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एनएच-44 पर अंडरपास या कट नहीं देने पर बिफरे कुराड़ के ग्रामीण, शुरू किया धरना
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गांव कुराड़ के पास हाईवे पर रास्ते की मांग को लेकर धरना देते ग्रामीण। संवाद
- फोटो : Sonipat
नेशनल हाईवे (एनएच)-44 पर गांव कुराड़ के सामने अंडरपास या कट नहीं देने से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। ग्रामीणों के विरोध के बावजूद गांव के सामने रेलिंग लगाए जाने से गुस्साए ग्रामीणों ने रविवार को हाईवे किनारे टेंट लगाकर धरना शुरू कर दिया गया है। उनका आरोप है कि अब वह वाहन लेकर सीधे एनएच-44 पर नहीं जा सकेंगे। उन्हें करीब एक किलोमीटर संपर्क मार्ग पर चलकर हाईवे पर जाना होगा। इसको लेकर वह पहले रोष जता चुके हैं। सुनवाई न होने पर अब ग्रामीणों ने धरना शुरू कर दिया है। उनका आरोप है कि ढाबा मालिकों से मिलीभगत कर ड्राइंग से छेड़छाड़ कर कट एक किलोमीटर दूर बनाया गया है।
एनएच-44 के चौड़ीकरण के साथ ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की तरफ से नेशनल हाईवे के दोनों तरफ रेलिंग लगाई जा रही है। एनएच-44 के पास स्थित गांव कुराड़ के सामने भी रेलिंग लगा दी गई है। ग्रामीणों ने करीब दो माह पहले इसका विरोध भी किया था, लेकिन एनएचएआई ने उनकी नहीं सुनी थी। इस पर बिफरे लोगों ने रोष जताते हुए काम बंद करा दिया था। गांव के निवर्तमान सरपंच बिजेंद्र के नेतृत्व में पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन व एनएचएआई पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया था। उसके बाद भी रेलिंग लगाने से अब रविवार को ग्रामीणों ने धरना शुरू कर दिया है।
बोले - ढाबों के सामने रेलिंग में कट दिया तो गांव के सामने क्यों नहीं
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रेलिंग लगाने के बाद उन्हें दोनों तरफ एक किलोमीटर तक संपर्क मार्ग पर चलकर हाईवे पर जाना होगा, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ेगी। अकसर संपर्क मार्ग बदहाल रहने से इससे आवागमन में दिक्कत आएगी। ग्रामीणों का कहना है कि ढाबा संचालकों से मिलीभगत कर एनएचएआई ने ढाबों के सामने रेलिंग में कट दे दिया है, लेकिन गांव के सामने ऐसा नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों ने दावा किया कि उनके गांव के सामने अंडरपास की मंजूरी दी गई थी, लेकिन फिर भी एनएचएआई ने ड्राइंग में फेरबदल कर दिया। जब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं होगा, वह धरना जारी रखेंगे।
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ढाबों मालिकों से मिलीभगत कर बंद किया रास्ता
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि छह हजार की आबादी वाले गांव के सामने रेलिंग लगाई गई है, जबकि हाईवे पर स्थित ढाबों के सामने से रेलिंग हटाकर रास्ता दिया गया है। लोगों ने आरोप लगाया कि एनएचएआई की तरफ से मिलीभगत कर ढाबों के बजाय गांव के सामने रेलिंग लगाई गई।
न अंडरपास मिला और न फुट ओवरब्रिज
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्होंने एनएच-44 के चौड़ीकरण का काम शुरू होने के दौरान तत्कालीन डीसी के सामने मांग रखी थी कि गांव के सामने अंडरपास बनाया जाए या फुट ओवरब्रिज की सुविधा दी जाए। जिससे पैदल राहगीरों को परेशानी न हो सके। तब उन्होंने अंडरपास या फुट ओवरब्रिज की सुविधा देने की बात कही थी, लेकिन एनएचएआई की तरफ से कोई सुविधा नहीं मिल सकी है।
गांव के सामने रेलिंग लगाई गई गई है। ग्रामीणों ने पहले भी विरोध किया था और रेलिंग नहीं लगाने की मांग की थी, लेकिन एनएचएआई ने उनकी सुनवाई नहीं की। वह सीएम मनोहर लाल से लेकर सांसद रमेश कौशिक तक के सामने गुहार लगा चुके हैं। सुनवाई नहीं होते देख अब ग्रामीणों ने आंदोलन करने का निर्णय लिया है। जब तक गांवों के सामने आने-जाने का रास्ता नहीं मिलेगा, तब तक ग्रामीण धरने पर बैठे रहेंगे।
- बिजेंद्र, निवर्तमान सरपंच, गांव कुराड़
ग्रामीणों की तरफ से रेलिंग पर आपत्ति जताई गई थी, लेकिन एनएचएआई की तरफ से पूरे एनएच-44 पर रेलिंग लगाने का निर्णय लिया है। कई जगह आने-जाने को रास्ता दिया गया है, लेकिन हर गांव के सामने यह संभव नहीं है। फिर भी ग्रामीणों की समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
- आनंद दहिया, डीजीएम, एनएचएआई
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एनएच-44 के चौड़ीकरण के साथ ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की तरफ से नेशनल हाईवे के दोनों तरफ रेलिंग लगाई जा रही है। एनएच-44 के पास स्थित गांव कुराड़ के सामने भी रेलिंग लगा दी गई है। ग्रामीणों ने करीब दो माह पहले इसका विरोध भी किया था, लेकिन एनएचएआई ने उनकी नहीं सुनी थी। इस पर बिफरे लोगों ने रोष जताते हुए काम बंद करा दिया था। गांव के निवर्तमान सरपंच बिजेंद्र के नेतृत्व में पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन व एनएचएआई पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया था। उसके बाद भी रेलिंग लगाने से अब रविवार को ग्रामीणों ने धरना शुरू कर दिया है।
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बोले - ढाबों के सामने रेलिंग में कट दिया तो गांव के सामने क्यों नहीं
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रेलिंग लगाने के बाद उन्हें दोनों तरफ एक किलोमीटर तक संपर्क मार्ग पर चलकर हाईवे पर जाना होगा, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ेगी। अकसर संपर्क मार्ग बदहाल रहने से इससे आवागमन में दिक्कत आएगी। ग्रामीणों का कहना है कि ढाबा संचालकों से मिलीभगत कर एनएचएआई ने ढाबों के सामने रेलिंग में कट दे दिया है, लेकिन गांव के सामने ऐसा नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों ने दावा किया कि उनके गांव के सामने अंडरपास की मंजूरी दी गई थी, लेकिन फिर भी एनएचएआई ने ड्राइंग में फेरबदल कर दिया। जब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं होगा, वह धरना जारी रखेंगे।
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ढाबों मालिकों से मिलीभगत कर बंद किया रास्ता
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि छह हजार की आबादी वाले गांव के सामने रेलिंग लगाई गई है, जबकि हाईवे पर स्थित ढाबों के सामने से रेलिंग हटाकर रास्ता दिया गया है। लोगों ने आरोप लगाया कि एनएचएआई की तरफ से मिलीभगत कर ढाबों के बजाय गांव के सामने रेलिंग लगाई गई।
न अंडरपास मिला और न फुट ओवरब्रिज
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्होंने एनएच-44 के चौड़ीकरण का काम शुरू होने के दौरान तत्कालीन डीसी के सामने मांग रखी थी कि गांव के सामने अंडरपास बनाया जाए या फुट ओवरब्रिज की सुविधा दी जाए। जिससे पैदल राहगीरों को परेशानी न हो सके। तब उन्होंने अंडरपास या फुट ओवरब्रिज की सुविधा देने की बात कही थी, लेकिन एनएचएआई की तरफ से कोई सुविधा नहीं मिल सकी है।
गांव के सामने रेलिंग लगाई गई गई है। ग्रामीणों ने पहले भी विरोध किया था और रेलिंग नहीं लगाने की मांग की थी, लेकिन एनएचएआई ने उनकी सुनवाई नहीं की। वह सीएम मनोहर लाल से लेकर सांसद रमेश कौशिक तक के सामने गुहार लगा चुके हैं। सुनवाई नहीं होते देख अब ग्रामीणों ने आंदोलन करने का निर्णय लिया है। जब तक गांवों के सामने आने-जाने का रास्ता नहीं मिलेगा, तब तक ग्रामीण धरने पर बैठे रहेंगे।
- बिजेंद्र, निवर्तमान सरपंच, गांव कुराड़
ग्रामीणों की तरफ से रेलिंग पर आपत्ति जताई गई थी, लेकिन एनएचएआई की तरफ से पूरे एनएच-44 पर रेलिंग लगाने का निर्णय लिया है। कई जगह आने-जाने को रास्ता दिया गया है, लेकिन हर गांव के सामने यह संभव नहीं है। फिर भी ग्रामीणों की समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
- आनंद दहिया, डीजीएम, एनएचएआई