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Sonipat News: निचली अदालत के फैसले का बरकरार रखते हुए अपील की खारिज
Sun, 26 Apr 2026 02:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 26 Apr 2026 02:10 AM IST
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सोनीपत। दो घरों के बीच बनी एक दीवार के मामले में जिला न्यायाधीश जगजीत सिंह ने निचली अदालत के फैसले को सही मानते हुए अपीलकर्ता मोनू की याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही अपीलकर्ता को अपील की फीस वहन करने का आदेश दिया है।
अपीलकर्ता गांव जगसी, तहसील गोहाना निवासी मोनू ने पड़ोसी मेहर सिंह, सोनू व अनूप पर आरोप लगाया कि उनके घरों के बीच एक 14 इंच की साझा दीवार है और तीनों प्रतिवादी इस साझा दीवार को गिराने की कोशिश कर रहे थे। दूसरी ओर प्रतिवादियों का तर्क था कि यह दीवार साझा नहीं है बल्कि निजी दीवार है और अपीलकर्ता मोनू का इस पर कोई अधिकार नहीं है।
शुरुआत में गोहाना की अतिरिक्त सिविल जज खुशबू गोयल ने 24 नवंबर 2023 को मोनू के दावे को खारिज कर दिया था। इसी फैसले के खिलाफ मोनू ने जिला अदालत में अपील दायर की थी। दाेनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अपील दायर करने में हई 61 दिनों की देरी के संबंध में अपीलकर्ता को ग्रामीण और अनपढ़ मानते हुए न्याय के हित में इस देरी को माफ कर दिया।
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मोनू की मां ने भी स्वीकार किया कि दीवार प्रतिवादियों की है। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि जब माेनू और उसके अपने ही गवाह यह मान रहे हैं कि दीवार प्रतिवादियों की है तो साझा दीवार का दावा टिक नहीं सकता। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया और मोनू की अपील को खारिज कर दिया।
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अपीलकर्ता गांव जगसी, तहसील गोहाना निवासी मोनू ने पड़ोसी मेहर सिंह, सोनू व अनूप पर आरोप लगाया कि उनके घरों के बीच एक 14 इंच की साझा दीवार है और तीनों प्रतिवादी इस साझा दीवार को गिराने की कोशिश कर रहे थे। दूसरी ओर प्रतिवादियों का तर्क था कि यह दीवार साझा नहीं है बल्कि निजी दीवार है और अपीलकर्ता मोनू का इस पर कोई अधिकार नहीं है।
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शुरुआत में गोहाना की अतिरिक्त सिविल जज खुशबू गोयल ने 24 नवंबर 2023 को मोनू के दावे को खारिज कर दिया था। इसी फैसले के खिलाफ मोनू ने जिला अदालत में अपील दायर की थी। दाेनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अपील दायर करने में हई 61 दिनों की देरी के संबंध में अपीलकर्ता को ग्रामीण और अनपढ़ मानते हुए न्याय के हित में इस देरी को माफ कर दिया।
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मोनू की मां ने भी स्वीकार किया कि दीवार प्रतिवादियों की है। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि जब माेनू और उसके अपने ही गवाह यह मान रहे हैं कि दीवार प्रतिवादियों की है तो साझा दीवार का दावा टिक नहीं सकता। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया और मोनू की अपील को खारिज कर दिया।