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Bilaspur News: झंडूता का मिनी सचिवालय वन विभाग की जमीनी प्रक्रिया में उलझा

Sun, 24 May 2026 11:26 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Sun, 24 May 2026 11:26 PM IST
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Jhanduta's mini secretariat is entangled in the land process of the forest department
आनंदघाट की बरनोट की पहाड़ी यहां बनेगा मिनी सचिवालय का बहुमंजिला भवन।
महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण की घोषणा को हो चुके हैं आठ वर्ष
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एक ही छत के नीचे प्रशासनिक सुविधाओं का सपना अधूरा
लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने की मजबूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
झंडूता( बिलासपुर)। झंडूता विधानसभा क्षेत्र के उपमंडल मुख्यालय आनंदघाट में प्रस्तावित मिनी सचिवालय भवन निर्माण की घोषणा को करीब आठ वर्ष बीतने को हैं, लेकिन अब तक इस बहुमंजिला भवन के निर्माण का रास्ता साफ नहीं हो पाया है। क्षेत्र की यह महत्वाकांक्षी परियोजना वन विभाग की मंजूरी और जमीनी प्रक्रिया में उलझकर रह गई है। निर्माण कार्य शुरू न होने से लोगों में सरकार और प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
झंडूता विधानसभा क्षेत्र चारों ओर से सीर खड्ड और गोबिंद सागर झील से घिरा हुआ है। ऐसे में उपमंडल स्तर के कार्यों के लिए लोगों को आनंद घाट स्थित कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। स्थिति तब और कठिन हो जाती है, जब अलग-अलग सरकारी कार्यालय तीन किलोमीटर के दायरे में फैले होने के कारण एक ही कार्य के लिए बार-बार जाना पड़ता है। लोगों का कहना है कि यदि मिनी सचिवालय बन जाता तो सभी विभाग एक ही परिसर में उपलब्ध होते और आम जनता को राहत मिलती। बता दें कि झंडूता में एसडीएम कार्यालय खोलने की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अप्रैल 2016 में की थी। इसके बाद सात दिसंबर 2016 को एसडीएम कार्यालय का अस्थायी उद्घाटन तहसीलदार कार्यालय में किया गया। उस दौरान लोगों को एक ही छत के नीचे बेहतर प्रशासनिक सुविधाएं देने का वादा किया गया था। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने दिसंबर 2018 में झंडूता में मिनी सचिवालय निर्माण की घोषणा की। पूर्व विधायक जीत राम कटवाल ने प्रशासन, राजस्व विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ कई स्तर पर प्रयास भी किए, लेकिन मामला आज तक सिरे नहीं चढ़ पाया। हैरानी की बात यह है कि प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में घोषित कई मिनी सचिवालय भवन बनकर तैयार हो चुके हैं, जबकि झंडूता की योजना अब तक कागजी प्रक्रिया से बाहर नहीं निकल सकी। राजस्व विभाग ने आनंदघाट से सटी बरनोट की पहाड़ी पर करीब 40 बीघा भूमि भी चिह्नित कर रखी है।
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प्रस्तावित भवन में पार्किंग सहित सभी सरकारी कार्यालयों को एक ही परिसर में स्थापित करने की योजना है। हालांकि वन विभाग की ओर से बार-बार उठाई जा रही आपत्तियों के चलते मामला लंबित पड़ा है। वर्तमान में एसडीएम कार्यालय तहसीलदार कार्यालय परिसर में ही संचालित हो रहा है। तहसीलदार भी पिछले आठ वर्षों से अपने मूल कार्यालय से बाहर नायब तहसीलदार कार्यालय के एक कमरे में अस्थायी रूप से कार्य करने को मजबूर हैं। सीमित जगह के कारण लोगों को बैठने तक की उचित सुविधा नहीं मिल पा रही। कई बुजुर्गों को सीढ़ियों पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। वहीं एसडीएम के लिए अब तक आवासीय सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो पाई है।
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इनसेट
वन परिक्षेत्र अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि बरनोट की पहाड़ी पर प्रस्तावित मिनी सचिवालय के लिए वन विभाग की जमीनी प्रक्रिया पूरी करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

इनसेट
एसडीएम अर्शिया शर्मा ने कहा कि प्रशासन की ओर से विभिन्न आपत्तियों को दूर कर संबंधित विभाग को भेज दिया गया है। जल्द ही बाधाएं दूर होने और भवन निर्माण का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।
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