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Yamuna Nagar News: यमुना का रौद्र रूप, पानी में समाया श्मशान घाट
Tue, 02 Sep 2025 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 02 Sep 2025 01:30 AM IST
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कलानौर के पास यमुना के किनारे पर हुआ कटाव। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। पहाड़ों से निकलने के बाद मैदानी क्षेत्र में यमुना उफान पर आ गई। ऐसे में बाढ़ ने कलेसर, नवाजपुर, मांडे वाला, बेलगढ़ आदि तटवर्ती गांवों में भूमि कटाव शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं छछरौली के गांव रुकाली में तो पूरा श्मशान घाट ही यमुना में समा गया। वहीं टापू कमालपुर में 9.70 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई तटबंद की दीवार को भी नुकसान पहुंचाया है। यहां पानी के तेज बहाव से दीवार का एक स्पैनल धंस गया। जिससे भूमि कटाव होने लगा है।
यमुना से करीब ढाई एकड़ के मुहाने पर ही टापू कमालपुर गांव बसा है। यमुना को उफान पर देख कर ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ी हुई है। उधर, गांव लापरा के खेतों तक यमुना का पानी पहुंच गया है। मांडेवाला, नवाजपुर में भूमि कटाव हो रहा है। ये खनन एरिया है। बेलगढ़ में बने रेत-बजरी-पत्थर के बंध से पानी रिसने लगा है। कलेसर में भी भूमि कटाव हो रहा है। इसके अलावा छोटा लापरा, घोड़ों पिपली, लाल छप्पर, जठलाना, गुमथला, संधाला-संधाली, पोबारी, बागवाली, उन्हेड़ी सहित कई गांव पड़ते हैं, जिनमें यमुना नदी के पानी का प्रभाव रहता है।
यमुना का इस तरह रही उफान पर
आंकड़ों के मुताबिक हथिनी कुंड बैराज पर 18 अगस्त 2019 को 8 लाख 28072 क्यूसेक हाई फ्लड लेवल का रिकॉर्ड दर्ज है। सितंबर महीने में यमुना नदी कई बार रौद्र रूप में बहीं। बता दें कि ताजेवाला हेड 3 सितंबर 1978 को आई भीषण 7 लाख 9239 क्यूसेक की बाढ़ में डैमेज हो गया था। इसके बाद 1999 में हथिनीकुंड बैराज का निर्माण किया गया। 25 सितंबर 1947 को यमुना नदी में 7 लाख क्यूसेक की बाढ़ आई। 25 सितंबर 1988 को 5 लाख 75 522 क्यूसेक की बाढ़ आई। इसी प्रकार 5 सितंबर 1995 को 5 लाख 38338 क्यूसेक पानी आया। 8 सितंबर 2010 को 6 लाख 7076 क्यूसेक की भीषण बाढ़ आई। 20 सितंबर 2010 को 7 लाख 44507 क्यूसेक की भीषण बाढ़ आई। 13 सितंबर 2010 को 2 लाख 65944 क्यूसेक पानी आया।
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यमुनानगर। पहाड़ों से निकलने के बाद मैदानी क्षेत्र में यमुना उफान पर आ गई। ऐसे में बाढ़ ने कलेसर, नवाजपुर, मांडे वाला, बेलगढ़ आदि तटवर्ती गांवों में भूमि कटाव शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं छछरौली के गांव रुकाली में तो पूरा श्मशान घाट ही यमुना में समा गया। वहीं टापू कमालपुर में 9.70 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई तटबंद की दीवार को भी नुकसान पहुंचाया है। यहां पानी के तेज बहाव से दीवार का एक स्पैनल धंस गया। जिससे भूमि कटाव होने लगा है।
यमुना से करीब ढाई एकड़ के मुहाने पर ही टापू कमालपुर गांव बसा है। यमुना को उफान पर देख कर ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ी हुई है। उधर, गांव लापरा के खेतों तक यमुना का पानी पहुंच गया है। मांडेवाला, नवाजपुर में भूमि कटाव हो रहा है। ये खनन एरिया है। बेलगढ़ में बने रेत-बजरी-पत्थर के बंध से पानी रिसने लगा है। कलेसर में भी भूमि कटाव हो रहा है। इसके अलावा छोटा लापरा, घोड़ों पिपली, लाल छप्पर, जठलाना, गुमथला, संधाला-संधाली, पोबारी, बागवाली, उन्हेड़ी सहित कई गांव पड़ते हैं, जिनमें यमुना नदी के पानी का प्रभाव रहता है।
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यमुना का इस तरह रही उफान पर
आंकड़ों के मुताबिक हथिनी कुंड बैराज पर 18 अगस्त 2019 को 8 लाख 28072 क्यूसेक हाई फ्लड लेवल का रिकॉर्ड दर्ज है। सितंबर महीने में यमुना नदी कई बार रौद्र रूप में बहीं। बता दें कि ताजेवाला हेड 3 सितंबर 1978 को आई भीषण 7 लाख 9239 क्यूसेक की बाढ़ में डैमेज हो गया था। इसके बाद 1999 में हथिनीकुंड बैराज का निर्माण किया गया। 25 सितंबर 1947 को यमुना नदी में 7 लाख क्यूसेक की बाढ़ आई। 25 सितंबर 1988 को 5 लाख 75 522 क्यूसेक की बाढ़ आई। इसी प्रकार 5 सितंबर 1995 को 5 लाख 38338 क्यूसेक पानी आया। 8 सितंबर 2010 को 6 लाख 7076 क्यूसेक की भीषण बाढ़ आई। 20 सितंबर 2010 को 7 लाख 44507 क्यूसेक की भीषण बाढ़ आई। 13 सितंबर 2010 को 2 लाख 65944 क्यूसेक पानी आया।

कलानौर के पास यमुना के किनारे पर हुआ कटाव। संवाद

कलानौर के पास यमुना के किनारे पर हुआ कटाव। संवाद

कलानौर के पास यमुना के किनारे पर हुआ कटाव। संवाद

कलानौर के पास यमुना के किनारे पर हुआ कटाव। संवाद

कलानौर के पास यमुना के किनारे पर हुआ कटाव। संवाद

कलानौर के पास यमुना के किनारे पर हुआ कटाव। संवाद

कलानौर के पास यमुना के किनारे पर हुआ कटाव। संवाद

कलानौर के पास यमुना के किनारे पर हुआ कटाव। संवाद
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