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20 दिनों में उठाना होगा अवैध डंपिंग साइटों से मलबा

Wed, 25 Apr 2018 09:44 PM IST
Updated Wed, 25 Apr 2018 09:44 PM IST
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20 दिनों में उठाना होगा अवैध डंपिंग साइटों से मलबा
प्रशासन ने फोरलेन कंपनी पर कसा शिकंजा
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मछुआरों के नुकसान की करनी होगी भरपाई
20 दिनों में उठाना होगा अवैध डंपिंग साइटों से मलबा
कंपनी को 20 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
एसडीएम की अध्यक्षता में बनाई कमेटी ने तैयार की रिपोर्ट
रितेश गुलेरिया
बिलासपुर।
जिला प्रशासन ने फोरलेन कंपनी पर शिकंजा कस दिया है। प्रशासन ने निर्माण कार्य कर रही कंपनी को अवैध रूप से डंपिंग के कारण हुए नुकसान का मुआवजा 20 दिनों के अंदर मछुआरों को अदा करने के आदेश दिए हैं। वहीं नदी-नालों में फेंकी जा रही मिट्टी को हटाने को कहा गया है। इसके अलावा नदी-नालों के आसपास सुरक्षा दीवार लगाने कहा कहा है ताकि मलबा न बहे।
उल्लेखनीय है कि फोरलेन निर्माण के मलबे को अवैध रूप से डंप किया जा रहा है। इससे गोबिंदसागर सहित अन्य नदी-नालों को नुकसान पहुंच रहा है। इसके कारण चार साल में मछली उत्पादन भी आधा रह गया है। इसको लेकर सीता राम निवासी मेहला तहसील श्री नयना देवी ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजा था। इ के बाद इस मामले की जांच के आदेश दिए गए। पूरे मामले को अमर उजाला ने भी प्रमुखता से उठाया। इसके बाद एसडीएम की अध्यक्षता में गत रोज पहले संयुक्त निरीक्षण टीम ने मौका का निरीक्षण किया।
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टीम ने बरमाणा, राम बाग, बरमाणा के लिए बनाए जा रहे पुल का निरीक्षण किया। यहां खामियों को दूर करने का कंपनी के अधिकारियों ने आश्वासन दिया। कमेटी पाया कि कंपनी ने डैहर नाला में निर्माणाधीन पुल की मिट्टी गोबिंदसागर में बह कर जा रही है। इस कारण गोबिंदसागर का पानी नाले में नहीं आ पा रहा है। इस नाले में मछली का उत्पादन भी होता है। यहां मौके पर फोरलेन अधिकारियों ने बरसात से पहले सुरक्षा दीवार लगाने की बात कही। इसके बाद बलोह नाला और भडौलियां नाला का निरीक्षण किया। यहां पर भी मिट्टी जलाशय में जा रही है। इससे मछली उत्पादन में बाधा पैदा हुई है। यहां कंपनी को सुरक्षा दीवार लगाने के साथ मिट्टी को हटाने को भी कहा गया। इसके बाद जांच कमेटी ने गंभरोला खड्डा पहुंची जहां पुल का काम चल रहा है। उससे खड्ड में रोक लगी है। इस कारण मछलियां जलाशय से खड्ड तक नहीं जा सकती हैं। इसका असर मछली उत्पादन पर पड़ रहा है। सभा के प्रतिनिधियों का कहना था कि पुल के पिलरों में जाल लगाते समय फंस जाते हैं। जिस कारण मछुआरों के जाल नष्ट हो रहे हैं। इसके अलावा भी कई खामियां मौके पर पाई गईं।
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मछुआरों को किश्ती भी दे
एसडीएम कार्यालय बिलासपुर से जारी पत्र में कहा गया है कि मछुआरों को हुए नुकसान जालों के टूटने की भरपाई के अलावा अन्य नुकसान की भरपाई कंपनी को करनी होगी। मछुआरों को जाल के अलावा किश्ती भी कंपनी मुहैया करवाएगी। मलबे हटाने के भी आदेश दिए गए हैं। इस पूरे कार्य को करने के लिए 20 दिन का समय दिया गया है। कंपनी को 20 दिन में पूरी रिपोर्ट प्रशासन को देनी होगी।

चार बार एनजीटी ने किया निरीक्षण
फोरलेन प्रभावित समिति का महासचिव मदल लाल शर्मा का कहना है कि फोरलेन समिति इस मामले को लंबे समय से उठाती चली आ रही थी। उसकी सुनवाई गंभीरता से नहीं की गई। हालांकि चार बार एनजीटी की टीम भी मौके पर निरीक्षण कर चुकी है। लेकिन उससे जो रिपोर्ट दी उसमें कहा कि यहां कुछ नहीं हुआ है। अब प्रशासन की जांच टीम को मौके पर कई खामियां मिली हैं। इसकी पूरी रिपोर्ट बना कर कंपनी कड़े आदेश दिए है इसका कमेटी स्वागत करती है।
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