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बिलासपुर में 3623 हेक्टेयर भूमि पर जंगल राख
Updated Tue, 29 May 2018 11:59 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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बिलासपुर। जिले में अभी तक 3623 हेक्टेयर भूमि पर जंगल राख हो चुके हैं। इससे वन विभाग को अभी तक लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है। कई वन्य जीव जंतु आग की भेंट चढ़ चुके हैं। पेड़ पौधे और जड़ी बूटियां भी जलकर नष्ट हो चुकी हैं। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जंगलों में ज्यादातर आग लगने के पीछे लोगों का हाथ है। अभी तक वन विभाग की ओर से दो लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई जा चुकी है।
बिलासपुर में 34 हजार हेक्टेयर भूमि पर वन हैं। पूरे वन परिक्षेत्र को सात रैंजों में बांटा गया है। सभी रैंजों में इस बार जंगल आग की चपेट में आए हैं। सबसे ज्यादा आग लगने की घटनाएं नयनादेवी व सदर बीट में हुई हैं। यहां पर रोजाना एक से दो मामले आग लगने के सामने आ रहे हैं। 84 बीटें वन विभाग बिलासपुर के पास हैं। सभी में वन रक्षक तैनात हैं। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो जिस जंगल को आग से बचाकर आ रहे हैं, वहीं पर दोबारा से लोगों द्वारा आग लगा दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि लोगों का मानना है कि आग लगाने के बाद घासनियों में बेहतर घास उगेगी, लेकिन यह गलत धारणा हैै। घासनियों में आग लगाने से घास की जड़ें व बीज जलकर नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में घासनियों का आग के हवाले करना कोई अच्छी सोच नहीं है। लोगों से आग्रह किया है कि जंगलों को आग से बचाने के लिए वन विभाग की मदद करें। आग न लगाएं व आग लगाने वाले की सूचना विभाग को दें।
बिलासपुर के जंगलों में सांभर, घोरल, बारकिंग हिरण, जंगली मुर्गा, मौर सहित अन्य पक्षी पाए जाते हैं। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो बिलासपुर के जंगलों में लगी आग से कई जानवर आग की भेंट चढ़ चुके हैं। सबसे ज्यादा मरने वाले जीवों में पक्षी हैं जो रात के समय उड़ न पाने से आग की भेंट चढ़ जाते हैं।
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वन विभाग बिलासपुर के डीएफओ सरोज भाई पटेल का कहना है कि अभी तक 3623 हेक्टेयर वन भूमि पर आग से जंगल जलकर राख हो चुके हैं। कई जंगली जानवरों के जिंदा जलने का भी अनुमान है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर घटनाओं में लोगों द्वारा आग लगाना सामने आ रहा है। लोगों से आह्वान किया है कि वे अपनी घासनियों में आग न लगाएं।
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बिलासपुर में 34 हजार हेक्टेयर भूमि पर वन हैं। पूरे वन परिक्षेत्र को सात रैंजों में बांटा गया है। सभी रैंजों में इस बार जंगल आग की चपेट में आए हैं। सबसे ज्यादा आग लगने की घटनाएं नयनादेवी व सदर बीट में हुई हैं। यहां पर रोजाना एक से दो मामले आग लगने के सामने आ रहे हैं। 84 बीटें वन विभाग बिलासपुर के पास हैं। सभी में वन रक्षक तैनात हैं। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो जिस जंगल को आग से बचाकर आ रहे हैं, वहीं पर दोबारा से लोगों द्वारा आग लगा दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि लोगों का मानना है कि आग लगाने के बाद घासनियों में बेहतर घास उगेगी, लेकिन यह गलत धारणा हैै। घासनियों में आग लगाने से घास की जड़ें व बीज जलकर नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में घासनियों का आग के हवाले करना कोई अच्छी सोच नहीं है। लोगों से आग्रह किया है कि जंगलों को आग से बचाने के लिए वन विभाग की मदद करें। आग न लगाएं व आग लगाने वाले की सूचना विभाग को दें।
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बिलासपुर के जंगलों में सांभर, घोरल, बारकिंग हिरण, जंगली मुर्गा, मौर सहित अन्य पक्षी पाए जाते हैं। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो बिलासपुर के जंगलों में लगी आग से कई जानवर आग की भेंट चढ़ चुके हैं। सबसे ज्यादा मरने वाले जीवों में पक्षी हैं जो रात के समय उड़ न पाने से आग की भेंट चढ़ जाते हैं।
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वन विभाग बिलासपुर के डीएफओ सरोज भाई पटेल का कहना है कि अभी तक 3623 हेक्टेयर वन भूमि पर आग से जंगल जलकर राख हो चुके हैं। कई जंगली जानवरों के जिंदा जलने का भी अनुमान है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर घटनाओं में लोगों द्वारा आग लगाना सामने आ रहा है। लोगों से आह्वान किया है कि वे अपनी घासनियों में आग न लगाएं।