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ढाई माह बाद भी टेढी खीर बना है जीएसटी, बिलिंग को लेकर उलझन में पड़े व्यापारी
Updated Tue, 19 Sep 2017 01:16 AM IST
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ढाई माह बाद भी टेढ़ी खीर बना है जीएसटी समझना, बिलिंग को लेकर उलझन में व्यापारी
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। एक जुलाई को लागू होने के ढाई माह बाद भी जीएसटी व्यापारियों और ग्राहकों के लिए टेढ़ी खीर बना है। सबसे ज्यादा दिक्कत व्यापारियों को बिलिंग में आ रही है। टैक्स रेशियो में आए बदलाव के चलते अधिकांश को अभी भी किस वस्तु और सेवा पर कितने प्रतिशत जीएसटी लग रही है, स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। इसके अलावा बढ़ी कागजी कार्रवाई के बीच बड़े व्यापारी उलझन में है। बिलिंग समेत हर माह रिटर्न भरने को लेकर व्यापारियों को मोटी रकम खर्च कर सीए व अकाउंटेंट की मदद लेनी पड़ रही है।
हरियाणा प्रदेश व्यापार निगम के प्रदेश अध्यक्ष भीमसेन गर्ग ने कहा कि जीएसटी व्यापारियों और जनहित में अच्छा साबित होता, अगर इसे स्टेप बाई स्टेप लागू किया जाता। चूंकि देश में इसके लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। अभी इसमें कई विसंगतियां हैं, जैसे रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं पर जीएसटी अधिक है, जबकि लग्जरी वस्तुओं पर कम है। जीएसटी में कागजी कार्रवाई बहुत अधिक है। नया सिस्टम होने के कारण गलतियां होना लाजमी है, इसलिए सरकार को कुछ समय तक कड़े नियमों में कुछ ढील देनी चाहिए।
कारोबारी निपुण गर्ग ने कहा कि अधिकांश व्यापारियों के पास जीएसटी नंबर नहीं है, ऐसे में उनके साथ व्यापार करने में परेशानी आ रही है। इसके अलावा जीएसटी लागू होने पर कई वस्तुओं पर लगने वाले टैक्स के रेशियो में काफी उतार-चढ़ाव हो गया है। किस वस्तु पर कितना जीएसटी लग रहा है, अभी यह किसी को स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। सरकार को जीएसटी के बारे में ग्राहक और व्यापारी को जागरूक किए जाने की जरूरत है।
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द जगाधरी मैटल मैन्यूफैक्चरर्स एंड सप्लायर्स एसोसिएशन के महासचिव सुंदरलाल बतरा ने बताया कि अधिकांश व्यापारियों के अप्लाई करने पर भी जीएसटी नंबर नहीं मिला है। इससे उनकी सेल बंद होने से कारोबार ठप है। व्यापारियों को सीए और अकाउंटेंट की मदद से हर माह रिटर्न भरवानी पड़ रही है, जिस पर काफी खर्च आता है। इसके अलावा एक व्यापारी दूसरे को सामान बेचता है, उनकी रिटर्न अगर एक प्रतिशत भी मैच न हुई तो दोनों की रिटर्न वापस हो रही है। इन हालात में मेटल कारोबारी माहभर कागजी कार्रवाई को पूरा करने की दिक्कतों में उलझे हैं और काम ठप होने लगा है।
उद्योग व्यापार मंडल हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र कुमार मित्तल का कहना है कि जीएसटी व्यापारी को ही नहीं, बल्कि अकाउंटेंट, सीए और संबंधित अफसरों के भी समझ में नहीं आ रहा है। ऐसे में बिलिंग और हर माह रिटर्न भरने को लेकर व्यापारी काम छोड़ भटकने को मजबूर हैं। सरकार की ओर से जीएसटी के सरलीकरण करने के बजाए रोज इसमें नया नियम तय कर दिया जाता है। इससे व्यापारी वर्ग असमंजस की स्थिति में है और कारोबार लगभग ठप होने की कगार पर है।
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। एक जुलाई को लागू होने के ढाई माह बाद भी जीएसटी व्यापारियों और ग्राहकों के लिए टेढ़ी खीर बना है। सबसे ज्यादा दिक्कत व्यापारियों को बिलिंग में आ रही है। टैक्स रेशियो में आए बदलाव के चलते अधिकांश को अभी भी किस वस्तु और सेवा पर कितने प्रतिशत जीएसटी लग रही है, स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। इसके अलावा बढ़ी कागजी कार्रवाई के बीच बड़े व्यापारी उलझन में है। बिलिंग समेत हर माह रिटर्न भरने को लेकर व्यापारियों को मोटी रकम खर्च कर सीए व अकाउंटेंट की मदद लेनी पड़ रही है।
हरियाणा प्रदेश व्यापार निगम के प्रदेश अध्यक्ष भीमसेन गर्ग ने कहा कि जीएसटी व्यापारियों और जनहित में अच्छा साबित होता, अगर इसे स्टेप बाई स्टेप लागू किया जाता। चूंकि देश में इसके लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। अभी इसमें कई विसंगतियां हैं, जैसे रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं पर जीएसटी अधिक है, जबकि लग्जरी वस्तुओं पर कम है। जीएसटी में कागजी कार्रवाई बहुत अधिक है। नया सिस्टम होने के कारण गलतियां होना लाजमी है, इसलिए सरकार को कुछ समय तक कड़े नियमों में कुछ ढील देनी चाहिए।
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कारोबारी निपुण गर्ग ने कहा कि अधिकांश व्यापारियों के पास जीएसटी नंबर नहीं है, ऐसे में उनके साथ व्यापार करने में परेशानी आ रही है। इसके अलावा जीएसटी लागू होने पर कई वस्तुओं पर लगने वाले टैक्स के रेशियो में काफी उतार-चढ़ाव हो गया है। किस वस्तु पर कितना जीएसटी लग रहा है, अभी यह किसी को स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। सरकार को जीएसटी के बारे में ग्राहक और व्यापारी को जागरूक किए जाने की जरूरत है।
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द जगाधरी मैटल मैन्यूफैक्चरर्स एंड सप्लायर्स एसोसिएशन के महासचिव सुंदरलाल बतरा ने बताया कि अधिकांश व्यापारियों के अप्लाई करने पर भी जीएसटी नंबर नहीं मिला है। इससे उनकी सेल बंद होने से कारोबार ठप है। व्यापारियों को सीए और अकाउंटेंट की मदद से हर माह रिटर्न भरवानी पड़ रही है, जिस पर काफी खर्च आता है। इसके अलावा एक व्यापारी दूसरे को सामान बेचता है, उनकी रिटर्न अगर एक प्रतिशत भी मैच न हुई तो दोनों की रिटर्न वापस हो रही है। इन हालात में मेटल कारोबारी माहभर कागजी कार्रवाई को पूरा करने की दिक्कतों में उलझे हैं और काम ठप होने लगा है।
उद्योग व्यापार मंडल हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र कुमार मित्तल का कहना है कि जीएसटी व्यापारी को ही नहीं, बल्कि अकाउंटेंट, सीए और संबंधित अफसरों के भी समझ में नहीं आ रहा है। ऐसे में बिलिंग और हर माह रिटर्न भरने को लेकर व्यापारी काम छोड़ भटकने को मजबूर हैं। सरकार की ओर से जीएसटी के सरलीकरण करने के बजाए रोज इसमें नया नियम तय कर दिया जाता है। इससे व्यापारी वर्ग असमंजस की स्थिति में है और कारोबार लगभग ठप होने की कगार पर है।