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Bilaspur News: सुंदर मुंदरिये हो गाकर बच्चे मांग रहे लोहड़ी
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लोग मूंगफली, रेवड़ी, गुड़ और पैसे देकर दे रहे आशीर्वाद
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। क्षेत्र में लोहड़ी पर्व पूरे उत्साह और उमंग के साथ शुरू हो गया है। पर्व की शुरुआत होते ही गांवों और कस्बों में रौनक लौट आई है। खासकर बच्चों में लोहड़ी को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।
बच्चे समूह बनाकर घर-घर पारंपरिक लोहड़ी गीत गाते हुए लोगों से लोहड़ी एकत्र कर रहे हैं। शाम ढलते ही रंग-बिरंगे कपड़ों में ढोलक, थाली और छोटी-छोटी झंकारों के साथ उनकी टोलियां गांव-गांव घूमती नजर आ रही हैं। गीतों जैसे सुंदर मुंदरिये हो और तेरा कौन विचारा हो से माहौल भक्तिमय और उल्लासपूर्ण बन गया है।
बच्चों के गीत सुनकर घरों से बुजुर्ग, महिलाएं और युवा बाहर निकलकर उनका स्वागत कर रहे हैं और मूंगफली, रेवड़ी, गुड़, मक्का के दाने और नकद राशि देकर आशीर्वाद दे रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि लोहड़ी पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक है और रबी की फसल की खुशी के रूप में इसे खास महत्व प्राप्त है।
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लोग कहते हैं कि बच्चों द्वारा घर-घर जाकर लोहड़ी गाने की परंपरा आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता को मजबूत करती है। पर्व की पूर्व संध्या पर कई घरों में लोहड़ी जलाने की तैयारियां जोरों पर हैं। लकड़ियां एकत्र की जा रही हैं और तिल, गुड़, मूंगफली तथा मक्का जैसे पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जा रहे हैं। शाम होते ही लोग सामूहिक रूप से लोहड़ी जलाकर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। क्षेत्र में लोहड़ी पर्व पूरे उत्साह और उमंग के साथ शुरू हो गया है। पर्व की शुरुआत होते ही गांवों और कस्बों में रौनक लौट आई है। खासकर बच्चों में लोहड़ी को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।
बच्चे समूह बनाकर घर-घर पारंपरिक लोहड़ी गीत गाते हुए लोगों से लोहड़ी एकत्र कर रहे हैं। शाम ढलते ही रंग-बिरंगे कपड़ों में ढोलक, थाली और छोटी-छोटी झंकारों के साथ उनकी टोलियां गांव-गांव घूमती नजर आ रही हैं। गीतों जैसे सुंदर मुंदरिये हो और तेरा कौन विचारा हो से माहौल भक्तिमय और उल्लासपूर्ण बन गया है।
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बच्चों के गीत सुनकर घरों से बुजुर्ग, महिलाएं और युवा बाहर निकलकर उनका स्वागत कर रहे हैं और मूंगफली, रेवड़ी, गुड़, मक्का के दाने और नकद राशि देकर आशीर्वाद दे रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि लोहड़ी पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक है और रबी की फसल की खुशी के रूप में इसे खास महत्व प्राप्त है।
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लोग कहते हैं कि बच्चों द्वारा घर-घर जाकर लोहड़ी गाने की परंपरा आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता को मजबूत करती है। पर्व की पूर्व संध्या पर कई घरों में लोहड़ी जलाने की तैयारियां जोरों पर हैं। लकड़ियां एकत्र की जा रही हैं और तिल, गुड़, मूंगफली तथा मक्का जैसे पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जा रहे हैं। शाम होते ही लोग सामूहिक रूप से लोहड़ी जलाकर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।