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Bilaspur News: उद्घाटन के बाद ताले में बंद दकड़ी वार्ड का 40 लाख से बना पार्क
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घुमारवीं में पार्क पर लटका ताला। संवाद
नहीं खुल रहे पार्क के गेट, बच्चे-बुजुर्ग सुविधाओं से हैं वंचित
ओपन जिम, बैडमिंटन कोर्ट और झूले होने के बावजूद उपयोग नहीं कर पा रहे लोग
संजीव शामा
घुमारवीं(बिलासपुर)। घुमारवीं नगर परिषद के दकड़ी वार्ड नंबर-सात में लगभग 40 लाख रुपये की लागत से तैयार किए गए आधुनिक पार्क का उद्घाटन बड़े उत्साह और जनहित के दावों के साथ किया गया था। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने लोकार्पण करते हुए इसे क्षेत्र की जनता को समर्पित किया और इसे बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण सुविधा बताया था।
लेकिन उद्घाटन के कुछ समय बाद ही यह पार्क ताले में बंद होकर रह गया है और आम लोगों की पहुंच से बाहर है। पार्क के दोनों मुख्य प्रवेश द्वारों पर अधिकांश समय ताले लगे रहते हैं। बच्चे जब झूलों पर खेलने या ओपन जिम का उपयोग करने आते हैं तो उन्हें बंद गेट देखकर वापस लौटना पड़ता है। कई बार अभिभावक भी बच्चों को लेकर पहुंचे, लेकिन अंदर जाने का कोई रास्ता नहीं मिला। लोगों का कहना है कि यदि पार्क जनता के लिए बनाया गया है तो उसे बंद रखने का कोई औचित्य समझ नहीं आता।
पार्क में ओपन जिम के आधुनिक उपकरण, सिंथेटिक बैडमिंटन कोर्ट, छोटे बच्चों के लिए आकर्षक झूले, बैठने के लिए बेंच और सुंदर पाथ वे बनाए गए हैं। उद्देश्य था कि बच्चे सुरक्षित माहौल में खेल सकें और बुजुर्ग सुबह-शाम सैर कर सकें। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि अंदर की सुविधाएं खाली पड़ी हैं और बाहर बच्चे निराश होकर लौट जाते हैं। लोगों के अनुसार कई बार सुबह और शाम पार्क के बाहर बच्चों की भीड़ देखी जा सकती है, जो कुछ देर इंतजार करने के बाद मायूस होकर घर लौट जाते हैं। लोगों का कहना है कि पार्क खोलने और बंद करने का कोई निर्धारित समय सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं किया गया है। न तो गेट पर कोई सूचना बोर्ड लगा है और न ही नगर परिषद की ओर से कोई स्पष्ट व्यवस्था दिखाई दे रही है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई सुविधा का लाभ ही नहीं मिल पा रहा, जिससे सरकारी धन के उपयोग पर भी सवाल उठ रहे हैं। संवाद
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इनसेट
केवल उद्घाटन तक सीमित रह गया पार्क
क्षेत्रवासियों का कहना है कि केवल उद्घाटन कर फोटो खिंचवाना ही उद्देश्य नहीं होना चाहिए था। यदि पार्क वास्तव में जनता को समर्पित किया गया है तो उस पर जनता का अधिकार भी सुनिश्चित होना चाहिए। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पार्क को नियमित रूप से खोला जाए और इसके संचालन व रखरखाव की जिम्मेदारी तय की जाए।
कोट
कमेटी बनाने की बात, ताले क्यों लगे जांच होगी
इस संबंध में नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी खेमचंद वर्मा ने कहा कि मामला उनके ध्यान में नहीं था और उन्हें यह जानकारी भी नहीं थी कि गेट पर ताले लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि पार्क की देखरेख के लिए एक कमेटी बनाने की बात जरूर की गई थी। ताले क्यों लगाए गए हैं, इसकी जांच करवाई जाएगी और जल्द ही लोगों के लिए पार्क की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।
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ओपन जिम, बैडमिंटन कोर्ट और झूले होने के बावजूद उपयोग नहीं कर पा रहे लोग
संजीव शामा
घुमारवीं(बिलासपुर)। घुमारवीं नगर परिषद के दकड़ी वार्ड नंबर-सात में लगभग 40 लाख रुपये की लागत से तैयार किए गए आधुनिक पार्क का उद्घाटन बड़े उत्साह और जनहित के दावों के साथ किया गया था। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने लोकार्पण करते हुए इसे क्षेत्र की जनता को समर्पित किया और इसे बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण सुविधा बताया था।
लेकिन उद्घाटन के कुछ समय बाद ही यह पार्क ताले में बंद होकर रह गया है और आम लोगों की पहुंच से बाहर है। पार्क के दोनों मुख्य प्रवेश द्वारों पर अधिकांश समय ताले लगे रहते हैं। बच्चे जब झूलों पर खेलने या ओपन जिम का उपयोग करने आते हैं तो उन्हें बंद गेट देखकर वापस लौटना पड़ता है। कई बार अभिभावक भी बच्चों को लेकर पहुंचे, लेकिन अंदर जाने का कोई रास्ता नहीं मिला। लोगों का कहना है कि यदि पार्क जनता के लिए बनाया गया है तो उसे बंद रखने का कोई औचित्य समझ नहीं आता।
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पार्क में ओपन जिम के आधुनिक उपकरण, सिंथेटिक बैडमिंटन कोर्ट, छोटे बच्चों के लिए आकर्षक झूले, बैठने के लिए बेंच और सुंदर पाथ वे बनाए गए हैं। उद्देश्य था कि बच्चे सुरक्षित माहौल में खेल सकें और बुजुर्ग सुबह-शाम सैर कर सकें। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि अंदर की सुविधाएं खाली पड़ी हैं और बाहर बच्चे निराश होकर लौट जाते हैं। लोगों के अनुसार कई बार सुबह और शाम पार्क के बाहर बच्चों की भीड़ देखी जा सकती है, जो कुछ देर इंतजार करने के बाद मायूस होकर घर लौट जाते हैं। लोगों का कहना है कि पार्क खोलने और बंद करने का कोई निर्धारित समय सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं किया गया है। न तो गेट पर कोई सूचना बोर्ड लगा है और न ही नगर परिषद की ओर से कोई स्पष्ट व्यवस्था दिखाई दे रही है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई सुविधा का लाभ ही नहीं मिल पा रहा, जिससे सरकारी धन के उपयोग पर भी सवाल उठ रहे हैं। संवाद
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केवल उद्घाटन तक सीमित रह गया पार्क
क्षेत्रवासियों का कहना है कि केवल उद्घाटन कर फोटो खिंचवाना ही उद्देश्य नहीं होना चाहिए था। यदि पार्क वास्तव में जनता को समर्पित किया गया है तो उस पर जनता का अधिकार भी सुनिश्चित होना चाहिए। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पार्क को नियमित रूप से खोला जाए और इसके संचालन व रखरखाव की जिम्मेदारी तय की जाए।
कोट
कमेटी बनाने की बात, ताले क्यों लगे जांच होगी
इस संबंध में नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी खेमचंद वर्मा ने कहा कि मामला उनके ध्यान में नहीं था और उन्हें यह जानकारी भी नहीं थी कि गेट पर ताले लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि पार्क की देखरेख के लिए एक कमेटी बनाने की बात जरूर की गई थी। ताले क्यों लगाए गए हैं, इसकी जांच करवाई जाएगी और जल्द ही लोगों के लिए पार्क की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।