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Bilaspur News: चंगर सेक्टर में सरकारी आवास के दुरुपयोग को लेकर डीसी को सौंपा ज्ञापन
Wed, 27 Nov 2024 11:55 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 27 Nov 2024 11:55 PM IST
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-पूर्व कांग्रेस विधायक पर सरकारी आवास को वेयर हाउस बनाने का आरोप
-समिति बोली, आसपास पार्किंग स्थल, बच्चों के खेलने लायक जगह कब्जाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नगर सुधार समिति बिलासपुर ने शहर के वीआईपी चंगर सेक्टर में एक सरकारी आवास के दुरुपयोग को लेकर प्रदेश सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कहा कि उक्त सरकारी आवास सदर के पूर्व विधायक बंबर ठाकुर की धर्मपत्नी के नाम पर आवंटित हुआ है, जो स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं।
पूर्व विधायक ने इसे न केवल अपना राजनीतिक कार्यालय बना रखा है, बल्कि वह इसे वेयर हाउस के रूप में अपनी ठेकेदारी का सामान रखने के लिए भी प्रयोग कर रहे हैं। इस आवास के पास ही कई प्रशासनिक अधिकारियों के आवास भी हैं, लेकिन इस अतिक्रमण के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उक्त आवास का आवंटन रद करने की मांग को लेकर बुधवार को सभा के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक को ज्ञापन सौंपा।
नगर सुधार समिति के नुमाइंदों ने कहा कि कई कर्मचारियों को पात्र होने, कई बार आवेदन करने के बावजूद सरकारी आवास नहीं मिल पा रहे हैं। इसके विपरीत प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने की धौंस दिखाकर पूर्व विधायक एक सरकारी आवास पर अवैध कब्जा करने के साथ ही इन आवासों के आवंटन के लिए निर्धारित शर्तों, मापदंडों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। महज 388 रुपये मासिक किराये वाले इस सरकारी आवास, इसके आसपास की भूमि को उन्होंने विधायक रहते हुए लोक निर्माण विभाग के माध्यम से सरकारी पैसा खर्च करके अपना राजनीतिक कार्यालय बनाकर रखा था। अभी भी वह इस आवास को अपने राजनीतिक कार्यालय तथा ठेकेदारी का सामान रखने के लिए इसे वेयर हाउस, स्टोर व वर्कशाप के रूप में प्रयोग कर रहे हैं। वहां पर जेसीबी के टायर, बोरवेल मशीन या इसमें डाली जानी वाली पाइपें, जेसीबी मशीनरी और डंपर आदि पड़े हुए हैं। उन्होंने आवास के आसपास पार्किंग स्थल, बच्चों के खेलने लायक जगह पर नाजायज कब्जा करके रखा है। सरकारी आवासों पर इस तरह के कब्जे के मामले पूर्व में यूपी व बिहार जैसे राज्यों में सामने आते थे। उन राज्यों में अब भले ही इस तरह की प्रवृत्ति पर रोक लग चुकी है, लेकिन अब देवभूमि कहे जाने वाले हिमाचल में ऐसा होने लगा है।
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समिति के नुमाइंदों ने कहा कि अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर सड़कों के किनारे मामूली सी रेहड़ी-फड़ी लगाकर रोजी-रोटी कमाने वालों पर कानून का चाबुक चला दिया जाता है, जबकि सत्तारूढ़ कांग्रेस के एक नेता द्वारा शहर के वीआईपी सेक्टर चंगर में एसडीएम सदर के आवास के बिल्कुल पास किए गए अवैध कब्जे की ओर आंख उठाकर भी नहीं देखा जा रहा है। उन्होंने पूर्व विधायक की पत्नी के नाम से आवंटित सरकारी आवास को तुरंत प्रभाव से रद करने की मांग करते हुए कहा कि ऐसा न होने पर आगामी 11 दिसंबर को बिलासपुर आ रहे मुख्यमंत्री के समक्ष इसे जोर-शोर से उठाया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार के साथ ही रामलाल शर्मा, सुभाष ठाकुर, रामलाल, अतुलपाल दास व अशोक शर्मा आदि शामिल थे।
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-समिति बोली, आसपास पार्किंग स्थल, बच्चों के खेलने लायक जगह कब्जाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नगर सुधार समिति बिलासपुर ने शहर के वीआईपी चंगर सेक्टर में एक सरकारी आवास के दुरुपयोग को लेकर प्रदेश सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कहा कि उक्त सरकारी आवास सदर के पूर्व विधायक बंबर ठाकुर की धर्मपत्नी के नाम पर आवंटित हुआ है, जो स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं।
पूर्व विधायक ने इसे न केवल अपना राजनीतिक कार्यालय बना रखा है, बल्कि वह इसे वेयर हाउस के रूप में अपनी ठेकेदारी का सामान रखने के लिए भी प्रयोग कर रहे हैं। इस आवास के पास ही कई प्रशासनिक अधिकारियों के आवास भी हैं, लेकिन इस अतिक्रमण के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उक्त आवास का आवंटन रद करने की मांग को लेकर बुधवार को सभा के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक को ज्ञापन सौंपा।
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नगर सुधार समिति के नुमाइंदों ने कहा कि कई कर्मचारियों को पात्र होने, कई बार आवेदन करने के बावजूद सरकारी आवास नहीं मिल पा रहे हैं। इसके विपरीत प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने की धौंस दिखाकर पूर्व विधायक एक सरकारी आवास पर अवैध कब्जा करने के साथ ही इन आवासों के आवंटन के लिए निर्धारित शर्तों, मापदंडों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। महज 388 रुपये मासिक किराये वाले इस सरकारी आवास, इसके आसपास की भूमि को उन्होंने विधायक रहते हुए लोक निर्माण विभाग के माध्यम से सरकारी पैसा खर्च करके अपना राजनीतिक कार्यालय बनाकर रखा था। अभी भी वह इस आवास को अपने राजनीतिक कार्यालय तथा ठेकेदारी का सामान रखने के लिए इसे वेयर हाउस, स्टोर व वर्कशाप के रूप में प्रयोग कर रहे हैं। वहां पर जेसीबी के टायर, बोरवेल मशीन या इसमें डाली जानी वाली पाइपें, जेसीबी मशीनरी और डंपर आदि पड़े हुए हैं। उन्होंने आवास के आसपास पार्किंग स्थल, बच्चों के खेलने लायक जगह पर नाजायज कब्जा करके रखा है। सरकारी आवासों पर इस तरह के कब्जे के मामले पूर्व में यूपी व बिहार जैसे राज्यों में सामने आते थे। उन राज्यों में अब भले ही इस तरह की प्रवृत्ति पर रोक लग चुकी है, लेकिन अब देवभूमि कहे जाने वाले हिमाचल में ऐसा होने लगा है।
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समिति के नुमाइंदों ने कहा कि अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर सड़कों के किनारे मामूली सी रेहड़ी-फड़ी लगाकर रोजी-रोटी कमाने वालों पर कानून का चाबुक चला दिया जाता है, जबकि सत्तारूढ़ कांग्रेस के एक नेता द्वारा शहर के वीआईपी सेक्टर चंगर में एसडीएम सदर के आवास के बिल्कुल पास किए गए अवैध कब्जे की ओर आंख उठाकर भी नहीं देखा जा रहा है। उन्होंने पूर्व विधायक की पत्नी के नाम से आवंटित सरकारी आवास को तुरंत प्रभाव से रद करने की मांग करते हुए कहा कि ऐसा न होने पर आगामी 11 दिसंबर को बिलासपुर आ रहे मुख्यमंत्री के समक्ष इसे जोर-शोर से उठाया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार के साथ ही रामलाल शर्मा, सुभाष ठाकुर, रामलाल, अतुलपाल दास व अशोक शर्मा आदि शामिल थे।