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दर्द से कहराते रहे स्कूली बच्चे, नहीं मिली एंबुलेंस
Updated Tue, 13 Nov 2018 11:23 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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सुभाष कपिल
झंडूता (बिलासपुर)। इसे स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली ही कहेंगे कि सड़क हादसे के शिकार 22 सवारियों को स्थानीय लोग अपने निजी वाहनों में जिला अस्पताल पहुंचाते हैं। घटना स्थल पर स्कूली बच्चे दर्द से कहराते रहे। झंडूता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी दो घंटे तक गंभीर रूप से घायल बच्चे और बड़े लोग दर्द से तड़पते रहे, लेकिन एंबुलेंस सुविधा नहीं मिल पाई। बाद में बरठीं व घुमारवीं से एंबुलेंस मंगवा कर गंभीर रूप से घायलों को जिला अस्पताल भेजा गया। इससे एक बात तो उजागर हो गई है कि लोगों के लिए सरकार के पास एंबुलेंस नहीं हैं, लेकिन अपने मंत्रियों के लिए नए वाहन खरीदने के लिए पैसे जरूर हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र झंडूता में एंबुलेंस न होने का खामियाजा निजी बस दुर्घटना में घायल लोगों को उठाना पड़ा। घायलों को स्थानीय लोगों ने अपने-अपने वाहनों में अस्पताल पहुंचाया। जबकि यहां पर पांच डॉक्टरों में से केवल दो ही डॉक्टर तैनात हैं जिसमें एक रात्रि और दूसरा दिन में सेवाएं देता है। ऐसे में बाहर की पीएचसी से डॉक्टरों को बुलाना पड़ा। वहीं झंडूता अस्पताल में सिटी स्कैन की सुविधा न होने के कारण कुछ गंभीर रुप से घायल लोगों को जिला अस्पताल रेफर किया गया लेकिन झंडूता अस्पताल में एंबुलेंस की सुविधा न होने के कारण घायल लोग एंबुलेंस के इंतजार में करीब दो घंटे तक यहीं पर तड़पते रहे।
इसके बाद बरठीं और घुमारवीं से एंबुलेंस आई जिसमें एक साथ चार-चार घायलों को जिला अस्पताल भेजा गया। हालांकि एक 108 एंबुलेंस अस्पताल से कुछ ही दूरी पर सड़क पर खड़ी थी, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला कि यह एंबुलेंस कहां की थी।
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उधर कार्यकारी खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय राय के अनुसार झंडूता अस्पताल में 108 एंबुलेंस की सुविधा नहीं है। उन्होंने बताया कि जैसे ही बस दुर्घटना का पता चला अन्य अस्पतालों से चिकित्सकों को समय पर बुला लिया गया था।
इनसेट....
काफी देर तक एक ही डॉक्टर देखता रहा घायलों को
झंडूता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पांच डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन दो ही डॉक्टरों के सहारे स्वास्थ्य केंद्र चला हुआ है। एक डॉक्टर दिन तो एक डॉक्टर रात्रि को अपनी सेवाएं देता है। हादसे के बाद भेड़ी, गाहघोड़ी व कलोल पीएचसी से डॉक्टर से बुलाए गए जिसके बाद घायलों का उपचार किया गया।
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झंडूता (बिलासपुर)। इसे स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली ही कहेंगे कि सड़क हादसे के शिकार 22 सवारियों को स्थानीय लोग अपने निजी वाहनों में जिला अस्पताल पहुंचाते हैं। घटना स्थल पर स्कूली बच्चे दर्द से कहराते रहे। झंडूता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी दो घंटे तक गंभीर रूप से घायल बच्चे और बड़े लोग दर्द से तड़पते रहे, लेकिन एंबुलेंस सुविधा नहीं मिल पाई। बाद में बरठीं व घुमारवीं से एंबुलेंस मंगवा कर गंभीर रूप से घायलों को जिला अस्पताल भेजा गया। इससे एक बात तो उजागर हो गई है कि लोगों के लिए सरकार के पास एंबुलेंस नहीं हैं, लेकिन अपने मंत्रियों के लिए नए वाहन खरीदने के लिए पैसे जरूर हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र झंडूता में एंबुलेंस न होने का खामियाजा निजी बस दुर्घटना में घायल लोगों को उठाना पड़ा। घायलों को स्थानीय लोगों ने अपने-अपने वाहनों में अस्पताल पहुंचाया। जबकि यहां पर पांच डॉक्टरों में से केवल दो ही डॉक्टर तैनात हैं जिसमें एक रात्रि और दूसरा दिन में सेवाएं देता है। ऐसे में बाहर की पीएचसी से डॉक्टरों को बुलाना पड़ा। वहीं झंडूता अस्पताल में सिटी स्कैन की सुविधा न होने के कारण कुछ गंभीर रुप से घायल लोगों को जिला अस्पताल रेफर किया गया लेकिन झंडूता अस्पताल में एंबुलेंस की सुविधा न होने के कारण घायल लोग एंबुलेंस के इंतजार में करीब दो घंटे तक यहीं पर तड़पते रहे।
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इसके बाद बरठीं और घुमारवीं से एंबुलेंस आई जिसमें एक साथ चार-चार घायलों को जिला अस्पताल भेजा गया। हालांकि एक 108 एंबुलेंस अस्पताल से कुछ ही दूरी पर सड़क पर खड़ी थी, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला कि यह एंबुलेंस कहां की थी।
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उधर कार्यकारी खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय राय के अनुसार झंडूता अस्पताल में 108 एंबुलेंस की सुविधा नहीं है। उन्होंने बताया कि जैसे ही बस दुर्घटना का पता चला अन्य अस्पतालों से चिकित्सकों को समय पर बुला लिया गया था।
इनसेट....
काफी देर तक एक ही डॉक्टर देखता रहा घायलों को
झंडूता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पांच डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन दो ही डॉक्टरों के सहारे स्वास्थ्य केंद्र चला हुआ है। एक डॉक्टर दिन तो एक डॉक्टर रात्रि को अपनी सेवाएं देता है। हादसे के बाद भेड़ी, गाहघोड़ी व कलोल पीएचसी से डॉक्टर से बुलाए गए जिसके बाद घायलों का उपचार किया गया।