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बिना रूट परमिट के शिमला, बद्दी, नालागढ़ के लिए दौड़ी निजी बसें
Updated Sun, 11 Nov 2018 10:41 PM IST
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रोडवेज के रंग में डग्गामार बस
- फोटो : अमर उजाला
सुरेंद्र जम्वाल
घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं में निजी बस ऑपरेटरों ने बिना रूट परमिट के ही शिमला, बद्दी, नालागढ़ के लिए निजी बसें दौड़ा दीं। वहीं निजी बस ऑपरेटरों की सबसे बड़ी लापरवाही यह थी कि उन्होंने बसों में ठूंस-ठूंस कर लोगों को भरा हुआ था जिनसे मनमाने किराये भी वसूल किए गए। मजबूरी में लोगों को भी निजी बस ऑपरेटरों की मनमानी का शिकार होना पड़ा। स्थानीय प्रशासन व परिवहन विभाग कुछ नहीं कर सका। सब रविवार को छुट्टी होने के चलते घर में आराम से बैठे रहे।
निजी बसें घुमारवीं से शिमला, नालागढ़ व बद्दी के लिए बस मालिकों द्वारा बिना रूट परमिट के भेजी गईं। हालांकि इनमें कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने स्पेशल परमिट लिए थे, लेकिन कुछ बसेें ऐसी थीं जो बिना रूट परमिट के ही उनके मालिकों ने दौड़ा दीं। ऐसे में सवाल है कि अगर बसों का हादसा हो जाए तो इसका जिम्मेवार कौन है। जबकि बस परिचालकों ने सवारियों से मनमाने दाम भी वसूले। जहां शिमला का किराया 180 रुपये बनता है वहां पर लोगों से 300 रुपये लिए गए, सही समय पर पहुंचने के चलते लोगों को मजबूरी में यह किराया देना पड़ा। जबकि इनमें सवारियां भी ठूंस-ठूंस कर भरी हुईं थीं।
ऐसा ही हाल नालागढ़ व बद्दी का रहा है जहां इनका किराया 250 रुपये लगते हैं वहां मजबूरन में सवारियों से 400 रुपये लिए गए। यह सब गोरख धंधा प्रशासन के नाक तले होता रहा और प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। बसों में 40 सीट की जगह सवारियों की जगह 60 से 80 लोगों को ठूंस-ठूंस कर भरा गया था। विभिन्न स्थानों के लिए घुमारवीं से निजी बसें लगभग 25 से ज्यादा चलीं। जिनके पास रूट परमिट नहीं थे और सवारियों से मनमाना किराया वसूला गया।
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वहीं इस बारे में जिला बस ऑपरेटर के प्रधान राजेश पटियाल का कहना है कि जो अतिरिक्त बसें शिमला, नालागढ़ व बद्दी के लिए चली हैं उन्होंने स्पेशल परमिट लिया था। हो सकता है कि किसी बस मालिक ने देखा-देखी में अपनी बसों को ऐसे ही भेज दिया हो, जो गलत है। प्रशासन को इन पर कार्रवाई करनी चाहिए।
वहीं एसडीएम घुमारवीं शशिपाल शर्मा का कहना है कि जो बिना परमिट के बसों को अन्य रूटों पर चला रहे हैं, उन बस ऑपरेटरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जबकि बसों में ओवरलोडिंग सहन नहीं की जाएगी।
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घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं में निजी बस ऑपरेटरों ने बिना रूट परमिट के ही शिमला, बद्दी, नालागढ़ के लिए निजी बसें दौड़ा दीं। वहीं निजी बस ऑपरेटरों की सबसे बड़ी लापरवाही यह थी कि उन्होंने बसों में ठूंस-ठूंस कर लोगों को भरा हुआ था जिनसे मनमाने किराये भी वसूल किए गए। मजबूरी में लोगों को भी निजी बस ऑपरेटरों की मनमानी का शिकार होना पड़ा। स्थानीय प्रशासन व परिवहन विभाग कुछ नहीं कर सका। सब रविवार को छुट्टी होने के चलते घर में आराम से बैठे रहे।
निजी बसें घुमारवीं से शिमला, नालागढ़ व बद्दी के लिए बस मालिकों द्वारा बिना रूट परमिट के भेजी गईं। हालांकि इनमें कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने स्पेशल परमिट लिए थे, लेकिन कुछ बसेें ऐसी थीं जो बिना रूट परमिट के ही उनके मालिकों ने दौड़ा दीं। ऐसे में सवाल है कि अगर बसों का हादसा हो जाए तो इसका जिम्मेवार कौन है। जबकि बस परिचालकों ने सवारियों से मनमाने दाम भी वसूले। जहां शिमला का किराया 180 रुपये बनता है वहां पर लोगों से 300 रुपये लिए गए, सही समय पर पहुंचने के चलते लोगों को मजबूरी में यह किराया देना पड़ा। जबकि इनमें सवारियां भी ठूंस-ठूंस कर भरी हुईं थीं।
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ऐसा ही हाल नालागढ़ व बद्दी का रहा है जहां इनका किराया 250 रुपये लगते हैं वहां मजबूरन में सवारियों से 400 रुपये लिए गए। यह सब गोरख धंधा प्रशासन के नाक तले होता रहा और प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। बसों में 40 सीट की जगह सवारियों की जगह 60 से 80 लोगों को ठूंस-ठूंस कर भरा गया था। विभिन्न स्थानों के लिए घुमारवीं से निजी बसें लगभग 25 से ज्यादा चलीं। जिनके पास रूट परमिट नहीं थे और सवारियों से मनमाना किराया वसूला गया।
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वहीं इस बारे में जिला बस ऑपरेटर के प्रधान राजेश पटियाल का कहना है कि जो अतिरिक्त बसें शिमला, नालागढ़ व बद्दी के लिए चली हैं उन्होंने स्पेशल परमिट लिया था। हो सकता है कि किसी बस मालिक ने देखा-देखी में अपनी बसों को ऐसे ही भेज दिया हो, जो गलत है। प्रशासन को इन पर कार्रवाई करनी चाहिए।
वहीं एसडीएम घुमारवीं शशिपाल शर्मा का कहना है कि जो बिना परमिट के बसों को अन्य रूटों पर चला रहे हैं, उन बस ऑपरेटरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जबकि बसों में ओवरलोडिंग सहन नहीं की जाएगी।