{"_id":"665b1ce20df4e5d274005d2b","slug":"shrimad-bhagwat-katha-teaches-the-art-of-living-and-dying-dinesh-bilaspur-news-c-92-1-bls1002-118239-2024-06-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीमद्भागवत कथा सिखाती है जीवन जीने और मरने की कला : दिनेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीमद्भागवत कथा सिखाती है जीवन जीने और मरने की कला : दिनेश
विज्ञापन
-बड़गांव के बाबा नाहर सिंह मंदिर में भागवत कथा आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। विकासखंड झंडूता की ग्राम पंचायत बड़गांव के बाबा नाहर सिंह मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में कथा का वाचन व्यास आचार्य दिनेश शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को जीवन जीने और मरने की कला सिखाती है। मनुष्य को जीवन परमात्मा ने दिया है, लेकिन जीवन जीने की कला हमें सत्संग से प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि सत्संग का मनुष्य के जीवन में बड़ा महत्व है। भगवान भक्तों के वश में हैं। भगवान हमेशा अपने भक्तों का ध्यान रखते हैं। उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर पाप अनाचार बढ़ता है, तब-तब भगवान श्रीहरि धरा पर किसी न किसी रूप में अवतार लेकर भक्तों के संकट को हरते हैं। जब कंस के पापों का घड़ा भर गया तब भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लेकर कंस का अंत किया और लोगों को पापी राजा से मुक्ति दिलाई। कथा के दौरान कथावाचक ने नंद घर जन्मे कन्हैया कान्हा अब तो ले लो अवतार बृज में तो नंद भवन में जाऊंगी, यशोदा जायो ललना, श्याम तेरी वंशी पुकारे राधा श्याम भजन प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि कलयुग में दुख के समय, कर्म और स्वभाव कारण हैं। उन्होंने कहा कि स्वभाव से जो दुखी है वह कभी सुखी नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि आज व्यक्ति मोह माया के चक्कर में फंसकर अनीतिपूर्ण तरीके से पैसा कमाने में जुटा है। जिस घर में अनीतिपूर्ण से धन कमाया जाता है उस परिवार में कभी एकता नहीं रहती। इस अवसर पर कमेटी के प्रधान बहादुर चंदेल, संजीव चंदेल, गुलाब सिंह, जमीत सिंह चंदेल, जगदीप सिंह आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। विकासखंड झंडूता की ग्राम पंचायत बड़गांव के बाबा नाहर सिंह मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में कथा का वाचन व्यास आचार्य दिनेश शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को जीवन जीने और मरने की कला सिखाती है। मनुष्य को जीवन परमात्मा ने दिया है, लेकिन जीवन जीने की कला हमें सत्संग से प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि सत्संग का मनुष्य के जीवन में बड़ा महत्व है। भगवान भक्तों के वश में हैं। भगवान हमेशा अपने भक्तों का ध्यान रखते हैं। उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर पाप अनाचार बढ़ता है, तब-तब भगवान श्रीहरि धरा पर किसी न किसी रूप में अवतार लेकर भक्तों के संकट को हरते हैं। जब कंस के पापों का घड़ा भर गया तब भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लेकर कंस का अंत किया और लोगों को पापी राजा से मुक्ति दिलाई। कथा के दौरान कथावाचक ने नंद घर जन्मे कन्हैया कान्हा अब तो ले लो अवतार बृज में तो नंद भवन में जाऊंगी, यशोदा जायो ललना, श्याम तेरी वंशी पुकारे राधा श्याम भजन प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि कलयुग में दुख के समय, कर्म और स्वभाव कारण हैं। उन्होंने कहा कि स्वभाव से जो दुखी है वह कभी सुखी नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि आज व्यक्ति मोह माया के चक्कर में फंसकर अनीतिपूर्ण तरीके से पैसा कमाने में जुटा है। जिस घर में अनीतिपूर्ण से धन कमाया जाता है उस परिवार में कभी एकता नहीं रहती। इस अवसर पर कमेटी के प्रधान बहादुर चंदेल, संजीव चंदेल, गुलाब सिंह, जमीत सिंह चंदेल, जगदीप सिंह आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन