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गोहाना, सोनीपत, खरखौदा व गन्नौर क्षेत्र में फसलों में जलभराव
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गांव छिछड़ाना में पानी में डूबी फसल की कटाई करते किसान। संवाद
- फोटो : Sonipat
जिले में रिकॉर्ड बारिश से खेतों में हुए जलभराव से धरतीपुत्रों के अरमान जमींदोज हो गए हैं। इससे खरीफ की फसलों में नुकसान के साथ ही रबी की फसलों की समय पर बिजाई का संकट गहरा गया है। इससे किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। खेतों में जलभराव से धान की फसल खराब होने की आशंका बढ़ गई है। इसके चलते कई किसान तो पानी से भरे खेतों से धान की कटाई करवाने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं बारिश के बाद नमी अधिक होने से मंडियों में धान के बेहतर भाव भी नहीं मिल रहे।
जिले में मानसून के दौरान इस बार सामान्य से कहीं अधिक बारिश हुई। जिले में 90 हजार एकड़ भूमि पर धान व करीब 15 हजार एकड़ में कपास की फसल लगाई गई थी। मानसून सीजन में अधिक बारिश होने से कपास, बाजरा व धान की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। पानी निकासी की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण सोनीपत के महलाना, बड़वासनी, ककरोई, भदाना, रोहट, फतेहपुर, कंवाली, हरासाना, बैंयापुर, लहराड़ा और गोहाना के गांव छिछड़ाना, रिंढाना, बनवासा, कथूरा, रुखी, मदीना, बरोदा, भैंसवान, खानपुर, गन्नौर के गांव गुमड़, राई के बारोटा, छतेहरा, माजरा, लाडपुर सहित दर्जनों गांवों के खेतों में पानी भरा हुआ है। ऐसे में कई गांवों में मजबूर किसान जलभराव के बीच धान की कटाई करवा रहे हैं, जिसका असर उत्पादन पर भी पड़ रहा है।
धान की फसल में 10 से 50 फीसदी तक नुकसान
कृषि विशेषज्ञों की माने तो धान की फसल में 10 से 50 फीसदी तक नुकसान हुआ है। इसमें कुछ खेतों में यह आंकड़ा 75 फीसदी तक भी है। जहां धान की फसल अब पानी में डूब गई है वहां स्थिति ज्यादा बदतर है। इसके साथ ही अन्य फसल में भी 10 से 25 फीसदी तक नुकसान हुआ है। जिले में अब तक 19 हजार 800 हेक्टेयर धान की फसल में नुकसान की आशंका है। जिसकी विशेष गिरदावरी के आदेश आ चुके हैं, जिसके बाद सटीक आकलन हो सकेगा।
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बारिश से 94 सौ एकड़ में कपास की फसल प्रभावित
मानसून की बारिश से कपास उत्पादक किसानों को नुकसान झेलना पड़ा है। कृषि विभाग द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार जिले में करीब 94 सौ एकड़ कपास की फसल प्रभावित हुई है। यही नहीं इसमें से 1690 एकड़ में किसानों को 76 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक का नुकसान हुआ है।
नमी के चलते भाव में आई कमी
खेत में खड़े धान के साथ ही मंडी में पहुंचे धान में भी किसान को नुकसान हो रहा है। किसानों को सोनीपत मंडी में धान की किस्म 1509 के भाव कम मिल रहे हैं। पहले जहां 3200 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव मिला, बारिश के बाद अब 2800 रुपये प्रति क्विंटल तक मिला है।
यह बोले किसान
बारिश से इस बार फसल में काफी नुकसान हुआ है। खेतों में अभी भी पानी भरा है, जिसमें फसल डूबी हुई है। इस बार 50 फीसदी तक कम उत्पादन होगा।
- अनिल कुमार, रोहट
धान की फसल की कटाई कर उसे मंडी में लेकर गया था, जहां पर धान का रेट पहले से अब चार हजार रुपये तक कम मिल रहा है। खेत में पानी भरा है। इससे गेहूं की बिजाई भी समय पर नहीं हो सकेगी।
- यशदेव, रोहट
पहले ही कपास में काफी नुकसान हो गया। अब बारिश से धान के खेत में भी पानी भर गया है। इस बार किसानों पर लगातार मौसम की मार पड़ रही है, जिससे किसानों की हालत बिगड़ी हुई है।
- राकेश, बैंयापुर
इस बार धान की रोपाई के बाद अच्छी बारिश से रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन इस समय हुई बारिश से भारी नुकसान हुआ है। खेतों में पानी भरने से धान की फसल खराब होने लगी है। साथ ही इसका भाव भी बेहतर नहीं मिल सकेगा।
- जसबीर, बैंयापुर
वर्जन
मानसून के दौरान रिकॉर्ड बारिश हुई है, जिससे खेतों में जलभराव हो गया है। वहां ज्यादा नुकसान हुआ है। किसानों के खेतों से पानी की निकासी कराई जा रही है। अभी फिलहाल रबी की फसल की बिजाई का समय बचा हुआ है। इससे बिजाई पर अभी संकट नहीं है। मौसम खुलने से राहत मिली है।
- डॉ. अनिल सहरावत, उप निदेशक, कृषि विभाग, सोनीपत
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जिले में मानसून के दौरान इस बार सामान्य से कहीं अधिक बारिश हुई। जिले में 90 हजार एकड़ भूमि पर धान व करीब 15 हजार एकड़ में कपास की फसल लगाई गई थी। मानसून सीजन में अधिक बारिश होने से कपास, बाजरा व धान की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। पानी निकासी की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण सोनीपत के महलाना, बड़वासनी, ककरोई, भदाना, रोहट, फतेहपुर, कंवाली, हरासाना, बैंयापुर, लहराड़ा और गोहाना के गांव छिछड़ाना, रिंढाना, बनवासा, कथूरा, रुखी, मदीना, बरोदा, भैंसवान, खानपुर, गन्नौर के गांव गुमड़, राई के बारोटा, छतेहरा, माजरा, लाडपुर सहित दर्जनों गांवों के खेतों में पानी भरा हुआ है। ऐसे में कई गांवों में मजबूर किसान जलभराव के बीच धान की कटाई करवा रहे हैं, जिसका असर उत्पादन पर भी पड़ रहा है।
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धान की फसल में 10 से 50 फीसदी तक नुकसान
कृषि विशेषज्ञों की माने तो धान की फसल में 10 से 50 फीसदी तक नुकसान हुआ है। इसमें कुछ खेतों में यह आंकड़ा 75 फीसदी तक भी है। जहां धान की फसल अब पानी में डूब गई है वहां स्थिति ज्यादा बदतर है। इसके साथ ही अन्य फसल में भी 10 से 25 फीसदी तक नुकसान हुआ है। जिले में अब तक 19 हजार 800 हेक्टेयर धान की फसल में नुकसान की आशंका है। जिसकी विशेष गिरदावरी के आदेश आ चुके हैं, जिसके बाद सटीक आकलन हो सकेगा।
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बारिश से 94 सौ एकड़ में कपास की फसल प्रभावित
मानसून की बारिश से कपास उत्पादक किसानों को नुकसान झेलना पड़ा है। कृषि विभाग द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार जिले में करीब 94 सौ एकड़ कपास की फसल प्रभावित हुई है। यही नहीं इसमें से 1690 एकड़ में किसानों को 76 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक का नुकसान हुआ है।
नमी के चलते भाव में आई कमी
खेत में खड़े धान के साथ ही मंडी में पहुंचे धान में भी किसान को नुकसान हो रहा है। किसानों को सोनीपत मंडी में धान की किस्म 1509 के भाव कम मिल रहे हैं। पहले जहां 3200 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव मिला, बारिश के बाद अब 2800 रुपये प्रति क्विंटल तक मिला है।
यह बोले किसान
बारिश से इस बार फसल में काफी नुकसान हुआ है। खेतों में अभी भी पानी भरा है, जिसमें फसल डूबी हुई है। इस बार 50 फीसदी तक कम उत्पादन होगा।
- अनिल कुमार, रोहट
धान की फसल की कटाई कर उसे मंडी में लेकर गया था, जहां पर धान का रेट पहले से अब चार हजार रुपये तक कम मिल रहा है। खेत में पानी भरा है। इससे गेहूं की बिजाई भी समय पर नहीं हो सकेगी।
- यशदेव, रोहट
पहले ही कपास में काफी नुकसान हो गया। अब बारिश से धान के खेत में भी पानी भर गया है। इस बार किसानों पर लगातार मौसम की मार पड़ रही है, जिससे किसानों की हालत बिगड़ी हुई है।
- राकेश, बैंयापुर
इस बार धान की रोपाई के बाद अच्छी बारिश से रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन इस समय हुई बारिश से भारी नुकसान हुआ है। खेतों में पानी भरने से धान की फसल खराब होने लगी है। साथ ही इसका भाव भी बेहतर नहीं मिल सकेगा।
- जसबीर, बैंयापुर
वर्जन
मानसून के दौरान रिकॉर्ड बारिश हुई है, जिससे खेतों में जलभराव हो गया है। वहां ज्यादा नुकसान हुआ है। किसानों के खेतों से पानी की निकासी कराई जा रही है। अभी फिलहाल रबी की फसल की बिजाई का समय बचा हुआ है। इससे बिजाई पर अभी संकट नहीं है। मौसम खुलने से राहत मिली है।
- डॉ. अनिल सहरावत, उप निदेशक, कृषि विभाग, सोनीपत

गांव रोहट में खेत के अंदर पानी में डूबीं बालियों को उठाता किसान। संवाद- फोटो : Sonipat