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मालिकाना हक पाने को तरस रहे 495 दुकानदार, काट रहे निगम के चक्कर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 13 May 2022 01:21 AM IST
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495 shopkeepers yearning to get ownership, are cutting the circle of the corporation
495 shopkeepers yearning to get ownership, are cutting the circle of the corporation - फोटो : Yamuna Nagar
राजेश कुमार
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यमुनानगर। नगर निगम की दुकानों में काम कर रहे दुकानदारों को अब तक मालिकाना हक नहीं मिल सका है। दुकानदार मालिकाना हक के लिए निगम कार्यालय में चक्कर काट रहे हैं। एक साल में नगर निगम केवल 143 दुकानदारों को ही कलेक्टर रेट के हिसाब से दुकान की कीमत जमा कराने का डिमांड नोटिस भेज सका है। वहीं, मीरा बाजार की एसोसिएशन के प्रधान प्रेम सागर शर्मा का कहना है कि बाजार के दुकानदारों को डिमांड नोटिस भेजना तो दूर, अब तक अधिकारी यह नहीं बता रहे हैं कि उनकी फाइल किस स्टेज पर है। जब भी उनके पास जाते हैं तो हर बार गोलमोल जवाब देकर उन्हें वापस भेज देते हैं।
सरकार के जिस पोर्टल पर दुकानदारों ने ऑनलाइन आवेदन किया था वह एक बार फिर से बंद हो गया है। ऐसे में पोर्टल पर इससे संबंधित कोई भी जानकारी अपडेट नहीं मिल रही। जिस कारण अधिकारियों ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए हैं।
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गत वर्ष शुरू हुई थी स्वामित्व योजना
जो दुकानदार शहरी क्षेत्र में कई सालों से निगम की दुकानों में किरायेदार बनकर बैठे हैं उनके लिए प्रदेश सरकार ने जून 2021 में मुख्यमंत्री शहरी निकाय स्वामित्व योजना शुरू की थी। जो दुकानदार इसके दायरे में आते हैं उन्होंने सितंबर माह में पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण शुरू किया था। तब 495 आवेदन आए थे। करीब 1548 ऐसे किरायेदारों की पहचान हुई थी जो नगर निगम की दुकानों पर 20 साल या इससे ज्यादा समय से किरायेदार हैं। मीरा बाजार के भी 55 दुकानदारों ने आवेदन कर रखा है। मीरा बाजार के अलावा जगाधरी वर्कशाप रोड, रेलवे रोड, शिवाजी मार्केट, रामपुरा, इंदिरा मार्केट, जवाहर मार्केट, यमुनानगर अनाज मंडी, सब्जी मंडी, कन्हैया साहिब चौक के नजदीक निगम की दुकानें हैं।
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दस्तावेज पूरे नहीं कर पाए काफी दुकानदार
जगाधरी-यमुनानगर के 274 दुकानदार ऐसे हैं जो दस्तावेज पूरे नहीं कर पाए। पंजीकरण के लिए परिवार पहचान पत्र जरूरी था जबकि ऐसे दुकानदार भी हैं जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। आवेदन के साथ अधिकार को प्रमाणित करने के लिए निगम द्वारा जारी आवंटन पत्र, संपत्ति स्थानांतरण पत्र, वास्तविक आवंटी या उप किराएदारी का समझौता पत्र, संबंधित संपत्ति को प्रमाणित करने वाला निगम का रिकॉर्ड, किराए की रसीद, बिजली या पानी कनेक्शन की प्रतिलिपि, संबंधित संपत्ति का सेल टैक्स, वेट, जीएसटी में से एक का संबंधित रजिस्ट्रेशन नंबर, परिवार पहचान पत्र, आयकर रिटर्न प्रतिलिपि मांगी गई थी। काफी लोगों ने सालों पुरानी किराये की रसीदें भी संभाल कर नहीं थी।
इनको मिलना है मालिकाना हक
दुकानों पर मालिकाना हक उसे मिलेगा जो कम से कम 20 साल से प्रॉपर्टी पर काबिज हैं। 31 दिसंबर 2020 को 20 साल पूरे होने की अवधि मानी गई है। जो व्यक्ति 50 साल से ऐसी प्रॉपर्टी पर काबिज है, उसे रजिस्ट्री कराते समय कलेक्टर रेट पर 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। 40 साल से काबिज व्यक्ति को 40 फीसदी, 30 साल से काबिज लोगों को 30 फीसदी और 20 साल से काबिज व्यक्तियों को 20 फीसदी छूट कलेक्टर रेट में मिलेगी। यदि कोई व्यक्ति 100 साल से काबिज है, उसे भी अधिकतम 50 फीसदी की छूट मिलेगी।

पोर्टल बंद पड़ा है : अशोक कुमार
नगर निगम के डीएमसी अशोक कुमार का कहना है स्वामित्व योजना के तहत मालिकाना हक देने का काम चल रहा है। फिलहाल पोर्टल बंद हो गया है। 143 दुकानदारों को कलेक्टर रेट जमा कराने के लिए डिमांड नोटिस भेज रखा है।
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