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सहज नहीं है भक्ति के मार्ग पर चलना : पंडित रसिक
Fri, 09 May 2025 11:16 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 09 May 2025 11:16 PM IST
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बिलासपुर के बैरी में चल रही श्री मद्भागवत कथा में उपस्थित भक्तजन। संवाद
- बैरी में भक्त प्रहलाद की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। झंडूता विस क्षेत्र के गेहड़वीं के गांव बैरी में चल रही श्रीमदभागवत कथा में प्रवचनों की अमृत वर्षा करते हुए कथावाचक पंडित रसिक जी महाराज ने बताया कि ईश्वर की भक्ति सदमार्ग का रास्ता दिखाती है इसलिए सभी को इस मार्ग पर चलना चाहिए। मगर भक्ति के मार्ग पर चलता इतना भी सहज नहीं है जितना कि समझा जाता है। इस दौरान उन्होंने भक्त प्रहलाद का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने कहा कि प्रह्लाद के जीवन की घटनाएं बताती हैं कि भक्ति मार्ग पर कोई सूरमा ही चल सकता है। प्रहलाद को पहाड़ की ऊंची चोटी से गिराया गया, समुद्र में फेंका गया, विष का प्याला दिया गया, कालकोठरी में बंद भी किया गया, लेकिन यह संघर्ष भी उनको विचलित नहीं कर पाया। भक्त की इस दृढ़ता को देखकर भगवान को नरसिंह अवतार लेना पड़ा। प्रह्लाद इस संघर्ष में विजय योद्धा बन पाए। जब देव ऋषि नारद ने उनकी माता को ज्ञान दिया तो प्रह्लाद को भी माता के गर्भ में ही ब्रह्म ज्ञान प्राप्त हुआ। कहते हैं जब स्त्री गर्भवती होती है तो माता के समस्त शारीरिक कर्म का व मानसिक विचारों का उसके भ्रूण पर प्रभाव पड़ता है। बच्चा माता के गर्भ से ही संस्कार लेकर उत्पन्न होता है। जैसे अभिमन्यु ने चक्रव्यूह का भेदन करना माता के गर्भ से ही सीखा। यह बात विज्ञान सम्मत भी है कि माता के विचारों से ही शिशु का पोषण होता है। उन्होंने कहा कि आदर्श समाज की स्थापना हेतु प्रत्येक इंसान का पूर्ण रूप से विकसित होना अति आवश्यक है। व्यक्ति निर्माण ही समाज निर्माण और फिर समाज निर्माण है विश्व निर्माण है। भारतवर्ष युगों से समाज निर्माण विषयक प्रश्नों का समाधान संपूर्ण विश्व को देता रहा है और देता रहेगा। यह अध्यात्म ही भारतीय संस्कृति का आधार है, क्योंकि संपूर्ण विश्व में सर्वप्रथम और सर्वश्रेष्ठ भारतीय संस्कृति है। अध्यात्म में संपूर्ण विकास की प्रक्रिया है, यही समस्त वेदों का सार है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। झंडूता विस क्षेत्र के गेहड़वीं के गांव बैरी में चल रही श्रीमदभागवत कथा में प्रवचनों की अमृत वर्षा करते हुए कथावाचक पंडित रसिक जी महाराज ने बताया कि ईश्वर की भक्ति सदमार्ग का रास्ता दिखाती है इसलिए सभी को इस मार्ग पर चलना चाहिए। मगर भक्ति के मार्ग पर चलता इतना भी सहज नहीं है जितना कि समझा जाता है। इस दौरान उन्होंने भक्त प्रहलाद का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने कहा कि प्रह्लाद के जीवन की घटनाएं बताती हैं कि भक्ति मार्ग पर कोई सूरमा ही चल सकता है। प्रहलाद को पहाड़ की ऊंची चोटी से गिराया गया, समुद्र में फेंका गया, विष का प्याला दिया गया, कालकोठरी में बंद भी किया गया, लेकिन यह संघर्ष भी उनको विचलित नहीं कर पाया। भक्त की इस दृढ़ता को देखकर भगवान को नरसिंह अवतार लेना पड़ा। प्रह्लाद इस संघर्ष में विजय योद्धा बन पाए। जब देव ऋषि नारद ने उनकी माता को ज्ञान दिया तो प्रह्लाद को भी माता के गर्भ में ही ब्रह्म ज्ञान प्राप्त हुआ। कहते हैं जब स्त्री गर्भवती होती है तो माता के समस्त शारीरिक कर्म का व मानसिक विचारों का उसके भ्रूण पर प्रभाव पड़ता है। बच्चा माता के गर्भ से ही संस्कार लेकर उत्पन्न होता है। जैसे अभिमन्यु ने चक्रव्यूह का भेदन करना माता के गर्भ से ही सीखा। यह बात विज्ञान सम्मत भी है कि माता के विचारों से ही शिशु का पोषण होता है। उन्होंने कहा कि आदर्श समाज की स्थापना हेतु प्रत्येक इंसान का पूर्ण रूप से विकसित होना अति आवश्यक है। व्यक्ति निर्माण ही समाज निर्माण और फिर समाज निर्माण है विश्व निर्माण है। भारतवर्ष युगों से समाज निर्माण विषयक प्रश्नों का समाधान संपूर्ण विश्व को देता रहा है और देता रहेगा। यह अध्यात्म ही भारतीय संस्कृति का आधार है, क्योंकि संपूर्ण विश्व में सर्वप्रथम और सर्वश्रेष्ठ भारतीय संस्कृति है। अध्यात्म में संपूर्ण विकास की प्रक्रिया है, यही समस्त वेदों का सार है।
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