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Bilaspur News: रिहायशी क्षेत्रों में तेंदुओं की बढ़ती दस्तक की वजह तलाशेगा विशेष अध्ययन

Fri, 09 Oct 2026 12:34 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2026 12:34 AM IST
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A special study will investigate the reasons behind the increasing presence of leopards in residential areas.
डेढ़ साल में जिले में तेंदुए की 40 घटनाएं, 20 बार लगाए पिंजरे, एक भी नहीं आया पकड़ में
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पांच साल में शिकायतें करीब दोगुनी, सदर क्षेत्र में सबसे ज्यादा मामले
बिलासपुर समेत निचले हिमाचल के तीन-चार जिलों में अध्ययन की तैयारी
सरोज पाठक
बिलासपुर। जंगलों से निकलकर रिहायशी इलाकों में पहुंच रहे तेंदुओं की बढ़ती गतिविधियों ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। अब विभाग सिर्फ तेंदुओं को पकड़ने तक सीमित न रहकर उनके आबादी की ओर आने के कारणों का पता लगाने की तैयारी में है। वन्यजीव मुख्यालय स्तर पर हिमाचल के तीन से चार जिलों में विशेष अध्ययन प्रस्तावित है, जिसमें बिलासपुर भी शामिल है। अध्ययन में यह पता लगाया जाएगा कि तेंदुए रिहायशी क्षेत्रों की ओर क्यों बढ़ रहे हैं और मानव-वन्यजीव टकराव के पीछे मुख्य कारण क्या हैं। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार एक अप्रैल 2025 से अब तक जिले में तेंदुए से जुड़ी 40 घटनाएं दर्ज हुई हैं। इनमें 20 बार पिंजरे लगाए गए, लेकिन एक भी तेंदुआ पकड़ में नहीं आया। पिछले करीब पांच वर्षों में तेंदुए से संबंधित शिकायतों में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी हुई है। सदर, झंडूता, भराड़ी, घुमारवीं और स्वारघाट रेंज से लगातार शिकायतें मिल रही हैं। रेंजवार रिकॉर्ड में सदर क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित है। यहां 22 जून 2025 से 24 सितंबर 2026 तक 25 शिकायतें और घटनाएं दर्ज हुईं। साई ब्राह्मणा, कंडेला, जंगल झलेड़ा, सिहड़ा, सोहरा ब्यूंस, माकड़ी मार्कंड, मलोखर, भड़ेतर, मकड़ोग, करोट, बरोग, दयोली, सोलग जुरासी, बिनौला, बैरी रजादियां, बागी, धार टटोह, टेपरा, देलग, नम्होल और मंगरोट से मामले सामने आए हैं। अधिकतर घटनाएं पशुधन के शिकार से जुड़ी हैं। जून 2025 में साई ब्राह्मणा में घरेलू बकरी को तेंदुए ने मार दिया। इसके बाद कंडेला, जंगल झलेड़ा और सिहड़ा से भी बकरी के शिकार की शिकायतें मिलीं। फरवरी 2026 में करोट, सोलग जुरासी, बरोग, थौरू और दयोली में मामले सामने आए। अप्रैल से सितंबर के बीच बिनौला, बैरी रजादियां, बागी, धार टटोह, टेपरा, देलग, नम्होल और मंगरोट में भी तेंदुए की गतिविधियां दर्ज हुईं। झंडूता रेंज के बड़ोल में 26 दिसंबर 2025 को तेंदुए की शिकायत के बाद रोहल, बेहना ब्राह्मणा और बलोह से भी शिकायतें आईं। इन स्थानों पर पिंजरे लगाए गए, लेकिन तेंदुआ नहीं पकड़ा जा सका। भराड़ी रेंज में भ्योल, छत्त, थंडोरा और छंज्यार से शिकायतें मिलीं। स्वारघाट के री गांव में दो बकरियां तेंदुए का शिकार बनीं, जबकि एक का पता नहीं चला। खुरानी में भी बकरी के शिकार का मामला सामने आया।

घर के आंगन तक पहुंच रहे तेंदुए
तेंदुओं की बढ़ती गतिविधियों का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि अब उनकी मौजूदगी आबादी के बीच तक दर्ज हो रही है। मैहरी काथला पंचायत के कुलवाड़ी गांव में 20 मार्च को तेंदुआ घर के आंगन में पहुंच गया और पालतू कुत्ते को शिकार बना लिया। घटना सीसीटीवी में कैद हुई। मोरसिंघी पंचायत के घ्याणा गांव में 28 अप्रैल को घर के पास बकरियां चरा रही महिला के सामने झाड़ियों से निकले तेंदुए ने करीब एक साल की बकरी को उठा लिया। झंडूता के रडोह गांव में मई में तेंदुआ करीब एक सप्ताह तक गांव के आसपास घूमता रहा। ग्रामीणों के अनुसार इस दौरान उसने दो बकरियों और दो पालतू कुत्तों को शिकार बनाया।
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34 पशु प्रभावित, 1.94 लाख रुपये मुआवजा
वर्ष 2024-25 में 31 बकरियां, एक खच्चर/घोड़ा और एक भैंस पर तेंदुए ने हमला किया। इसी अवधि में तेंदुए से मानव प्रभावित होने के दो मामले दर्ज हुए, जिनमें एक मामूली और एक गंभीर चोट का मामला था। विभाग ने इन मामलों में कुल 1,94,066 रुपये मुआवजा दिया।
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कोट
रिहायशी क्षेत्रों में तेंदुओं के आने की एक वजह वहां आसानी से शिकार उपलब्ध होना भी हो सकती है। वन्यजीव सप्ताह के दौरान लोगों को मानव-वन्यजीव टकराव और इससे बचाव के उपायों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। तेंदुआ दिखाई देने पर सुरक्षित तरीके से कैसे निपटना है, इसकी जानकारी भी लोगों को दी जा रही है।
-मृत्युंजय माधव, वन अरण्यपाल बिलासपुर
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