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Bilaspur News: कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन में वन भूमि सीमांकन जांच के लिए कमेटी गठित

Sat, 05 Jul 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 05 Jul 2025 11:59 PM IST
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Committee formed to investigate forest land demarcation in Kiratpur-Nerchowk four lane
एक्सक्लूसिव
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फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति की शिकायत पर मंत्रालय ने लिया संज्ञान
15 दिन में देनी होगी राइट ऑफ वे पर स्थापित पिलरों की ग्राउंड रिपोर्ट
वन भूमि के 69.87 हेक्टेयर में परियोजना निर्माण के लिए हुआ अलाइनमेंट में बदलाव
फोरलेन किनारे लगाए आरसीसी और प्लास्टिक पिलरों पर उठे हैं सवाल

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर से नेरचौक फोरलेन परियोजना में वन भूमि सीमांकन की जांच के लिए वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) बिलासपुर ने समिति का गठन किया है। यह समिति 15 दिन के भीतर मामले की जांच कर रिपोर्ट अधिकारी को सौंपेगी, जिसे डीएफओ उच्च अधिकारियों को भेजेंगे।
इस परियोजना के तहत 69.8761 हेक्टेयर वन भूमि को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को स्थानांतरित किया गया था। इसमें 28.36 हेक्टेयर रोड अलाइनमेंट में बदलाव किया गया। समिति का गठन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के देहरादून, चंडीगढ़ और शिमला स्थित एकीकृत क्षेत्रीय कार्यालयों के निर्देशों के अनुसार किया गया है।
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राइट ऑफ वे की स्थिति की जांच
वन मंडलाधिकारी बिलासपुर ने समिति को निर्देश दिए हैं कि वह राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) पर स्थापित पिलरों की जमीनी स्थिति की जांच करे और 15 दिन में रिपोर्ट दे। इस समिति में एनएचएआई के प्रतिनिधियों के साथ-साथ वन विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं।
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वर्ष 2022 में घुमारवीं और सदर रेंज के वन परिक्षेत्र अधिकारियों ने एनएचएआई और निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त निरीक्षण किया था। उस समय की रिपोर्ट में यह सामने आया था कि फोरलेन के दोनों ओर कंक्रीट और प्लास्टिक के पिलर लगाए गए थे। इनमें से कई अधूरे थे। कुछ प्लास्टिक पाइपें मलबे से आधी भरी थीं, कुछ पूरी तरह खाली थीं और कुछ स्थान खाली भी पाए गए थे।
सबसे गंभीर बात यह थी कि किसी भी पिलर पर राइट ऑफ वे अंकित नहीं था, जिससे रोड की सटीक अलाइनमेंट का पता नहीं लग पा रहा था। इस विषय को लेकर वन मंडलाधिकारी और अरण्यपाल बिलासपुर ने परियोजना निदेशक, एनएचएआई मंडी को कई बार पत्र लिखे, ताकि सीमांकन से जुड़े दस्तावेज मौके पर उपलब्ध कराए जा सकें, लेकिन एनएचएआई की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
पर्यावरण मंत्रालय में की गई शिकायत
इसी लापरवाही से परेशान होकर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने पर्यावरण मंत्रालय में औपचारिक शिकायत की थी। मंत्रालय द्वारा संज्ञान लेने के बाद ही यह समिति गठित की गई है, ताकि मौके पर सीमांकन व राइट ऑफ वे की स्थिति स्पष्ट हो सके।

सीमांकन से होंगे कई लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार भूमि का सही सीमांकन हो जाने से सड़क की अधिग्रहित चौड़ाई, नियंत्रण चौड़ाई और अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट होगी। इससे बिना कारण के उत्पन्न विवादों और अवैध निर्माणों से भी बचा जा सकेगा।
रिपोर्ट का इंतजार
अभी समिति की रिपोर्ट नहीं आई है। जैसे ही रिपोर्ट प्राप्त होगी, उसे उच्च अधिकारियों को भेज दिया जाएगा।
-राजीव कुमार, डीएफओ बिलासपुर
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