किसानों की पांच सदस्यीय कमेटी: सरकार से बातचीत के लिए अलग-अलग राज्यों के पांच किसान नेता चुने, जानिए इनका संक्षिप्त परिचय
तीन कृषि कानूनों के विरोध व अन्य मांगों को लेकर शुरू हुए किसान आंदोलन में सरकार से अब तक 40 सदस्यीय कमेटी ने बातचीत की थी, लेकिन कृषि कानून वापस होने के बाद एसकेएम ने शनिवार को पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। इसमें सभी किसान नेता अलग-अलग राज्यों के रहने वाले हैं।
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तीन कृषि कानूनों की वापसी के बाद अन्य मांगों को पूरा कराने के लिए दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसान वापस नहीं जाएंगे। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने एलान किया है कि एमएसपी की गारंटी के लिए सार्थक प्रयास और किसानों पर दर्ज मुकदमे वापसी समेत अन्य मांगों पर सहमति के बाद ही आंदोलन वापस लेने पर विचार किया जाएगा।
एसकेएम ने शनिवार को एक अहम बैठक की। बैठक में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी से ही सरकार किसी भी मुद्दे पर बातचीत कर सकेगी। साथ ही गठित की गई कमेटी ही यह फैसला लेगी कि किस राज्य सरकार से कौन सा किसान नेता बातचीत करेगा। आइए जानते हैं कौन हैं वो किसान नेता जिनको एसकेएम ने सरकार से बातचीत के लिए चुना है।
- बलबीर सिंह राजेवाल
बलबीर सिंह राजेवाल भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक नेताओं में से एक हैं। बलबीर सिंह पंजाब के खन्ना के राजेवाल गांव से हैं। भारतीय किसान यूनियन का संविधान भी बलबीर सिंह राजेवाल ने ही लिखा था। उनके संगठन का प्रभाव क्षेत्र लुधियाना के आसपास का मध्य पंजाब है। वह किसानों के थिंक टैंक माने जाते हैं। बलबीर सिंह राजेवाल स्थानीय मालवा कॉलेज की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भी हैं।
- डॉ. अशोक धवले
महाराष्ट्र के रहने वाले डॉ. अशोक धवले अखिल भारतीय किसान सभा, महाराष्ट्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष है। वह लंबे समय से किसान आंदोलनों से जुड़े रहे हैं।
- शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का
शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के गांव मछेरा खुर्द के रहने वाले हैं। जबलपुर विश्वविद्यालय से लॉ ग्रेजुएट और एमए राजनीति शास्त्र की शिक्षा प्राप्त कक्का छात्र राजनीति में शरद यादव के साथ जुड़े रहे। राष्ट्रीय किसान महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक कक्का ने अपने जीवन में शोषण, झूठ और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष किया। मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का जी का एक ही नारा है, खुशहाली के दो आयाम, ऋण मुक्ति और पूरा दाम।
- गुरनाम सिंह चढूनी
कुरुक्षेत्र के गांव चढूनी के रहने वाले गुरनाम सिंह चढूनी भारतीय किसान यूनियन (चढूनी गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। किसान आंदोलन से गुरनाम सिंह चढूनी को खासी पहचान मिली है। वह लंबे समय से किसानों की लड़ाई लड़ते रहे हैं।
- युद्धवीर सिंह
मूलरूप से दिल्ली के महिपालपुर के रहने वाले युद्धवीर सिंह किसान आंदोलन की अहम आवाज बने हुए हैं। वह लंबे अर्से से किसानों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने पीएम रहे चौधरी चरण सिंह के अलावा दिग्गज किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के साथ भी काम किया है। वह जाट महासभा के महासचिव हैं। मौजूदा समय में वह राकेश टिकैत के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं।