AM IST
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Transportation at ACC Barmana drops to less than half; earnings hit for four months.
जीतराम गौतम
पहले रोजाना 10-12 हजार मीट्रिक टन तक होता था सीमेंट-क्लिंकर का परिवहन, अब पांच हजार टन पर सिमटा काम
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चालक-परिचालक से लेकर मैकेनिक और ढाबा कारोबार प्रभावित

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बरमाणा में ट्रकों की रफ्तार थमने का असर सिर्फ सड़कों पर खड़े वाहनों तक सीमित नहीं है। एसीसी प्लांट से माल ढुलाई घटने के साथ इससे जुड़े हजारों परिवारों की आमदनी प्रभावित होने लगी है। चार महीने से काम में आई कमी ने ट्रक ऑपरेटरों के साथ चालक-परिचालक, मैकेनिक, स्पेयर पार्ट्स कारोबारी, टायर विक्रेता, ढाबा संचालक और छोटे दुकानदारों की चिंता बढ़ा दी है। पहले एसीसी बरमाणा से रोजाना करीब 10 से 12 हजार मीट्रिक टन सीमेंट और क्लिंकर की ढुलाई होती थी, जो अब घटकर करीब पांच हजार मीट्रिक टन रह गई है।

ढुलाई की मात्रा घटने का सीधा असर ट्रकों के चक्करों पर पड़ा है। पहले जिन वाहनों को नियमित काम मिलता था, अब उनमें कई काम की प्रतीक्षा में खड़े रहते हैं। वाहन खड़ा रहने के बावजूद ऑपरेटरों को किस्त, बीमा, टैक्स और रखरखाव समेत दूसरे खर्च लगातार उठाने पड़ रहे हैं। बरमाणा में करीब 2,500 ट्रक ऑपरेटरों के वाहन हैं। इसके अलावा करीब 1,500 वाहन पूर्व सैनिकों से जुड़े हैं। यानी करीब चार हजार वाहन इस ढुलाई व्यवस्था से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। एक ट्रक से सिर्फ वाहन मालिक या चालक की ही रोजी नहीं जुड़ी है। चालक-परिचालक के अलावा क्लीनर, मैकेनिक, वेल्डर, टायर कारोबारी और स्पेयर पार्ट्स विक्रेता भी ट्रकों की आवाजाही पर निर्भर हैं। ट्रकों के चक्कर कम होने से सर्विस, टायर, ऑयल और मरम्मत पर होने वाला खर्च भी घटा है। इसका असर बरमाणा के आसपास के बाजार पर दिखने लगा है। ट्रक चालकों की आवाजाही से चलने वाले ढाबे और छोटे दुकानदार भी प्रभावित हो रहे हैं। ट्रांसपोर्टरों के अनुसार एसीसी का दूसरा प्लांट पिछले महीने के आखिर तक तैयार हो गया था, लेकिन इसका संचालन अभी शुरू नहीं हुआ है। ऑपरेटरों का कहना है कि दूसरे प्लांट के शुरू होने से ढुलाई बढ़ सकती थी और खड़े वाहनों को काम मिल सकता था। प्लांट के लिए जरूरी कच्चे माल की ढुलाई भी ट्रकों से होती है। ऐसे में ट्रांसपोर्टर दूसरे प्लांट के संचालन में देरी का कारण स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं।
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ट्रांसपोर्टरों की चिंता यह भी है कि काम कम होने के बावजूद वाहनों से जुड़े खर्च कम नहीं हुए हैं। कर्ज लेकर वाहन खरीदने वाले छोटे ऑपरेटरों के सामने सबसे बड़ी समस्या वाहन के लंबे समय तक खड़े रहने की है। उनका कहना है कि उन्हें अनुबंध के अनुसार काम और उनका हक मिलना चाहिए। साथ ही एसीसी बरमाणा और दाड़लाघाट परियोजनाओं में काम के वितरण की स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए। ट्रांसपोर्टरों ने अप्रैल से लंबित डीए जारी करने, अनुबंध के अनुसार बढ़ोतरी देने, एग्रीमेंट का नवीनीकरण करने और ढुलाई का काम बढ़ाने की मांग उठाई है। मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है। हालांकि ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि उन्होंने प्लांट में काम पूरी तरह बंद नहीं किया है। उपलब्ध काम के अनुसार ढुलाई की जा रही है और धरना-प्रदर्शन के माध्यम से मांगें उठाई जा रही हैं। उनका कहना है कि वे प्लांट का काम रोकने के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि नियमित और पर्याप्त काम तथा लंबित मांगों के समाधान की मांग कर रहे हैं।
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अनुबंध के अनुसार मिले काम
बीडीटीएस प्रधान जीत राम गौतम ने कहा कि ट्रांसपोर्टरों को अनुबंध के अनुसार काम और उनका हक मिलना चाहिए। काम कम होने से वाहन ऑपरेटरों के सामने आर्थिक परेशानी बढ़ी है। ढुलाई बढ़ाने की जरूरत है।
काम बढ़े तो राहत मिलेगी
बीडीटीएस महासचिव प्रदीप ठाकुर ने कहा कि ढुलाई कम होने से ट्रक ऑपरेटर आर्थिक दबाव में हैं। अनुबंध के अनुसार काम मिलना चाहिए। लंबित मांगों का समाधान करने के साथ ढुलाई बढ़ाना जरूरी है।
वितरण की स्थिति स्पष्ट हो
बीडीटीएस पूर्व अध्यक्ष लेखराम वर्मा ने कहा कि बरमाणा और दाड़लाघाट परियोजनाओं में काम का वितरण किस आधार पर हो रहा है, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। प्रशासन दोनों पक्षों को बैठाकर वास्तविक स्थिति सामने लाए।


अप्रैल से लंबित डीए जारी हो
बीडीटीएस पूर्व महासचिव सुरेश चौधरी ने अप्रैल से लंबित डीए जारी करने, अनुबंध के अनुसार बढ़ोतरी देने और एग्रीमेंट का नवीनीकरण करने की मांग की। उन्होंने कहा कि काम की कमी के कारण ऑपरेटर पहले ही आर्थिक दबाव में हैं।

जीतराम गौतम

जीतराम गौतम

जीतराम गौतम

जीतराम गौतम

जीतराम गौतम

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जीतराम गौतम

जीतराम गौतम

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