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Yamuna Nagar News: निराकार व साकार स्वरूप की भक्ति का बताया अंतर

Mon, 04 Aug 2025 12:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Mon, 04 Aug 2025 12:44 AM IST
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The difference between devotion of formless and real form is explained
सत्संग में प्रवचन करतीं साध्वियां। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। जिसमें साध्वी वंशिका भारती संगत को बताया कि परमात्मा के निराकार स्वरूप की भक्ति और साकार स्वरूप परमात्मा की भक्ति में बहुत अंतर होता है। जब हम भगवान के निराकार स्वरूप की भक्ति करते हैं, तो कदाचित उसका आधार अति दुर्बल होता है क्योंकि केवल अपनी श्रद्धा के आधार पर ही हम परमात्मा पर विश्वास करने का प्रयास करते हैं।
साध्वी ने कहा किसी कारणवश मन की इच्छा पूर्ण न हो तो श्रद्धा बाधक हो जाती है। तब दुर्भाग्यवश हमारी बुद्धि व मन परमात्मा के केवल बाहरी स्वरूप तक ही सीमित रह जाता है। जब हम मिथ्या अहंकार त्यागकर परमात्मा के साकार स्वरूप पूर्ण ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु की शरण में जाते हैं, तो वे हमारी आत्मा के सूक्ष्म स्तर पर कार्य करते हैं।
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गुरु हमें ब्रह्मज्ञान के द्वारा आत्म साक्षात्कार की सीढ़ी प्रदान करते हैं जिस पर एक साधक निरंतर ध्यान साधना के द्वारा आगे बढ़ता हुआ अपने परम लक्ष्य की प्राप्ति कर लेता है। उन्होंने बताया कि गुरु भक्ति हमारी श्रद्धा भक्ति के पुष्प में विश्वास की सुगंध भर देते हैं। गुरु भक्ति का आधार दृढ़ एवं चिरस्थाई होता है, क्योंकि वह केवल मान्यताओं पर आधारित नहीं अपितु साक्षात्कार पर आधारित होता है।
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जीवन में गुरु भक्ति उतर जाए तो मन और बुद्धि से प्रत्येक संशय एवं भ्रम दूर हो जाते हैं, अन्यथा गुरु के बिना निराकार परमात्मा की भक्ति में हम केवल एक स्वरूप तक सीमित रह कर भेद बुद्धि एवं द्वैत में उलझे रहते हैं। साध्वी वंशिका भारती ने कहा कि यदि एक वाक्य में गुरु भक्ति को परिभाषित किया जाए तो यह कहा जा सकता है कि भक्ति अपने वास्तविक स्वरूप और गरिमा को केवल गुरु से जुड़ कर ही प्राप्त करती है। जब हृदय में गुरु भक्ति जागृत हो जाती है तो दया, क्षमा, आचरण की पवित्रता, नम्रता जैसे गुण स्वतः ही व्यक्तित्व में उतरने लगते हैं।

सत्संग में प्रवचन करतीं साध्वियां। आयोजक

सत्संग में प्रवचन करतीं साध्वियां। आयोजक

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