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Yamuna Nagar News: छड़ियों के मेले में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, दिखा आस्था का सैलाब
Sat, 29 Aug 2026 12:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 29 Aug 2026 12:50 AM IST
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व्यासपुर में गोगा मेड़ी पर पवित्र छड़ी की पूजा अर्चना करते हुए श्रद्धालु। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। आंबवाला मार्ग स्थित जाहरवीर गोगा मेड़ी पर शुक्रवार को छड़ियों का मेला श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। मेले में आस्था, विश्वास और रोमांच का अनूठा संगम देखने को मिला। रंग-बिरंगी छड़ियां लेकर पहुंचे श्रद्धालुओं ने डमरू और सारंगी की धुन पर गोगा जाहरवीर का गुणगान किया।
जोगी समाज के लोग करीब 15 फुट लंबी छड़ियां लेकर डमरू और सारंगी बजाते हुए कस्बे की गलियों, बाजारों और चौकों से गुजरे। इस दौरान लोग श्रद्धा से नतमस्तक होकर छड़ियों के दर्शन करते नजर आए। महिलाओं और बच्चों ने मेले में लगी दुकानों से जमकर खरीदारी की। पूजा स्थल के आसपास भी विभिन्न प्रकार की दुकानें सजी रहीं।
भक्त छड़ियों को गोगा मेड़ी से लेकर पहले क्षेत्रपाल स्थान पर पहुंचे। इसके बाद कस्बे की परिक्रमा करते हुए छड़ियों को शीतला माता मंदिर तक ले जाया गया। यहां मंदिर से कुछ दूरी पर छड़ियों को गाड़ दिया गया। सेवक सुरेंद्र कुमार और काला ने बताया कि गोगा मेड़ी पर भंडारे का आयोजन किया जाएगा। रात को नीरज नाथ एंड पार्टी की ओर से गोगा जाहरवीर के जीवन की साहसिक गाथाओं का संगीतमय प्रस्तुतीकरण किया गया।
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सेवक मनोज शर्मा और मदन लाल ने बताया कि इस दिन को गोगा जाहरवीर के समाधि दिवस के रूप में मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार करीब 1100 वर्ष पूर्व जन्मे जाहरवीर ने माता बाधक माई के आदेश पर घर त्यागकर ढुंगी डावर बागड़ देश में समाधि ली थी। किवदंती है कि सर्पों के राजा बासंग ने उनसे नाग वंश को समाप्त न करने की प्रार्थना की थी। इसके बाद जाहरवीर सर्प जाति के बादशाह के रूप में पूजे जाने लगे। सेवकों ने बताया कि भंडारे के साथ मेले का समापन होगा।
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व्यासपुर। आंबवाला मार्ग स्थित जाहरवीर गोगा मेड़ी पर शुक्रवार को छड़ियों का मेला श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। मेले में आस्था, विश्वास और रोमांच का अनूठा संगम देखने को मिला। रंग-बिरंगी छड़ियां लेकर पहुंचे श्रद्धालुओं ने डमरू और सारंगी की धुन पर गोगा जाहरवीर का गुणगान किया।
जोगी समाज के लोग करीब 15 फुट लंबी छड़ियां लेकर डमरू और सारंगी बजाते हुए कस्बे की गलियों, बाजारों और चौकों से गुजरे। इस दौरान लोग श्रद्धा से नतमस्तक होकर छड़ियों के दर्शन करते नजर आए। महिलाओं और बच्चों ने मेले में लगी दुकानों से जमकर खरीदारी की। पूजा स्थल के आसपास भी विभिन्न प्रकार की दुकानें सजी रहीं।
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भक्त छड़ियों को गोगा मेड़ी से लेकर पहले क्षेत्रपाल स्थान पर पहुंचे। इसके बाद कस्बे की परिक्रमा करते हुए छड़ियों को शीतला माता मंदिर तक ले जाया गया। यहां मंदिर से कुछ दूरी पर छड़ियों को गाड़ दिया गया। सेवक सुरेंद्र कुमार और काला ने बताया कि गोगा मेड़ी पर भंडारे का आयोजन किया जाएगा। रात को नीरज नाथ एंड पार्टी की ओर से गोगा जाहरवीर के जीवन की साहसिक गाथाओं का संगीतमय प्रस्तुतीकरण किया गया।
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सेवक मनोज शर्मा और मदन लाल ने बताया कि इस दिन को गोगा जाहरवीर के समाधि दिवस के रूप में मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार करीब 1100 वर्ष पूर्व जन्मे जाहरवीर ने माता बाधक माई के आदेश पर घर त्यागकर ढुंगी डावर बागड़ देश में समाधि ली थी। किवदंती है कि सर्पों के राजा बासंग ने उनसे नाग वंश को समाप्त न करने की प्रार्थना की थी। इसके बाद जाहरवीर सर्प जाति के बादशाह के रूप में पूजे जाने लगे। सेवकों ने बताया कि भंडारे के साथ मेले का समापन होगा।