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अब जीएसटी के कड़े प्रावधानों से व्यापारियों में दहशत
Updated Sun, 02 Jul 2017 12:49 AM IST
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हर तरफ जीएसटी की चर्चा, समझने की माथापच्ची कर रहे व्यापारी
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। जीएसटी ने व्यापारियों का चैन छीन लिया है। चौक-चौराहों पर बस जीएसटी की ही चर्चा है। हर तरफ इसके असर का ही गुणा-भाग लगाया जा रहा है। उसे समझने की जुगत की जा रही है। हाल यह है कि, डिस्ट्रीब्यूटर्स ने आज बिलिंग तक नहीं की। होल सेल मार्केट का कामकाज तकरीबन ठप रहा। अमर उजाला ने जीएसटी को लेकर व्यापारियों की राय जानने की कोशिश की तो अलग-अलग राय सामने आई। ज्यादातर लोग इसे अपनाने के दौरान गलतियों पर सख्ती न किए जाने की मांग उठाई।
हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के जिला प्रधान राजेश सेठ ने कहा कि जीएसटी देश और व्यापारी के हित में है। जब वैट आया था तो व्यापारी को इसे समझने में काफी वक्त लग गया था। जीएसटी को लेकर यदि किसी व्यापारी से कोई गलती हो जाती है तो सख्ती न की जाए।
द जगाधरी मेटल मैन्यूफैक्चरर्स एंड सप्लायर्स एसोसिएशन के महासचिव सुंदरलाल बतरा का कहना है कि जीएसटी में कागजी कार्रवाई बहुत अधिक है। नया सिस्टम होने के कारण गलतियां होना लाजिमी है। सरकार को कुछ समय तक कड़े नियमों में कुछ ढील देनी चाहिए।
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बर्तन विक्रेता भारतभूषण बजाज का कहना है कि सरकार सही दिशा में चल रही है। पहले कई टैक्स देेने पड़ते थे, अब एक टैक्स लगेगा। लेकिन जीएसटी को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। व्यापारी को इसे समझने में टाइम लगेगा। कुछ आइटम पर टैक्स काफी अधिक है। टैक्स कम होगा तो रेवेन्यू अधिक आएगा।
बर्तन निर्माता राकेश गुलाटी का कहना है कि बर्तनों पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगाया गया है, जो कि बहुत अधिक है। पहले बर्तनों पर पांच प्रतिशत टैक्स था। सरकार ने एक टैक्स कर दिया है। इससे बर्तन निर्माता खुश हैं। अब व्यापारी का शोषण नहीं होना चाहिए। पंजाब के बैरियर में घंटों माल रोका जाता है। इस पर अंकुश लगना चाहिए।
उद्योग व्यापार मंडल हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र कुमार मित्तल का कहना है कि जीएसटी लागू होने से राष्ट्र का विकास होगा। लेकिन जीएसटी में बहुत जटिलताएं हैैं। आनलाइन बिलिंग में व्यापारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि इंटरनेट की उपलब्धता सभी जगह नहीं है। जहां है वहां स्पीड कम है। सभी व्यापारियों के पास कंप्यूटर भी नहीं हैं। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। जीएसटी ने व्यापारियों का चैन छीन लिया है। चौक-चौराहों पर बस जीएसटी की ही चर्चा है। हर तरफ इसके असर का ही गुणा-भाग लगाया जा रहा है। उसे समझने की जुगत की जा रही है। हाल यह है कि, डिस्ट्रीब्यूटर्स ने आज बिलिंग तक नहीं की। होल सेल मार्केट का कामकाज तकरीबन ठप रहा। अमर उजाला ने जीएसटी को लेकर व्यापारियों की राय जानने की कोशिश की तो अलग-अलग राय सामने आई। ज्यादातर लोग इसे अपनाने के दौरान गलतियों पर सख्ती न किए जाने की मांग उठाई।
हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के जिला प्रधान राजेश सेठ ने कहा कि जीएसटी देश और व्यापारी के हित में है। जब वैट आया था तो व्यापारी को इसे समझने में काफी वक्त लग गया था। जीएसटी को लेकर यदि किसी व्यापारी से कोई गलती हो जाती है तो सख्ती न की जाए।
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द जगाधरी मेटल मैन्यूफैक्चरर्स एंड सप्लायर्स एसोसिएशन के महासचिव सुंदरलाल बतरा का कहना है कि जीएसटी में कागजी कार्रवाई बहुत अधिक है। नया सिस्टम होने के कारण गलतियां होना लाजिमी है। सरकार को कुछ समय तक कड़े नियमों में कुछ ढील देनी चाहिए।
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बर्तन विक्रेता भारतभूषण बजाज का कहना है कि सरकार सही दिशा में चल रही है। पहले कई टैक्स देेने पड़ते थे, अब एक टैक्स लगेगा। लेकिन जीएसटी को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। व्यापारी को इसे समझने में टाइम लगेगा। कुछ आइटम पर टैक्स काफी अधिक है। टैक्स कम होगा तो रेवेन्यू अधिक आएगा।
बर्तन निर्माता राकेश गुलाटी का कहना है कि बर्तनों पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगाया गया है, जो कि बहुत अधिक है। पहले बर्तनों पर पांच प्रतिशत टैक्स था। सरकार ने एक टैक्स कर दिया है। इससे बर्तन निर्माता खुश हैं। अब व्यापारी का शोषण नहीं होना चाहिए। पंजाब के बैरियर में घंटों माल रोका जाता है। इस पर अंकुश लगना चाहिए।
उद्योग व्यापार मंडल हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र कुमार मित्तल का कहना है कि जीएसटी लागू होने से राष्ट्र का विकास होगा। लेकिन जीएसटी में बहुत जटिलताएं हैैं। आनलाइन बिलिंग में व्यापारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि इंटरनेट की उपलब्धता सभी जगह नहीं है। जहां है वहां स्पीड कम है। सभी व्यापारियों के पास कंप्यूटर भी नहीं हैं। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।