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Yamuna Nagar News: नहीं खुला चांदपुर अंडरपास, ग्रिल फांदकर सड़क पार कर रहे लोग
Fri, 06 Mar 2026 01:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 06 Mar 2026 01:43 AM IST
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चांदपुर में बंद पड़ा अंडरपास। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। महाराणा प्रताप चौक (पुराना कमानी चौक) से विश्वकर्मा चौक के बीच पुराने नेशनल हाईवे पर रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के नीचे बंद पड़ा अंडरपास अब भी नहीं खुल सका है। पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन पुनीत मित्तल ने 10 दिन के भीतर अंडरपास को खोलने का दावा किया था। 15 दिन बीत जाने के बाद भी अंडरपास खोलने की दिशा में कोई कार्रवाई होती दिखाई नहीं दे रही है।
अंडरपास बंद होने के कारण लोग मजबूरी में आरओबी के पास से ही सड़क पार करते हैं, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। यहां 2019 से अब तक 35 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। जिला सचिवालय में 20 फरवरी को सड़क सुरक्षा को लेकर बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में डीसी प्रीति ने पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से अंडरपास की स्थिति पर जवाब मांगा था।
इस पर एक्सईएन पुनीत मित्तल ने आश्वासन दिया था कि अंडरपास को 10 दिन के भीतर खोल दिया जाएगा ताकि लोग सुरक्षित तरीके से सड़क पार कर सकें। हालांकि निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद अंडरपास बंद ही पड़ा है। इससे पहले पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने अंडरपास को नए सिरे से बनाने के लिए टेंडर का प्रस्ताव मुख्यालय भेजा था, जिसे फिलहाल होल्ड कर दिया गया है।
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विभाग की ओर से अंडरपास के निर्माण, वहां लगी ग्रिल को 10 फीट ऊंचा करने और अन्य सुरक्षा संकेतक लगाने के लिए करीब एक करोड़ 92 लाख रुपये का एस्टीमेट तैयार किया गया था, लेकिन अभी तक इसे मंजूरी नहीं मिल सकी है। मौके पर लगी लोहे की ग्रिल भी सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त नहीं है। कई जगह से ग्रिल टूट चुकी है और इसकी ऊंचाई भी कम है। ऐसे में लोग आसानी से इसे फांदकर सड़क पार कर लेते हैं।
जैसे ही लोग ग्रिल पार करके सड़क पर पहुंचते हैं, तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने का खतरा बना रहता है। दरअसल रेलवे ओवरब्रिज से नीचे उतरते समय ढलान अधिक होने के कारण वाहन काफी तेज गति से महाराणा प्रताप चौक की ओर आते हैं। इसी वजह से पीडब्ल्यूडी ने आरओबी से करीब 100 मीटर तक सड़क के दोनों ओर लोहे की ग्रिल लगवाई थी, ताकि लोग वहां से सड़क पार न कर सकें। हालांकि यह व्यवस्था भी पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो सकी है।
रेलवे ओवरब्रिज के नीचे पहले अंडरपास था। इसके नीचे से सड़क के दोनों तरफ रहने वाले लोग बिना किसी हादसे के सड़क पार करते थे। परंतु इंडस्ट्रियल एरिया में जाने वाले भारी वाहन भी निकलने लगे थे। इससे रेलवे ओवरब्रिज को भी खतरा होने की आशंका था। इस पर करीब 11 साल पहले अंडरपास के दोनों तरफ दीवार कर इसे बंद कर दिया था। इसके बाद से हादसे होने लगे।
सड़क के दोनों तरफ 50 हजार की आबादी
महाराणा प्रताप चौक से रेलवे ओवरब्रिज के बीच का हिस्सा ब्लैक स्पॉट है। इंडस्ट्रियल एरिया, विजय कॉलोनी से कुलदीप नगर व गांधी नगर की तरफ कॉलोनियों में 50 हजार से ज्यादा लोग रहते हैं। इन कॉलोनियों के लोग इंडस्ट्रियल एरिया, सब्जी मंडी के अलावा पुराना रादौर रोड, नगर निगम कार्यालय व स्टेशन रोड की तरफ जाने के लिए सड़क को पार करते हैं। इस सड़क से शहर के अलावा कुरुक्षेत्र, पानीपत, करनाल, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की तरफ से भी वाहनों का आना जाना है।
वर्जन:
रेलवे ओवरब्रिज के नीचे अंडरपास के एस्टीमेट को सप्ताहभर में मंजूरी मिलने की उम्मीद है। जल्द ही ट्रैफिक एसएचओ के साथ मौके का मुआयना करेंगे ताकि यहां हादसे कम करने के लिए जरूरी कार्य करवाए जा सकें। -पुनीत मित्तल, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी।
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यमुनानगर। महाराणा प्रताप चौक (पुराना कमानी चौक) से विश्वकर्मा चौक के बीच पुराने नेशनल हाईवे पर रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के नीचे बंद पड़ा अंडरपास अब भी नहीं खुल सका है। पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन पुनीत मित्तल ने 10 दिन के भीतर अंडरपास को खोलने का दावा किया था। 15 दिन बीत जाने के बाद भी अंडरपास खोलने की दिशा में कोई कार्रवाई होती दिखाई नहीं दे रही है।
अंडरपास बंद होने के कारण लोग मजबूरी में आरओबी के पास से ही सड़क पार करते हैं, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। यहां 2019 से अब तक 35 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। जिला सचिवालय में 20 फरवरी को सड़क सुरक्षा को लेकर बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में डीसी प्रीति ने पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से अंडरपास की स्थिति पर जवाब मांगा था।
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इस पर एक्सईएन पुनीत मित्तल ने आश्वासन दिया था कि अंडरपास को 10 दिन के भीतर खोल दिया जाएगा ताकि लोग सुरक्षित तरीके से सड़क पार कर सकें। हालांकि निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद अंडरपास बंद ही पड़ा है। इससे पहले पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने अंडरपास को नए सिरे से बनाने के लिए टेंडर का प्रस्ताव मुख्यालय भेजा था, जिसे फिलहाल होल्ड कर दिया गया है।
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विभाग की ओर से अंडरपास के निर्माण, वहां लगी ग्रिल को 10 फीट ऊंचा करने और अन्य सुरक्षा संकेतक लगाने के लिए करीब एक करोड़ 92 लाख रुपये का एस्टीमेट तैयार किया गया था, लेकिन अभी तक इसे मंजूरी नहीं मिल सकी है। मौके पर लगी लोहे की ग्रिल भी सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त नहीं है। कई जगह से ग्रिल टूट चुकी है और इसकी ऊंचाई भी कम है। ऐसे में लोग आसानी से इसे फांदकर सड़क पार कर लेते हैं।
जैसे ही लोग ग्रिल पार करके सड़क पर पहुंचते हैं, तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने का खतरा बना रहता है। दरअसल रेलवे ओवरब्रिज से नीचे उतरते समय ढलान अधिक होने के कारण वाहन काफी तेज गति से महाराणा प्रताप चौक की ओर आते हैं। इसी वजह से पीडब्ल्यूडी ने आरओबी से करीब 100 मीटर तक सड़क के दोनों ओर लोहे की ग्रिल लगवाई थी, ताकि लोग वहां से सड़क पार न कर सकें। हालांकि यह व्यवस्था भी पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो सकी है।
रेलवे ओवरब्रिज के नीचे पहले अंडरपास था। इसके नीचे से सड़क के दोनों तरफ रहने वाले लोग बिना किसी हादसे के सड़क पार करते थे। परंतु इंडस्ट्रियल एरिया में जाने वाले भारी वाहन भी निकलने लगे थे। इससे रेलवे ओवरब्रिज को भी खतरा होने की आशंका था। इस पर करीब 11 साल पहले अंडरपास के दोनों तरफ दीवार कर इसे बंद कर दिया था। इसके बाद से हादसे होने लगे।
सड़क के दोनों तरफ 50 हजार की आबादी
महाराणा प्रताप चौक से रेलवे ओवरब्रिज के बीच का हिस्सा ब्लैक स्पॉट है। इंडस्ट्रियल एरिया, विजय कॉलोनी से कुलदीप नगर व गांधी नगर की तरफ कॉलोनियों में 50 हजार से ज्यादा लोग रहते हैं। इन कॉलोनियों के लोग इंडस्ट्रियल एरिया, सब्जी मंडी के अलावा पुराना रादौर रोड, नगर निगम कार्यालय व स्टेशन रोड की तरफ जाने के लिए सड़क को पार करते हैं। इस सड़क से शहर के अलावा कुरुक्षेत्र, पानीपत, करनाल, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की तरफ से भी वाहनों का आना जाना है।
वर्जन:
रेलवे ओवरब्रिज के नीचे अंडरपास के एस्टीमेट को सप्ताहभर में मंजूरी मिलने की उम्मीद है। जल्द ही ट्रैफिक एसएचओ के साथ मौके का मुआयना करेंगे ताकि यहां हादसे कम करने के लिए जरूरी कार्य करवाए जा सकें। -पुनीत मित्तल, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी।

चांदपुर में बंद पड़ा अंडरपास। संवाद