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चेक बाउंस मामले में आरोपी को तीन माह का कारावास
Updated Thu, 01 Nov 2018 11:14 PM IST
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चेक बाउंस मामले में आरोपी
को तीन माह का कारावास
एक लाख 60 हजार रुपये बतौर हर्जाना देने के भी दिए आदेश
न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट-दो उपासना शर्मा की अदालत ने सुनाया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं की न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट-दो उपासना शर्मा की अदालत ने चेक बाउंस मामले ने सुखराम पुत्र चिंताराम निवासी बबेली को दोषी करार देते हुए 3 माह के कारावास की सजा सुनाई है और 1 लाख 60 हजार रुपये बतौर हर्जाना शिकायतकर्ता को देने के आदेश दिए हैं।
शिकायतकर्ता चंद्रशेखर के वकील रविंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि दोषी ने दिसंबर 2012 में चंद्रशेखर के पिता धनी राम से 85 हजार रुपये उधार लिए थे। दोनों की अच्छी जान पहचान होने पर धनीराम ने पैसा दे दिया था। उसके बाद दोषी पैसा वापस नहीं कर पाया और बार-बार पैसा मांगने पर दोषी ने 5 मार्च 2013 को 85 हजार रुपये का चेक दिया। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता ने वह चेक अपने खाता में भुगतान में लगाया तो दोषी के खाता में पैसे न होने की वजह से बाउंस हो गया।
शिकायतकर्ता की ओर से कानूनी नोटिस देने के बावजूद भी दोषी ने पैसा नहीं दिया। शिकायतकर्ता ने नेगोसिएबल इंस्ट्रूमेंट की धारा 138 के तहत 14 मई 2013 को अदालत में शिकायत दायर कर दी। अदालत में आरोप साबित होने पर आरोपी सुखराम को अदालत ने नेगोसिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी करार दिया और तीन माह के कारावास की सजा सुनाई है और एक लाख साठ हजार रुपये बतौर हर्जाना शिकायतकर्ता को देने के आदेश दिए हैं।
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को तीन माह का कारावास
एक लाख 60 हजार रुपये बतौर हर्जाना देने के भी दिए आदेश
न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट-दो उपासना शर्मा की अदालत ने सुनाया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं की न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट-दो उपासना शर्मा की अदालत ने चेक बाउंस मामले ने सुखराम पुत्र चिंताराम निवासी बबेली को दोषी करार देते हुए 3 माह के कारावास की सजा सुनाई है और 1 लाख 60 हजार रुपये बतौर हर्जाना शिकायतकर्ता को देने के आदेश दिए हैं।
शिकायतकर्ता चंद्रशेखर के वकील रविंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि दोषी ने दिसंबर 2012 में चंद्रशेखर के पिता धनी राम से 85 हजार रुपये उधार लिए थे। दोनों की अच्छी जान पहचान होने पर धनीराम ने पैसा दे दिया था। उसके बाद दोषी पैसा वापस नहीं कर पाया और बार-बार पैसा मांगने पर दोषी ने 5 मार्च 2013 को 85 हजार रुपये का चेक दिया। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता ने वह चेक अपने खाता में भुगतान में लगाया तो दोषी के खाता में पैसे न होने की वजह से बाउंस हो गया।
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शिकायतकर्ता की ओर से कानूनी नोटिस देने के बावजूद भी दोषी ने पैसा नहीं दिया। शिकायतकर्ता ने नेगोसिएबल इंस्ट्रूमेंट की धारा 138 के तहत 14 मई 2013 को अदालत में शिकायत दायर कर दी। अदालत में आरोप साबित होने पर आरोपी सुखराम को अदालत ने नेगोसिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी करार दिया और तीन माह के कारावास की सजा सुनाई है और एक लाख साठ हजार रुपये बतौर हर्जाना शिकायतकर्ता को देने के आदेश दिए हैं।
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