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Bilaspur News: एम्स बिलासपुर में 24 घंटे निर्बाध बिजली सेवा के लिए 1.45 करोड़ की योजना

Mon, 02 Feb 2026 11:41 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Mon, 02 Feb 2026 11:41 PM IST
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1.45 crore scheme for 24-hour uninterrupted power supply at AIIMS Bilaspur
संस्थान के सब-स्टेशनों के लिए थ्री-शिफ्ट ऑपरेशन का लिया है फैसला
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विशेषज्ञ एजेंसी संभालेगी बिजली का जिम्मा,फीडर लाइनों का भी होगा नियमित रखरखाव
वेंटिलेटर, ओटी और इमरजेंसी सेवाओं को तकनीकी खराबी से मिलेगी मुक्ति

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर ने अपनी स्वास्थ्य सेवाओं को हाई-टेक और बाधा मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। संस्थान के भीतर बिजली गुल होने या वोल्टेज की समस्या के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले असर को खत्म करने के लिए थ्री-शिफ्ट ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस प्रणाली लागू की जा रही है।

इसके तहत संस्थान के सभी 33/0.415 केवी सब-स्टेशनों और उनसे जुड़े ओवरहेड व अंडरग्राउंड फीडरों के संचालन के लिए 1,45 रपये का टेंडर जारी किया गया है। एम्स जैसे विशाल चिकित्सा संस्थान में एमआरआई, सीटी स्कैन, वेंटिलेटर और अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर 24 घंटे संचालित होते हैं। बिजली की हल्की सी ट्रिपिंग भी मरीजों की जान के लिए जोखिम बन सकती है और करोड़ों के उपकरणों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसे देखते हुए सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (इंजीनियरिंग विभाग) ने विशेषज्ञ एजेंसी के माध्यम से तीन शिफ्टों में स्टाफ तैनात करने का निर्णय लिया है, ताकि किसी भी तकनीकी फाल्ट को जीरो रिस्पांस टाइम में ठीक किया जा सके। सब-स्टेशनों पर सुबह, दोपहर और रात की शिफ्ट में अनुभवी इलेक्ट्रिकल स्टाफ तैनात रहेगा। इसमें केवल सब-स्टेशन ही नहीं, बल्कि परिसर में बिछी कई किलोमीटर लंबी भूमिगत केबलों और ओवरहेड लाइनों की मरम्मत भी शामिल है। 1.45 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को एक साल के लिए लागू किया जाएगा, जिसे प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकता है। एम्स प्रशासन ने गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पात्रता के कड़े मानदंड रखे हैं। केवल वही ठेकेदार पात्र होंगे जिनके पास राज्य बिजली बोर्ड या केंद्र सरकार की ओर से जारी वैध विद्युत लाइसेंस और जीएसटी पंजीकरण होगा। ठेकेदार काम को किसी दूसरी एजेंसी को नहीं सौंप सकेगा। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि जीएसटी और लेबर सेस का खर्च ठेकेदार को ही वहन करना होगा।
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