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सोनीपत: 48 साल से पर्यावरण संरक्षण की अलख जगाने के साथ पक्षियों को आशियाना दे रहे सुरेश

Mon, 30 May 2022 01:03 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा) Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Mon, 30 May 2022 01:03 AM IST
सार

सुरेश बताते हैं कि सुबह जागने के बाद अकसर लोग मंदिर जाते हैं या व्यायाम करते हैं, लेकिन वह पक्षियों और पशुओं की सेवा में लग जाते हैं। अगर थोड़ा समय बचता है, तो इसे वे पर्यावरण संरक्षण में लगा देते हैं।

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Suresh, who has been giving shelter to the birds with the awakening of environmental protection for 48 years
अपनी दुकान की छत पर पक्षियों के लिए बनाए गए घोंसले को दिखाते सुरेश कुमार। संवाद - फोटो : Sonipat

विस्तार

इंसान को भगवान ने सोचने-समझने की शक्ति दी है, लेकिन जानवरों को नहीं। हमारा फर्ज बनता है कि ऐसे बेजुबानों की तकलीफ को समझें और उनके लिए खाने-पीने की व्यवस्था करें। 20 साल की उम्र में मां सरबती देवी से मिली सीख सुरेश कुमार उर्फ नीम का पेड़ के दिलोदिमाग में ऐसी बैठी कि फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। बंदरों को रोटी-पानी देने से शुरू हुआ यह सिलसिला अब अन्य जानवरों व पक्षियों के लिए अगाध प्रेम का सबब बन गया है। 48 साल से लगातार पर्यावरण संरक्षण की अलख जगाने के साथ ही पक्षियों को आशियाना दे उनके लिए दाना-पानी की व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं। इसके लिए दूसरों को भी प्रेरित करते हैं।

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मूलरूप से हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव मुरथल फिलहाल सेक्टर-14 निवासी सुरेश कुमार बताते हैं कि 1974 में स्नातक करने के साथ ही पर्यावरण व बेजुबानों के प्रति ऐसा लगाव जागृत हुआ कि मुरथल के बीहड़ में पक्षियों के लिए पौधे लगाने शुरू कर दिए। कुछ समय बाद मेहनत रंग लाई और जहां बीहड़ होता था वहां पौधे लहलहाने लगे। धीरे-धीरे यह जगह बाग का रूप ले लिया। यहां फलदार पौधे लगाए। पक्षियों का कलरव आनंद देता था।

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सुरेश बताते हैं कि सुबह जागने के बाद अकसर लोग मंदिर जाते हैं या व्यायाम करते हैं, लेकिन वह पक्षियों और पशुओं की सेवा में लग जाते हैं। अगर थोड़ा समय बचता है, तो इसे वे पर्यावरण संरक्षण में लगा देते हैं। सुरेश अब तक नीम, बड़, पीपल, बेलगिरी, जामुन, अमरूद के करीब 3 हजार पौधे लगा चुके हैं।

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यही नहीं पौधे खरीदकर लोगों को भी वितरित करते हैं, ताकि चारों तरफ हरियाली नजर आ सके। पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए कार्यों व बेजुबानों के प्रति प्रेम को देखते हुए सुरेश कुमार को इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर जिलास्तरीय समारोह में सम्मानित भी किया गया।

 

घर और दुकान पर बनाया पक्षियों के लिए आशियाना
सेक्टर-14 निवासी सुरेश कुमार हैंडलूम एवं कारपेट के कारोबारी हैं। वह अपने कारोबार को जितना जरूरी मानते हैं, उससे कहीं अधिक सामाजिक सरोकार को अहमियत देते हैं। यह सब वह बिना आडंबर और प्रचार के नि:स्वार्थ भावना से करते हैं। पक्षियों के प्रति उनके अगाध प्रेम का ही नतीजा है कि उन्होंने अपने घर व दुकान पर भी पक्षियों के लिए आशियाना बनाया हुआ है। या यूं कहें कि मिनी चिड़िया घर बनाया है तो अतिशयोक्ति नहीं होगा। घर पर जगह नहीं बची तो शहर के शमशान घाट व खाली पड़ी जमीन पर पौधे लगाने व पक्षियों के लिए घोंसले बना डाले। इसके लिए वह खुद प्लास्टिक, मिट्टी, सीमेंट, लकड़ी व घास-फूस के घोंसले तैयार करते हैं और जगह-जगह लगाते हैं। इन घोंसलों में पक्षी आकर निवास करते हैं। सुरेश कुमार बताते हैं कि घोंसलों में जब पक्षी अंडे देते हैं तो उन्हें देखकर मुझे बच्चों सी खुशी होती है। लगता है जैसे मैंने एक मुकाम पा लिया हो।
 

कड़वा बोलता हूं, इसलिए नीम का पेड़ उपनाम रखा
सुरेश बताते हैं कि हर मुद्दे पर मैं कड़वा बोलता हूं, इसलिए पहले ही नाम के साथ नीम का पेड़ जोड़ लिया, ताकि किसी को कोई परेशानी न हो। नाम से ही समझ लें कि सही बोलेगा, क्योंकि सही अपने आप में कड़वा ही होता है। सुरेश सामाजिक कुरीतियों को लेकर भी काम करते हैं। देहदान, नेत्रदान और रक्तदान जैसे नेक कर्मों के लिए लोगों को प्रेरित करना उनका शगल है। सुरेश कहते हैं कि कारोबार के चलते रोजाना सैकड़ों लोगों से मिलना होता है, इस दौरान वे कोशिश करते हैं कि इन कार्यों के प्रति लोगों को प्रेरित करें।
 

श्मशान में लाए हरियाली, बरकरार रखने को दे रहे वेतन
सुरेश कुमार बताते हैं कि उन्होंने कुमासपुर की नंदीशाला, ताजपुर रोड गोशाला, मुरथल श्मशान घाट, कामी रोड, मुक्तिधाम तूड़ा मंडी में भी पौधे लगाए हैं। इनमें ताजपुर गोशाला, कामी रोड गोशाला व तूड़ा मंडी मुक्तिधाम में पौधे लगाकर हरियाली को बरकरार रखने के लिए तीनों जगह माली रखे हुए हैं। जो पौधों को पानी देने के साथ ही उनका रख-रखाव भी करते हैं। इन मालिकों को अपनी जेब से वेतन देते हैं। सुरेश कहते हैं कि ऐसा कर वे किसी पर कोई उपकार नहीं करते। मेरी मर्जी थी मैंने किया। हां, इतना जरूर मानता हूं कि दूसरे भी करेंगे, तो थोड़ा प्रकृति का संरक्षण हो जाएगा। बचपन में माता-पिता से जो सीखा, अब मैं इसे करता हूं। यह बस किसी दिखाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी आत्मिक शांति के लिए करता हूं।
 

प्रकृति की सुंदरता को कायम रखना हमारा कर्तव्य
सुरेश कुमार कहते हैं कि प्रकृति बेहद सुंदर हैं, इंसान भी इसी का हिस्सा है। हम भले ही कुछ भी करें, लेकिन सभी को कुछ समय प्रकृति के लिए भी निकालना चाहिए। जब प्रकृति ने हमें इतना कुछ दिया है तो क्यों न हम भी उसे बदले में कुछ दें। ईश्वर ने मुझे इतना कुछ दिया है तो मंदिर में दान-पुण्य करने से अच्छा है कि इन बेजुबानों के लिए कुछ सार्थक करूं। हमेशा इसी प्रयास में लगा रहता हूं। जब परिवार के साथ बंदरों को खाना खिलाने जाता हूं तो बंदर घेर लेते हैं, उनके बीच में बैठकर उन्हें खाना खिलाता हूं। पक्षियों के लिए खुलवाना चाहते थे खाता, नहीं मिली सफलता


 

सुरेश कुमार कहते हैं कि अपने पाले पक्षियों के लिए वह बैंक में खाता खुलवाना चाहते थे, ताकि मेरी मौत के बाद बैंक में जमा पैसे पक्षियों के काम आएं। पक्षियों के लिए खाने की कमी न हो, लेकिन बैंक अधिकारियों ने खाता यह कहते हुए खोलने से इनकार कर दिया कि आपके बाद पैसा किसको देंगे। वह पैसा पक्षियों पर ही खर्च होगा, इसका भी पता नहीं। जिसके बाद खाता नहीं खुला। सुरेश बताते हैं कि परिवार में उनकी पत्नी निर्मला देवी व बेटा रामगोपाल व बहू हैं। सभी पक्षियों को दाना डालते हैं। सुरेश कुमार उर्फ नीम का पेड़ युवाओं को संदेश देते हैं कि बिजली, पानी कंजूसी से खर्चों, जूठा भोजन कभी न छोड़ा। नशा नई नस्ल का नाश। वे युवाओं को नशे से दूर करने के लिए प्रेरित करते हैं।

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