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Sonipat: कोरोना से आठ बच्चों ने खोये माता-पिता, समय पर नहीं मिल रही सहायता राशि
Tue, 18 Oct 2022 12:58 AM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Tue, 18 Oct 2022 12:58 AM IST
सार
सेना की तरफ से दो बच्चों का खर्च उठाया जा रहा है। दो परिवारों के तीन बच्चों को प्रधानमंत्री बाल सेवा योजना में शामिल किया गया है। एक परिवार के तीन अन्य बच्चों को योजना में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
कोरोना महामारी में सोनीपत जिले में चार परिवारों के आठ बच्चे ऐसे थे, जिनके सिर से माता-पिता का साया उठ गया था। इन बच्चों में से केवल तीन को ही प्रधानमंत्री बाल सेवा योजना में शामिल किया गया है। लेकिन उन्हें समय पर सरकार की तरफ से दी जाने वाली सहायता राशि का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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दो बच्चों के पिता सेना में थे। इन बच्चों को सेना की तरफ से आर्थिक सहायता दी जा रही है। जबकि एक परिवार के तीन बच्चों को प्रधानमंत्री बाल सेवा योजना में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है। पात्र बच्चों को अब तक केवल एक बार ही पेंशन का लाभ मिला है। हालांकि यह पेंशन एक साल की इकट्ठी दी गई थी।
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वैश्विक महामारी कोरोना में जिले में 277 लोगों की मौत हुई थी। जिसमें कई परिवार उजड़ गए थे। इनमें 241 बच्चे ऐसे थे जिनके माता या पिता को कोरोना ने छीन लिया था। जबकि 4 परिवार ऐसे थे जिनमें बच्चों के सिर से माता-पिता दोनों का साया उठ गया था। माता-पिता के जाने के बाद बच्चों के सुनहरे भविष्य के सपने धूमिल होने के साथ ही भरण-पोषण का भी संकट छा गया था।
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ऐसे परिवारों व बच्चों को सरकार की तरफ से मिलने वाली सहायता राशि से ही उम्मीद बंधी हुई है, लेकिन यह राशि भी समय पर न मिलने से इन बच्चों को परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। जिला संरक्षण अधिकारी की मानें तो तीन बच्चों के लिए पूरे साल का जो बजट आया था, उसे जारी कर दिया गया था। अब वर्ष 2023 का बजट जारी किया गया है, उसे भी सभी औपचारिकताएं पूरी करते ही बच्चों के खातों में डलवा दिया जाएगा।
एक बच्चा यूथ होम तो दो दादा-दादी के पास रह रहे
अधिकारियों की मानें तो प्रधानमंत्री बाल सेवा योजना में तीन बच्चों को शामिल किया गया है। इनमें एक बच्चा शहर में स्थित एसओएस यूथ होम में रह रहा है और 8वीं कक्षा में पढ़ता है। इस बच्चे को सरकार की तरफ से प्रति माह 1500 रुपये पेंशन के रूप में देना निर्धारित है। इस बच्चे के रहने व खाने व अन्य सुविधाएं यूथ होम की तरफ से की जाती है। जबकि दो बच्चे माता-पिता की मौत के बाद अपने दादा-दादी के साथ रह रहे हैं। इन बच्चों को 3500 रुपये प्रतिमाह पेंशन के रूप देने की योजना है। ये दोनों भाई राजकीय स्कूल में पढ़ते हैं। इनमें एक सातवीं कक्षा तो दूसरा पांचवीं कक्षा में शिक्षा ले रहा है।
तीन मदों में दिया जाता है पैसा
अधिकारियों का कहना है कि सरकार की तरफ से दी जाने वाली आर्थिक सहायता तीन मदों में दी जाती है। इसमें केंद्र सरकार की तरफ से प्रति माह एक हजार रुपये, राज्य सरकार की तरफ से दो हजार रुपये और प्रायोजक की तरफ से प्रति माह 500 रुपये दिए जाते हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री बाल सेवा योजना के तहत मार्च माह में एक साल तक की सहायता राशि 42 हजार रुपये बच्चों के खातों में जारी कर दी गई थी। वर्ष 2023 तक की सहायता राशि के लिए बजट आ गया है। इसे भी सभी औपचारिकताएं पूरी कर जल्द बच्चों के खातों में भेज दिया जाएगा।
तीन और बच्चे प्रधानमंत्री बाल सेवा योजना में किए शामिल
अधिकारियों ने कहा कि जुलाई में एक परिवार के तीन बच्चों का पंजीकरण प्रधानमंत्री बाल सेवा योजना के तहत हुआ है। अभी ये तीनों बहनें अपने परिवार के साथ रह रही हैं। इन बच्चों की रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेजी जाएगी। उसके बाद ही इनकी पेंशन शुरू होगी। प्रयास रहेगा कि जल्द से जल्द पेंशन शुरू करा दी जाए।
कोरोना काल में जिले में आठ बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया था। हालांकि जून-2021 तक केवल पांच बच्चे ही प्रधानमंत्री बाल सेवा योजना में शामिल किए गए थे। इनमें से दो बच्चों के पिता सेना में थे, उन बच्चों का खर्च सेना वहन कर रही है। तीन बच्चों की पेंशन शुरू कर दी गई थी। बच्चों के खातों में एक साल तक की निर्धारित राशि भेज दी गई थी। आगामी वर्ष के लिए बजट आ गया है। औपचारिकताएं पूरी कर बच्चों के खातों में भेज दिया जाएगा। इस वर्ष जुलाई माह में तीन बच्चों का और पंजीकरण हुआ है। इनकी रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेजी जाएगी। उसके बाद इन बच्चों के लिए भी सहायता राशि इनके खाते में आनी शुरू हो जाएगी। - ममता शर्मा, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, सोनीपत