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Bilaspur News: ...मैंने सुना है कि राधा की चुनरी कोई सलमा बेगम सीती है
Fri, 20 Dec 2024 11:32 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 20 Dec 2024 11:32 PM IST
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-भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर आयोजित गोष्ठी कवियों ने बांधा समां
-साहित्यकारों ने प्रस्तुत की एक से बढ़कर एक रचनाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भाषा एवं संस्कृति विभाग कार्यालय बिलासपुर की ओर से संस्कृति भवन के बैठक कक्ष में गोष्ठी हुई, जिसमें रविंद्र भट्टा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना से किया गया। उसके बाद रविंद्र भट्टा ने सोशल मीडिया विषय पर पत्रवाचन पढ़ा और साहित्यकारों नेे इस पर चर्चा-परिचर्चा की। जीत राम सुमन- बंदले री धार देखयां कियां सीददी खड्डरी, आउंदे जांदे लोका कने दिन रात सजूरी, एनआर हितेषी- मंदिर में दाना चुग कर चिड़िया मस्जिद में पानी पीती है, मैंने सुना है कि राधा कि चुनरी कोई सलमा बेगम सीती है, अमर नाथ धीमान- खांदा छलियां री रोटी पींदा छाई रा पूरा ग्लास, आखि च अंजु तिसरे गले च लोको खरास, रविंद्र कुमार शर्मा- जिसको भी देखो सब है भटक रहें, सबको है किसी न किसी की तलाश बाहर ढूंढते फिर रहे अंदर कोई नहीं झांकता, अंदर ढूंढोगे तो सब कुछ है तुम्हारे पास, एसआर आजाद- रक्से शरर होने तलक जाने कहां तुम कहां हम होंगे, दुनियां के सुबक सर होने तलक जाने कहां तुम कहां हम होंगे रचना प्रस्तुत की।
बृजलाल लखनपाल- खरा था से पुराणा जमाना, रविंद्र शर्मा ने अन्न दाता किसान महान, चिंता देवी ने लोकगीत गाया। सुमन चड्ढा-सुन ससुराल, तृप्ता देवी ने देह शिवा वर मोहे इहै शुभ करमन ते कबहूं न तरें, सुरेंद्र मिन्हास ने स्याणेया टपाई ते न्याणे दूर पईसे क्माणे, खेत-फाट पइगे उजड़ से हूण किस बाणे, राजपाल- मेरे मालिक के दरबार में सब लोगों का खाता जो कोई जितना कर्म है करता, उतना ही फल पाता, बुद्धि सिंह चंदेल ने दो अजब मुसाफिर अलबेले, दिन-रात घूमते है अकेले, डॉ. अनेक राम संख्यान-तेरी मिट्टी में मिल जावां, गुल बनके में खिल जावां, बस इतनी सी है दिल की आरजू गाना प्रस्तुत किया। केशव शर्मा- असां हिमाचलियां जो बड़ा खरा लगदा, कौशल्या देवी- लुप्त होती मानवता को फिर से जगादें, कर्मवीर कंडेरा ने केड़ी बुरी ठंड, प्रीति शर्मा मधु- तूने साथ जो क्या छोड़ा मेरा, सब हिस्सा-2 हो गया कहीं देवर का तो कहीं, सब जेठ का हो गया, कौशल्या देवी ने हो मइया मैनें दो-दो कुल अपनाए गाना प्रस्तुत किया। इसके अलावा मुनीश कुमार, अखिलेश कुमार, अंकित कुमार, राकेश कुमार ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। अंत में जिला भाषा अधिकारी ने आभार जताया।
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-साहित्यकारों ने प्रस्तुत की एक से बढ़कर एक रचनाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भाषा एवं संस्कृति विभाग कार्यालय बिलासपुर की ओर से संस्कृति भवन के बैठक कक्ष में गोष्ठी हुई, जिसमें रविंद्र भट्टा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना से किया गया। उसके बाद रविंद्र भट्टा ने सोशल मीडिया विषय पर पत्रवाचन पढ़ा और साहित्यकारों नेे इस पर चर्चा-परिचर्चा की। जीत राम सुमन- बंदले री धार देखयां कियां सीददी खड्डरी, आउंदे जांदे लोका कने दिन रात सजूरी, एनआर हितेषी- मंदिर में दाना चुग कर चिड़िया मस्जिद में पानी पीती है, मैंने सुना है कि राधा कि चुनरी कोई सलमा बेगम सीती है, अमर नाथ धीमान- खांदा छलियां री रोटी पींदा छाई रा पूरा ग्लास, आखि च अंजु तिसरे गले च लोको खरास, रविंद्र कुमार शर्मा- जिसको भी देखो सब है भटक रहें, सबको है किसी न किसी की तलाश बाहर ढूंढते फिर रहे अंदर कोई नहीं झांकता, अंदर ढूंढोगे तो सब कुछ है तुम्हारे पास, एसआर आजाद- रक्से शरर होने तलक जाने कहां तुम कहां हम होंगे, दुनियां के सुबक सर होने तलक जाने कहां तुम कहां हम होंगे रचना प्रस्तुत की।
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बृजलाल लखनपाल- खरा था से पुराणा जमाना, रविंद्र शर्मा ने अन्न दाता किसान महान, चिंता देवी ने लोकगीत गाया। सुमन चड्ढा-सुन ससुराल, तृप्ता देवी ने देह शिवा वर मोहे इहै शुभ करमन ते कबहूं न तरें, सुरेंद्र मिन्हास ने स्याणेया टपाई ते न्याणे दूर पईसे क्माणे, खेत-फाट पइगे उजड़ से हूण किस बाणे, राजपाल- मेरे मालिक के दरबार में सब लोगों का खाता जो कोई जितना कर्म है करता, उतना ही फल पाता, बुद्धि सिंह चंदेल ने दो अजब मुसाफिर अलबेले, दिन-रात घूमते है अकेले, डॉ. अनेक राम संख्यान-तेरी मिट्टी में मिल जावां, गुल बनके में खिल जावां, बस इतनी सी है दिल की आरजू गाना प्रस्तुत किया। केशव शर्मा- असां हिमाचलियां जो बड़ा खरा लगदा, कौशल्या देवी- लुप्त होती मानवता को फिर से जगादें, कर्मवीर कंडेरा ने केड़ी बुरी ठंड, प्रीति शर्मा मधु- तूने साथ जो क्या छोड़ा मेरा, सब हिस्सा-2 हो गया कहीं देवर का तो कहीं, सब जेठ का हो गया, कौशल्या देवी ने हो मइया मैनें दो-दो कुल अपनाए गाना प्रस्तुत किया। इसके अलावा मुनीश कुमार, अखिलेश कुमार, अंकित कुमार, राकेश कुमार ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। अंत में जिला भाषा अधिकारी ने आभार जताया।
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