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चिकित्सा पद्धति में मील का पत्थर साबित होगी एआई : डॉ. दलजीत
Thu, 30 Apr 2026 11:30 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 30 Apr 2026 11:30 PM IST
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डिजिटल न चलाएं
एम्स के फिजियोलॉजी विभाग ने एआई, एमएल इन हेल्थकेयर पर हुई कार्यशाला
संस्थान के 30 से अधिक फैकल्टी और रेजिडेंट डॉक्टरों ने सीखे कोडिंग के गुर
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक के मोर्चे पर खुद को तैयार कर रहा है। इसी कड़ी में संस्थान के फिजियोलॉजी विभाग की ओर से स्वास्थ्य सेवा में एआई/एमएल : लॉजिस्टिक रिग्रेशन से डीप लर्निंग तक विषय पर एक विशेष व्यावहारिक कार्यशाला हुई। कार्यशाला में संस्थान के विशेषज्ञों ने यह सीखा कि कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग की मदद से मरीजों के सटीक इलाज और शोध कार्यों को नई दिशा दी जा सकती है।
कार्यशाला का शुभारंभ मुख्यातिथि एवं एम्स के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह (एवीएसएम, वीएसएम सेवानिवृत्त) ने किया। उन्होंने कहा कि एआई वर्तमान चिकित्सा पद्धति में एक क्रांतिकारी बदलाव की तरह उभरा है। उन्होंने चिकित्सकों को प्रेरित करते हुए कहा कि एआई न केवल समय बचाएगी बल्कि जटिल बीमारियों के निदान में भी सहायक सिद्ध होगी। इस दौरान डीन रिसर्च डॉ. अनुपम पराशर, डीन परीक्षा डॉ. निधि पुरी और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दिनेश वर्मा ने भी प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। फिजियोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष एवं डीन अकादमिक डॉ. रूपाली पार्लेवार के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण सत्र लिए। फिजियोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. पूनम वर्मा ने कार्यशाला की रूपरेखा साझा की। इसके उपरांत मुख्य वक्ता सहायक प्रोफेसर डॉ. नवदीप आहूजा और सीनियर रेजिडेंट डॉ. प्रशांत सैनी ने प्रतिभागियों को कई बिंदुओं पर प्रशिक्षित किया। चिकित्सा डेटा के विश्लेषण के लिए इन तकनीकों का व्यावहारिक उपयोग सिखाया गया।
क्लिनिकल प्रैक्टिस के दौरान एआई द्वारा दी जाने वाली भ्रामक जानकारी को पहचानने और सही प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग के माध्यम से सटीक उत्तर प्राप्त करने की बारीकियां बताई गईं। चिकित्सकों ने पहली बार स्वयं कोडिंग के माध्यम से डेटा को प्रोसेस करना सीखा। केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित इस कार्यशाला में संस्थान के 30 से अधिक वरिष्ठ फैकल्टी सदस्यों और रेजिडेंट्स ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा जगत के आधुनिक उपकरणों और एआई आधारित प्रणालियों पर चर्चा की गई, जो आने वाले समय में एम्स बिलासपुर में मरीजों के उपचार को और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाएगी।
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इनसेट
क्लिनिकल डेटा पर हुआ प्रैक्टिकल
कार्यशाला में केवल किताबी ज्ञान नहीं दिया गया, बल्कि डॉक्टरों ने वास्तविक क्लिनिकल डेटा पर मशीन लर्निंग का प्रयोग किया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि कैसे वर्षों पुराने मेडिकल रिकॉर्ड्स का विश्लेषण कर भविष्य में होने वाली बीमारियों का पूर्वाभास लगाया जा सकता है।
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एम्स के फिजियोलॉजी विभाग ने एआई, एमएल इन हेल्थकेयर पर हुई कार्यशाला
संस्थान के 30 से अधिक फैकल्टी और रेजिडेंट डॉक्टरों ने सीखे कोडिंग के गुर
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक के मोर्चे पर खुद को तैयार कर रहा है। इसी कड़ी में संस्थान के फिजियोलॉजी विभाग की ओर से स्वास्थ्य सेवा में एआई/एमएल : लॉजिस्टिक रिग्रेशन से डीप लर्निंग तक विषय पर एक विशेष व्यावहारिक कार्यशाला हुई। कार्यशाला में संस्थान के विशेषज्ञों ने यह सीखा कि कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग की मदद से मरीजों के सटीक इलाज और शोध कार्यों को नई दिशा दी जा सकती है।
कार्यशाला का शुभारंभ मुख्यातिथि एवं एम्स के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह (एवीएसएम, वीएसएम सेवानिवृत्त) ने किया। उन्होंने कहा कि एआई वर्तमान चिकित्सा पद्धति में एक क्रांतिकारी बदलाव की तरह उभरा है। उन्होंने चिकित्सकों को प्रेरित करते हुए कहा कि एआई न केवल समय बचाएगी बल्कि जटिल बीमारियों के निदान में भी सहायक सिद्ध होगी। इस दौरान डीन रिसर्च डॉ. अनुपम पराशर, डीन परीक्षा डॉ. निधि पुरी और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दिनेश वर्मा ने भी प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। फिजियोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष एवं डीन अकादमिक डॉ. रूपाली पार्लेवार के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण सत्र लिए। फिजियोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. पूनम वर्मा ने कार्यशाला की रूपरेखा साझा की। इसके उपरांत मुख्य वक्ता सहायक प्रोफेसर डॉ. नवदीप आहूजा और सीनियर रेजिडेंट डॉ. प्रशांत सैनी ने प्रतिभागियों को कई बिंदुओं पर प्रशिक्षित किया। चिकित्सा डेटा के विश्लेषण के लिए इन तकनीकों का व्यावहारिक उपयोग सिखाया गया।
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क्लिनिकल प्रैक्टिस के दौरान एआई द्वारा दी जाने वाली भ्रामक जानकारी को पहचानने और सही प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग के माध्यम से सटीक उत्तर प्राप्त करने की बारीकियां बताई गईं। चिकित्सकों ने पहली बार स्वयं कोडिंग के माध्यम से डेटा को प्रोसेस करना सीखा। केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित इस कार्यशाला में संस्थान के 30 से अधिक वरिष्ठ फैकल्टी सदस्यों और रेजिडेंट्स ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा जगत के आधुनिक उपकरणों और एआई आधारित प्रणालियों पर चर्चा की गई, जो आने वाले समय में एम्स बिलासपुर में मरीजों के उपचार को और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाएगी।
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क्लिनिकल डेटा पर हुआ प्रैक्टिकल
कार्यशाला में केवल किताबी ज्ञान नहीं दिया गया, बल्कि डॉक्टरों ने वास्तविक क्लिनिकल डेटा पर मशीन लर्निंग का प्रयोग किया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि कैसे वर्षों पुराने मेडिकल रिकॉर्ड्स का विश्लेषण कर भविष्य में होने वाली बीमारियों का पूर्वाभास लगाया जा सकता है।