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Sonipat News: दो साल ड्राइंग में लगे, बड़ौता कॉलेज की भवन विस्तार की 5 करोड़ की ग्रांट लैप्स
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गोहाना। बड़ौता स्थित राजकीय कॉलेज में विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या के चलते कक्षाएं और लैब कम पड़ने लगी हैं। भवन विस्तार के लिए केंद्र सरकार ने मार्च 2024 में पीएम-उषा ग्रांट के तहत 5 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। वहीं कॉलेज प्रशासन का कहना है कि भवन की ड्राइंग समय पर नहीं मिलने के कारण ग्रांट लैप्स हो गई। भवन की कमी के चलते कॉलेज में नए कोर्स और विज्ञान संकाय शुरू करने की योजना भी आगे नहीं बढ़ पा रही है।
पीडब्ल्यूडी ने कॉलेज भवन का निर्माण वर्ष 2013 में शुरू किया था और 2017 में कार्य पूरा हुआ। भवन निर्माण पर करीब 11 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। कॉलेज शुरू होने के बाद सीटों और कोर्सों की संख्या बढ़ी, जिससे विद्यार्थियों की संख्या में भी इजाफा हुआ। वर्तमान में कॉलेज में कला और वाणिज्य संकाय संचालित हैं। विज्ञान संकाय शुरू करने और नए कोर्स शुरू करने के लिए अतिरिक्त भवन की जरूरत है।
कॉलेज प्रशासन ने भवन विस्तार का प्रस्ताव तैयार कर मुख्यालय भेजा था, जिसे मंजूरी मिलने के बाद केंद्र सरकार से ग्रांट जारी हुई। ग्रांट मिलने पर कॉलेज प्रशासन ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से प्रथम तल के निर्माण के लिए ड्राइंग तैयार कराने को पत्र लिखा। कॉलेज के अनुसार ड्राइंग चीफ आर्किटेक्ट कार्यालय से तैयार होनी थी, लेकिन इसे मिलने में दो साल से अधिक समय लग गया। इसी दौरान योजना के तहत मिली ग्रांट लैप्स हो गई।
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पुराने भवन में भी कई काम अधूरे
कॉलेज प्रशासन के अनुसार मौजूदा भवन भी स्वीकृत ड्राइंग के अनुरूप पूरा नहीं हुआ है। सर्विस रोड, पार्किंग शेड, जनरेटर शेड, दीवारों पर पेंट, छत की टाइलों की भराई और चारदीवारी पर कांटेदार तार लगाने का काम अधूरा है। निर्माण एजेंसी ने ड्राइंग की अनदेखी कर कैंटीन और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार नहीं किए। इन कमियों के चलते कॉलेज प्रशासन ने भवन को अब तक टेकओवर नहीं किया है।
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कॉलेज के भवन का विस्तार करने के लिए केंद्र सरकार से मिली ग्रांट लैप्स हो गई। इसका कारण चीफ आर्किटेक्ट से समय पर ड्राइंग का नहीं मिलना है। दोबारा ग्रांट के लिए उच्चतर शिक्षा विभाग को पत्र लिखा है।
डॉ. अनिल कुमार, प्राचार्य, राजकीय कॉलेज बड़ौता
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पीडब्ल्यूडी ने कॉलेज भवन का निर्माण वर्ष 2013 में शुरू किया था और 2017 में कार्य पूरा हुआ। भवन निर्माण पर करीब 11 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। कॉलेज शुरू होने के बाद सीटों और कोर्सों की संख्या बढ़ी, जिससे विद्यार्थियों की संख्या में भी इजाफा हुआ। वर्तमान में कॉलेज में कला और वाणिज्य संकाय संचालित हैं। विज्ञान संकाय शुरू करने और नए कोर्स शुरू करने के लिए अतिरिक्त भवन की जरूरत है।
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कॉलेज प्रशासन ने भवन विस्तार का प्रस्ताव तैयार कर मुख्यालय भेजा था, जिसे मंजूरी मिलने के बाद केंद्र सरकार से ग्रांट जारी हुई। ग्रांट मिलने पर कॉलेज प्रशासन ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से प्रथम तल के निर्माण के लिए ड्राइंग तैयार कराने को पत्र लिखा। कॉलेज के अनुसार ड्राइंग चीफ आर्किटेक्ट कार्यालय से तैयार होनी थी, लेकिन इसे मिलने में दो साल से अधिक समय लग गया। इसी दौरान योजना के तहत मिली ग्रांट लैप्स हो गई।
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पुराने भवन में भी कई काम अधूरे
कॉलेज प्रशासन के अनुसार मौजूदा भवन भी स्वीकृत ड्राइंग के अनुरूप पूरा नहीं हुआ है। सर्विस रोड, पार्किंग शेड, जनरेटर शेड, दीवारों पर पेंट, छत की टाइलों की भराई और चारदीवारी पर कांटेदार तार लगाने का काम अधूरा है। निर्माण एजेंसी ने ड्राइंग की अनदेखी कर कैंटीन और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार नहीं किए। इन कमियों के चलते कॉलेज प्रशासन ने भवन को अब तक टेकओवर नहीं किया है।
कॉलेज के भवन का विस्तार करने के लिए केंद्र सरकार से मिली ग्रांट लैप्स हो गई। इसका कारण चीफ आर्किटेक्ट से समय पर ड्राइंग का नहीं मिलना है। दोबारा ग्रांट के लिए उच्चतर शिक्षा विभाग को पत्र लिखा है।
डॉ. अनिल कुमार, प्राचार्य, राजकीय कॉलेज बड़ौता