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कोलका में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू : तीन से छह माह तक होगा सैनिटाइजेशन
Fri, 09 May 2025 11:23 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 09 May 2025 11:23 PM IST
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- 8 किमी के दायरे में पिग फार्म होंगे खाली, चार सुअरों को विभाग ने नियमों के तहत किया किल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। उपमंडल झंडूता की कोलका पंचायत में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का प्रकोप सामने आया है। इस संक्रमण के चलते एक पिग फार्म में 36 सुअरों की मौत हो गई, जबकि शेष चार सुअरों को विभाग ने नियमों के तहत किल करवा दिया है। पशुपालन विभाग ने फार्म को खाली करवा कर तीन से छह माह तक चलने वाली सैनिटाइजेशन प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पशु औषधालय दसलेहड़ा के तहत आने वाले इस फार्म में कुल 40 सुअर पाल रखे गए थे। अफ्रीकन स्वाइन फ्लू के संक्रमण से इनमें से 36 सुअर मर गए। मामला सामने आने के बाद विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए तुरंत कार्रवाई की। विभागीय गाइडलाइन के मुताबिक, जहां भी यह संक्रमण पाया जाता है, वहां से 8 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी पिग फार्म खाली करवाए जाते हैं और सुअरों को किल किया जाता है। ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके। उपनिदेशक पशुपालन विभाग डॉ. विनोद कुंदी ने बताया कि इससे पहले भराड़ी क्षेत्र के बलौट में भी दो पिग फार्मों में संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित फार्म के आसपास सैनिटाइजेशन किया जा रहा है और यह प्रक्रिया अगले कई महीनों तक जारी रहेगी। विभाग की ओर से पशुपालकों को सावधानी बरतने और किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत सूचना देने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी से संबंधित नुकसान का आकलन किया जा रहा है, ताकि प्रभावित पशुपालकों को मुआवजा दिया जा सके।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। उपमंडल झंडूता की कोलका पंचायत में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का प्रकोप सामने आया है। इस संक्रमण के चलते एक पिग फार्म में 36 सुअरों की मौत हो गई, जबकि शेष चार सुअरों को विभाग ने नियमों के तहत किल करवा दिया है। पशुपालन विभाग ने फार्म को खाली करवा कर तीन से छह माह तक चलने वाली सैनिटाइजेशन प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पशु औषधालय दसलेहड़ा के तहत आने वाले इस फार्म में कुल 40 सुअर पाल रखे गए थे। अफ्रीकन स्वाइन फ्लू के संक्रमण से इनमें से 36 सुअर मर गए। मामला सामने आने के बाद विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए तुरंत कार्रवाई की। विभागीय गाइडलाइन के मुताबिक, जहां भी यह संक्रमण पाया जाता है, वहां से 8 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी पिग फार्म खाली करवाए जाते हैं और सुअरों को किल किया जाता है। ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके। उपनिदेशक पशुपालन विभाग डॉ. विनोद कुंदी ने बताया कि इससे पहले भराड़ी क्षेत्र के बलौट में भी दो पिग फार्मों में संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित फार्म के आसपास सैनिटाइजेशन किया जा रहा है और यह प्रक्रिया अगले कई महीनों तक जारी रहेगी। विभाग की ओर से पशुपालकों को सावधानी बरतने और किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत सूचना देने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी से संबंधित नुकसान का आकलन किया जा रहा है, ताकि प्रभावित पशुपालकों को मुआवजा दिया जा सके।
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