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छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया
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शिविर में कराटे का प्रशिक्षण लेती छात्राएं। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राजकीय महाविद्यालय अहड़वाला में राष्ट्रीय सेवा योजना और महिला प्रकोष्ठ के तत्वावधान में एक सप्ताह से चल रहे आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर का समापन किया गया। शिविर में जूडो कराटे में दक्ष ब्लैक बेल्ट धारक सरस्वती ने बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण शिविर में छात्राओं के संपूर्ण विकास के लिए जूडो, कराटे के साथ साथ शारीरिक व्यायाम की विभिन्न क्रियाओं के बारे में अवगत करवाया गया।
महाविद्यालय के कार्यकारी प्राचार्य डॉ. सुनील तनेजा ने कहा कि आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम लड़कियों को सुरक्षित महसूस करने के साथ साथ अचानक होने वाले आक्रमण का डटकर सामना करने के लिए आत्मविश्वास व शारीरिक शक्ति प्रदान करता है। आत्मरक्षा के लिए सीखी गई कोई भी विधा छात्राओं में आत्मविश्वास को बढ़ाने में एक प्रभावी साधन साबित होती है, जिससे वह अपनी और अपने साथ की लड़कियों की सहायता कर सकती हैं। छात्राओं को शिक्षण कार्य के साथ अन्य गतिविधियों में अपनी सहभागिता निभानी बहुत जरूरी है।
डॉ. रमेश धारीवाल ने कहा कि हमारी बालिकाएं पहले से ही सशक्त हैं, कमजोर नहीं हैं। इस प्रशिक्षण से उनके भीतर छिपी हुई शक्ति को जगाने का प्रयास किया गया है। महिला प्रकोष्ठ की संयोजिका मनीषा मोर ने कहा कि आज हम जिस तरह की दुनिया में रहते हैं, उसमें बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए यह एक अच्छा और सफल प्रयास है। इस आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर में महाविद्यालय की अनेक छात्राओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। इस मौके पर मनीषा मोर, डॉ. सुमन, अमित कपूर आदि मौजूद रहे।
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बिलासपुर। राजकीय महाविद्यालय अहड़वाला में राष्ट्रीय सेवा योजना और महिला प्रकोष्ठ के तत्वावधान में एक सप्ताह से चल रहे आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर का समापन किया गया। शिविर में जूडो कराटे में दक्ष ब्लैक बेल्ट धारक सरस्वती ने बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण शिविर में छात्राओं के संपूर्ण विकास के लिए जूडो, कराटे के साथ साथ शारीरिक व्यायाम की विभिन्न क्रियाओं के बारे में अवगत करवाया गया।
महाविद्यालय के कार्यकारी प्राचार्य डॉ. सुनील तनेजा ने कहा कि आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम लड़कियों को सुरक्षित महसूस करने के साथ साथ अचानक होने वाले आक्रमण का डटकर सामना करने के लिए आत्मविश्वास व शारीरिक शक्ति प्रदान करता है। आत्मरक्षा के लिए सीखी गई कोई भी विधा छात्राओं में आत्मविश्वास को बढ़ाने में एक प्रभावी साधन साबित होती है, जिससे वह अपनी और अपने साथ की लड़कियों की सहायता कर सकती हैं। छात्राओं को शिक्षण कार्य के साथ अन्य गतिविधियों में अपनी सहभागिता निभानी बहुत जरूरी है।
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डॉ. रमेश धारीवाल ने कहा कि हमारी बालिकाएं पहले से ही सशक्त हैं, कमजोर नहीं हैं। इस प्रशिक्षण से उनके भीतर छिपी हुई शक्ति को जगाने का प्रयास किया गया है। महिला प्रकोष्ठ की संयोजिका मनीषा मोर ने कहा कि आज हम जिस तरह की दुनिया में रहते हैं, उसमें बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए यह एक अच्छा और सफल प्रयास है। इस आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर में महाविद्यालय की अनेक छात्राओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। इस मौके पर मनीषा मोर, डॉ. सुमन, अमित कपूर आदि मौजूद रहे।
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