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Bilaspur News: फोरलेन का मलबा झील में डालने पर गावर कंपनी को 6.40 लाख रुपये का जुर्माना
Thu, 04 Sep 2025 11:13 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 04 Sep 2025 11:13 PM IST
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चार जगहों पर फेंका मलबा कंपनी की चूक से गोबिंद सागर झील में मिला
न्याय निर्णायक अधिकारी के रूप में मुख्य सचिव ने सुनाया निर्णय
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने की थी मामले की शिकायत
प्रकाश ठाकुर
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के निर्माण के दौरान डंप किया मलबा गोबिंद सागर झील में मिलने पर गावर कंपनी को 6.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। कंपनी को यह जुर्माना 30 दिन में जमा करना होगा।
यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम के अंतर्गत नियुक्त न्याय निर्णायक अधिकारी के रूप में प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने सुनाया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने न्याय निर्णायक अधिकारी के समक्ष 2 दिसंबर 2024 को फोरलेन का निर्माण करने वाली गावर कंपनी के खिलाफ शिकायत दी थी। शिकायत में बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने निर्माणाधीन फोरलेन जब निरीक्षण किया तो गोबिंद सागर झील और उसकी सहायक नालों में मलबा डंप पाया गया, जिससे जलमार्ग अवरूद्ध और पेयजल स्रोतों के दूषित होने का खतरा पैदा हुआ। बोर्ड ने कंपनी को 14 नवंबर 2022, 17 जून 2023, 27 जून 2023, 3 जुलाई 2023 को कारण बताओ नोटिस जारी किए और सुरक्षा उपाय अपनाने के निर्देश दिए। लेकिन कंपनी कार्रवाई करने में विफल रही। इसके बाद बोर्ड ने 30 मई 2024 को 4 लाख रुपये और 30 अक्तूबर 2024 को 2.50 लाख रुपये का पर्यावरण क्षतिपूर्ति जुर्माना लगाया।
कंपनी ने अपने जवाब में कहा कि उसने पर्यावरण अधिनियम का उल्लंघन नहीं किया। अधिकांश मलबा पहले काम कर रही कंपनी ने ही डंप किया था। गावर कंपनी ने 2021 में फोरलेन का शेष निर्माण कार्य अपने हाथ लिया था। कंपनी ने मलबा पट्टे पर ली गई भूमि पर डंप किया है, इसलिए जुर्माना न लगाया जाए। बोर्ड ने कंपनी के इस जवाब का विरोध किया और बताया कि बिलासपुर प्रशासन ने विभिन्न विभागीय अधिकारियों की एक संयुक्त कमेटी गठित की थी। कमेटी ने भी 5 जून 2024 को निरीक्षण किया। कमेटी ने 10 ऐसी साइटों को चिन्हित किया था, जहां मलबा फेंका गया था और उसे झील में मिलने से रोकने के लिए उपाय करने की आवश्यकता थी। 6 जून को उपायुक्त बिलासपुर ने संयुक्त कमेटी की रिपोर्ट एनएचएआई और गावर कंपनी को भेजी। साथ ही निर्देश दिए कि मलबे को झील में मिलने से बचाने के लिए सुरक्षा उपाय का कार्य एक सप्ताह के भीतर शुरू किया जाए और 90 दिनों में पूरा किया जाए। तीन माह का समय पूरा होने पर 9 सितंबर 2024 को दोबारा निरीक्षण किया गया तो पाया गया कि टनल नंबर-3, टनल नंबर-2, समलेटू पुल और स्वाहण पुल के पास डंप किए मलबे को रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।
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मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद न्याय निर्णायक अधिकारी ने अपने निर्णय में बताया है कि गावर कंपनी ने झील और सहायक नालों में मलबा डंप करके जल अधिनियम का उल्लंघन किया है। हालांकि बाद में मलबे को झील में मिलने से बचाने के लिए सुरक्षा उपाय भी किए, लेकिन अनावश्यक देरी हुई। चार जगहों पर कंपनी की चूक से गोबिंद सागर झील में मलबा मिला। मलबा डंप करने और उपाय करने में देरी करने के लिए कंपनी पर कुल 6.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। यह जुर्माना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पहले लगाए गए पर्यावरण क्षतिपूर्ति जुर्माने से अलग देना होगा। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यदि आदेश की अनुपालना नहीं की जाएगी तो कठोर कार्रवाई होगी। संवाद
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न्याय निर्णायक अधिकारी के रूप में मुख्य सचिव ने सुनाया निर्णय
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने की थी मामले की शिकायत
प्रकाश ठाकुर
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के निर्माण के दौरान डंप किया मलबा गोबिंद सागर झील में मिलने पर गावर कंपनी को 6.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। कंपनी को यह जुर्माना 30 दिन में जमा करना होगा।
यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम के अंतर्गत नियुक्त न्याय निर्णायक अधिकारी के रूप में प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने सुनाया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने न्याय निर्णायक अधिकारी के समक्ष 2 दिसंबर 2024 को फोरलेन का निर्माण करने वाली गावर कंपनी के खिलाफ शिकायत दी थी। शिकायत में बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने निर्माणाधीन फोरलेन जब निरीक्षण किया तो गोबिंद सागर झील और उसकी सहायक नालों में मलबा डंप पाया गया, जिससे जलमार्ग अवरूद्ध और पेयजल स्रोतों के दूषित होने का खतरा पैदा हुआ। बोर्ड ने कंपनी को 14 नवंबर 2022, 17 जून 2023, 27 जून 2023, 3 जुलाई 2023 को कारण बताओ नोटिस जारी किए और सुरक्षा उपाय अपनाने के निर्देश दिए। लेकिन कंपनी कार्रवाई करने में विफल रही। इसके बाद बोर्ड ने 30 मई 2024 को 4 लाख रुपये और 30 अक्तूबर 2024 को 2.50 लाख रुपये का पर्यावरण क्षतिपूर्ति जुर्माना लगाया।
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कंपनी ने अपने जवाब में कहा कि उसने पर्यावरण अधिनियम का उल्लंघन नहीं किया। अधिकांश मलबा पहले काम कर रही कंपनी ने ही डंप किया था। गावर कंपनी ने 2021 में फोरलेन का शेष निर्माण कार्य अपने हाथ लिया था। कंपनी ने मलबा पट्टे पर ली गई भूमि पर डंप किया है, इसलिए जुर्माना न लगाया जाए। बोर्ड ने कंपनी के इस जवाब का विरोध किया और बताया कि बिलासपुर प्रशासन ने विभिन्न विभागीय अधिकारियों की एक संयुक्त कमेटी गठित की थी। कमेटी ने भी 5 जून 2024 को निरीक्षण किया। कमेटी ने 10 ऐसी साइटों को चिन्हित किया था, जहां मलबा फेंका गया था और उसे झील में मिलने से रोकने के लिए उपाय करने की आवश्यकता थी। 6 जून को उपायुक्त बिलासपुर ने संयुक्त कमेटी की रिपोर्ट एनएचएआई और गावर कंपनी को भेजी। साथ ही निर्देश दिए कि मलबे को झील में मिलने से बचाने के लिए सुरक्षा उपाय का कार्य एक सप्ताह के भीतर शुरू किया जाए और 90 दिनों में पूरा किया जाए। तीन माह का समय पूरा होने पर 9 सितंबर 2024 को दोबारा निरीक्षण किया गया तो पाया गया कि टनल नंबर-3, टनल नंबर-2, समलेटू पुल और स्वाहण पुल के पास डंप किए मलबे को रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।
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