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Yamuna Nagar News: किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत को किया याद
Sat, 16 May 2026 12:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 16 May 2026 12:54 AM IST
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बैठक के दौरान किसानों को संबोधित करते जिलाध्यक्ष। संगठन
संवाद न्यूज एजंसी
रादौर। भारतीय किसान यूनियन की बैठक खंड कार्यालय डांगी ढाबा कांजनू में हुई। बैठक में महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया गया। साथ ही श्रद्धांजलि दी गई।
जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर ने कहा कि महेंद्र सिंह टिकैत की 15वीं पुण्यतिथि पर खंड व गांव स्तर पर पौधारोपण, जल, जमीन, जंगल पर्यावरण बचाओ संकल्प के रूप में मनाई गई। उनके विचार और संघर्ष हर किसान के दिल में जिंदा है। उन्होंने कहा कि महेंद्र सिंह टिकैत का जन्म छह अक्टूबर 1935 को मुजफ्फरनगर के सिसौली गांव में हुआ। 1987 में बालियान खाप के चौधरी बनने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
धोती-कुर्ता, सफेद टोपी व हाथ में हुक्का -यही उनकी पहचान बनी। 1986 में मुजफ्फरनगर की बिजली दरों के खिलाफ आंदोलन से हुआ। 1987 में तीन लाख से ज्यादा किसान 10 दिन तक डटे रहे। 1988 में दिल्ली के बोट क्लब पर सात दिन तक पांच लाख किसानों का महापड़ाव रहा। राजीव गांधी सरकार को गन्ने का दाम बढ़ाना पड़ा।
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उन्होंने सभी को महेंद्र सिंह टिकैत के संघर्ष के बारे में बताया। इस दौरान अरविंन कांबोज, कुलविंद्र सिद्धू, साहिल सेतिया, बिजेंद्र राणा, विनोद डांगी, महेंद्र कांबोज, अशोक डांगी, सतपाल सैनी पोटली, महेंद्र सुड़ल, उदय सिंह कुंजल, पवन गोयल दामला सहित अन्य उपस्थित रहे।
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रादौर। भारतीय किसान यूनियन की बैठक खंड कार्यालय डांगी ढाबा कांजनू में हुई। बैठक में महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया गया। साथ ही श्रद्धांजलि दी गई।
जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर ने कहा कि महेंद्र सिंह टिकैत की 15वीं पुण्यतिथि पर खंड व गांव स्तर पर पौधारोपण, जल, जमीन, जंगल पर्यावरण बचाओ संकल्प के रूप में मनाई गई। उनके विचार और संघर्ष हर किसान के दिल में जिंदा है। उन्होंने कहा कि महेंद्र सिंह टिकैत का जन्म छह अक्टूबर 1935 को मुजफ्फरनगर के सिसौली गांव में हुआ। 1987 में बालियान खाप के चौधरी बनने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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धोती-कुर्ता, सफेद टोपी व हाथ में हुक्का -यही उनकी पहचान बनी। 1986 में मुजफ्फरनगर की बिजली दरों के खिलाफ आंदोलन से हुआ। 1987 में तीन लाख से ज्यादा किसान 10 दिन तक डटे रहे। 1988 में दिल्ली के बोट क्लब पर सात दिन तक पांच लाख किसानों का महापड़ाव रहा। राजीव गांधी सरकार को गन्ने का दाम बढ़ाना पड़ा।
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उन्होंने सभी को महेंद्र सिंह टिकैत के संघर्ष के बारे में बताया। इस दौरान अरविंन कांबोज, कुलविंद्र सिद्धू, साहिल सेतिया, बिजेंद्र राणा, विनोद डांगी, महेंद्र कांबोज, अशोक डांगी, सतपाल सैनी पोटली, महेंद्र सुड़ल, उदय सिंह कुंजल, पवन गोयल दामला सहित अन्य उपस्थित रहे।