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तीन दिन से शवगृह में रखा रहा शव, अस्पताल प्रशासन ने नहीं दी पुलिस को सूचना
Updated Mon, 18 Sep 2017 01:00 AM IST
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अस्पताल से लापता युवक का शव तीन दिन शवगृह में रखा रहा, पुलिस को नहीं दी सूचना
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। अस्पताल से ही लापता युवक का शव तीन दिन से पोस्टमार्टम हाउस में रखा रहा, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इसकी सूचना पुलिस को देने की जहमत नहीं उठाई। भटकते परिजन रविवार को जब पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे तब घटना की जानकारी लगी। इस पर परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर शव मिलने की सूचना पुलिस को नहीं देने और पुलिस की ओर से लापता व्यक्ति की रिपोर्ट दर्ज न करने का आरोप लगाकर हंगामा कर दिया। सूचना पर पुलिस और सीएमओ मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाकर शांत किया। सीएमओ का कहना था कि जांच में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। देर शाम तक पुलिस मामले में कार्रवाई कर रही थी।
बता दें कि 15 सितंबर को रेलवे रोड पर शहीद भगत सिंह चौक के नजदीक 36 वर्षीय व्यक्ति बेसुध हालत में पड़ा हुआ था। आसपास के लोगों ने इसकी सूचना कंट्रोल रूम को दी, जिसपर एंबुलेंस की मदद से उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। डॉक्टरों ने मौत का कारण जहरीला पदार्थ खाना बताया था। वहीं, मृतक की तलाश करते हुए परिजन रविवार को सिविल अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में पहुंचे। शव की शिनाख्त डारपुर निवासी यासीन के रूप में की। परिजनों ने इस बारे में पुलिस को सूचित किया, लेकिन पुलिस का कहना था कि उनके पास इस बारे में अस्पताल से कोई सूचना नहीं आई। परिजनों का आरोप है कि जब तीन दिन से शव शवगृह में रखा हुआ है, तो इसकी सूचना सिविल अस्पताल द्वारा पुलिस को क्यों नहीं दी गई। जब परिजनों ने इस बारे में सिविल अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाते हुए हंगामा किया तो उनके हाथ पांव फूल गए। सिविल अस्पताल की ओर से मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना पर शहर पुलिस व सीएमओ डा. कुलदीप मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को समझाया, लेकिन परिजन शव की सूचना पुलिस को न देने वाले कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। देर शाम सीएमओ कुलदीप ने उन्हें समझाया कि मामले में जांच बिठाई जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारी पर कार्रवाई की जाएगी। जिसके बाद परिजन शांत हुए और पुलिस ने पोस्टमार्टम कार्रवाई शुरू की।
दवा लेने के लिए लाइन में लगे तो लापता हुआ था यासीन
बागपत निवासी अदरीश ने बताया कि डारपुर निवासी यासीन उसका दामाद है। वह कई दिन से बीमार चल रहा था, इसलिए वे उसे 15 सितंबर को सिविल अस्पताल में दवा दिलाने के लिए लेकर आए थे। यासीन को कुर्सी पर बिठा कर वह लाइन में लग कर ओपीडी की पर्ची कटवाने लग गया। जब वह पर्ची लेकर वापस आया तो यासीन गायब था। उसने आस-पास पता किया, लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया। उन्होंने उसकी हर जगह तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लग पाया था।
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सिविल चौकी पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने से किया मना
परिजनों ने बताया कि यासीन के लापता होने की शिकायत लेकर वे सिविल अस्पताल में बनी पुलिस चौकी में गए थे। आरोप है कि पुलिस ने उनकी रिपोर्ट दर्ज करने से साफ मना कर दिया और उसे अपने स्तर पर तलाश करने की सलाह दी। परिजनों ने बताया कि पोस्टमार्टम हाउस व सिविल चौकी पास पास में है। जब पोस्टमार्टम हाउस में शव आया होगा तो पुलिस को भी पता चला होगा, लेकिन पुलिस व अस्पताल प्रशासन दोनों ने इस मामले में लापरवाही बरती है।
यमुनानगर की बजाय जगाधरी शहर पुलिस को दी सूचना
तीन दिन से शव की सूचना पुलिस को न देने पर रविवार को भी अस्पताल प्रशासन लापरवाह बना रहा। मृतक व्यक्ति शहर यमुनानगर क्षेत्र के शहीद भगत सिंह चौक के नजदीक से मिला था, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इसकी सूचना यमुनानगर पुलिस को देने की बजाए थाना शहर जगाधरी पुलिस को दी। तीन दिन से शव पड़ा होने पर वह सड़ चुका था। अब डॉक्टर सोमवार को शव को पोस्टमार्टम करने की बात कह रहे हैं।
15 सितंबर को दोपहर के समय फव्वारा चौक से सूचना आई थी कि किसी व्यक्ति की तबीयत जहरीला पदार्थ निगलने से बिगड़ गई। एंबुलेंस के माध्यम से उसे ट्रामा सेंटर में लाया गया, यहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। डाक्टरों ने शिनाख्त न होने के कारण शव को शवगृह में रखवा दिया था। इसकी सूचना पुलिस को दी गई थी या नहीं इसकी जांच की जा रही है। मामले की जांच कर रहे है। जांच में यदि किसी कर्मी की लापरवाहीं पाई गई तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डा. कुलदीप, सिविल सर्जन, यमुनानगर अस्पताल।
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। अस्पताल से ही लापता युवक का शव तीन दिन से पोस्टमार्टम हाउस में रखा रहा, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इसकी सूचना पुलिस को देने की जहमत नहीं उठाई। भटकते परिजन रविवार को जब पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे तब घटना की जानकारी लगी। इस पर परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर शव मिलने की सूचना पुलिस को नहीं देने और पुलिस की ओर से लापता व्यक्ति की रिपोर्ट दर्ज न करने का आरोप लगाकर हंगामा कर दिया। सूचना पर पुलिस और सीएमओ मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाकर शांत किया। सीएमओ का कहना था कि जांच में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। देर शाम तक पुलिस मामले में कार्रवाई कर रही थी।
बता दें कि 15 सितंबर को रेलवे रोड पर शहीद भगत सिंह चौक के नजदीक 36 वर्षीय व्यक्ति बेसुध हालत में पड़ा हुआ था। आसपास के लोगों ने इसकी सूचना कंट्रोल रूम को दी, जिसपर एंबुलेंस की मदद से उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। डॉक्टरों ने मौत का कारण जहरीला पदार्थ खाना बताया था। वहीं, मृतक की तलाश करते हुए परिजन रविवार को सिविल अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में पहुंचे। शव की शिनाख्त डारपुर निवासी यासीन के रूप में की। परिजनों ने इस बारे में पुलिस को सूचित किया, लेकिन पुलिस का कहना था कि उनके पास इस बारे में अस्पताल से कोई सूचना नहीं आई। परिजनों का आरोप है कि जब तीन दिन से शव शवगृह में रखा हुआ है, तो इसकी सूचना सिविल अस्पताल द्वारा पुलिस को क्यों नहीं दी गई। जब परिजनों ने इस बारे में सिविल अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाते हुए हंगामा किया तो उनके हाथ पांव फूल गए। सिविल अस्पताल की ओर से मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना पर शहर पुलिस व सीएमओ डा. कुलदीप मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को समझाया, लेकिन परिजन शव की सूचना पुलिस को न देने वाले कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। देर शाम सीएमओ कुलदीप ने उन्हें समझाया कि मामले में जांच बिठाई जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारी पर कार्रवाई की जाएगी। जिसके बाद परिजन शांत हुए और पुलिस ने पोस्टमार्टम कार्रवाई शुरू की।
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दवा लेने के लिए लाइन में लगे तो लापता हुआ था यासीन
बागपत निवासी अदरीश ने बताया कि डारपुर निवासी यासीन उसका दामाद है। वह कई दिन से बीमार चल रहा था, इसलिए वे उसे 15 सितंबर को सिविल अस्पताल में दवा दिलाने के लिए लेकर आए थे। यासीन को कुर्सी पर बिठा कर वह लाइन में लग कर ओपीडी की पर्ची कटवाने लग गया। जब वह पर्ची लेकर वापस आया तो यासीन गायब था। उसने आस-पास पता किया, लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया। उन्होंने उसकी हर जगह तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लग पाया था।
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सिविल चौकी पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने से किया मना
परिजनों ने बताया कि यासीन के लापता होने की शिकायत लेकर वे सिविल अस्पताल में बनी पुलिस चौकी में गए थे। आरोप है कि पुलिस ने उनकी रिपोर्ट दर्ज करने से साफ मना कर दिया और उसे अपने स्तर पर तलाश करने की सलाह दी। परिजनों ने बताया कि पोस्टमार्टम हाउस व सिविल चौकी पास पास में है। जब पोस्टमार्टम हाउस में शव आया होगा तो पुलिस को भी पता चला होगा, लेकिन पुलिस व अस्पताल प्रशासन दोनों ने इस मामले में लापरवाही बरती है।
यमुनानगर की बजाय जगाधरी शहर पुलिस को दी सूचना
तीन दिन से शव की सूचना पुलिस को न देने पर रविवार को भी अस्पताल प्रशासन लापरवाह बना रहा। मृतक व्यक्ति शहर यमुनानगर क्षेत्र के शहीद भगत सिंह चौक के नजदीक से मिला था, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इसकी सूचना यमुनानगर पुलिस को देने की बजाए थाना शहर जगाधरी पुलिस को दी। तीन दिन से शव पड़ा होने पर वह सड़ चुका था। अब डॉक्टर सोमवार को शव को पोस्टमार्टम करने की बात कह रहे हैं।
15 सितंबर को दोपहर के समय फव्वारा चौक से सूचना आई थी कि किसी व्यक्ति की तबीयत जहरीला पदार्थ निगलने से बिगड़ गई। एंबुलेंस के माध्यम से उसे ट्रामा सेंटर में लाया गया, यहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। डाक्टरों ने शिनाख्त न होने के कारण शव को शवगृह में रखवा दिया था। इसकी सूचना पुलिस को दी गई थी या नहीं इसकी जांच की जा रही है। मामले की जांच कर रहे है। जांच में यदि किसी कर्मी की लापरवाहीं पाई गई तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डा. कुलदीप, सिविल सर्जन, यमुनानगर अस्पताल।