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यूक्रेन में संकट: भारतीय छात्रा ने बताया- एक समय मिल रहा खाना, अभद्र व्यवहार व मारपीट झेल रहे

Tue, 01 Mar 2022 09:04 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, गन्नौर, सोनीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, गन्नौर, सोनीपत (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Tue, 01 Mar 2022 09:04 PM IST
सार

गन्नौर के गांव गुमड़ निवासी लक्षिता ने फोन पर परिजनों को यूक्रेन के हालात बताए। लक्षिता रूस सीमा से महज 2 घंटे की दूरी पर यूक्रेन में फंसी है। दूसरे रास्ते से आने के लिए 1500 किलोमीटर तय करना पड़ेगा।

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Russia-Ukraine War The student from Sonipat of Haryana told the situation in Ukraine
लक्षिता। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

यूक्रेन के सुमी शहर में फंसी हरियाणा के सोनीपत जिले के गुमड़ गांव की 21 वर्षीय लक्षिता ने परिजनों से बात करते हुए रोजाना बिगड़ रहे हालात की दास्तां बयां की। लक्षिता ने बताया कि वह इस समय बहुत बुरी स्थिति का सामना कर रही है। यहां मुश्किल से एक समय का खाना मिल रहा है और हर समय प्राणों पर संकट बना हुआ है। यहां से कब निकल सकेंगे, इस बारे में कुछ पता नहीं है। यहां भय के साये में ही पल-पल काटने के लिए मजबूर हैं। यूक्रेन में युद्ध के बीच फंसी अपनी लाडली की सुरक्षा को लेकर परिजन चिंतित हैं। 

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लक्षिता के पिता तेज सिंह ने बताया कि उसकी बेटी 2019 में एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए सुमी यूनिवर्सिटी गई थी। वह तीसरे सेमेस्टर में है और यूनिवर्सिटी के बने फ्लैट में रहती है। लॉकडाउन के कारण वह तीन महीने घर रही और सितंबर में वापस यूक्रेन गई थी। यूक्रेन पर हमला होने के बाद से वह लगातार अपने परिजनों के संपर्क में है।
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लक्षिता ने बताया कि उनके क्षेत्र में 27 फरवरी तक सब ठीक था, लेकिन 28 फरवरी को आसपास के क्षेत्र में बम धमाकों की आवाज सुनाई दी। जिसके बाद से वे सभी डरे हुए हैं। उन्हें बंकर में जाने के आदेश दिए गए। उनके पास खाने का सामान भी खत्म होने वाला है। सुबह बंकर में जाते हैं और शाम को खाना खाने के लिए अपने फ्लैट में वापस आते हैं।
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सायरन बजते ही 10वीं मंजिल से भागकर बंकर की तरफ आते हैं  
लक्षिता ने बताया कि 23 फरवरी को उसने पैसे निकाले थे। एक व्यक्ति एक बार में सिर्फ 100 डालर ही निकाल सकता है। उसके बाद वहां कर्फ्यू लग गया। जिसके बाद से उन्हें पैसे की दिक्कत हो रही हैै। वे सभी विद्यार्थी आपस में सहयोग कर रहे हैं। जिस वजह से उनका काम चल गया। वह सभी एक समय खाना खाकर काम चला रहे हैं।

किसी भी समय आपातकाल का सायरन बज जाता है और उन्हें 10वीं मंजिल से नीचे उतर कर बंकर में जाना पड़ता है। उनके पास पीने के पानी की सबसे बड़ी समस्या है। सरकार द्वारा उनकी कोई मदद नहीं की जा रही। न ही भारतीय दूतावास द्वारा 27 फरवरी तक उन्हें कोई एडवाइजरी जारी की गई। अब दूतावास द्वारा उन्हें कहा गया है कि वे जहां है वहीं रहें। उनसे संपर्क कर लिया जाएगा।

रूस के रास्ते युवाओं को निकालने का प्रबंध करे सरकार
लक्षिता के पिता तेज सिंह ने बताया कि सुमी शहर से रूस की सीमा महज 2 घंटे की यात्रा की दूरी पर है, लेकिन वहां तक जाने के लिए कोई सुविधा नहीं है। अगर उनकी बेटी पोलैंड व मास्को के रास्ते आती है तो उन्हें 1500 किलोमीटर का सफर तय कर पूरा यूक्रेन पार करना पड़ेगा, जो फिलहाल संभव नहीं है। परिजनों ने सरकार से उनके बच्चों को रूस के रास्ते बुलाने की मांग की है।


विद्यार्थियों के साथ अभद्र व्यवहार, मारपीट
लक्षिता ने बताया कि टैक्सी चालकों द्वारा भारतीय विद्यार्थियों के साथ अभद्र व्यवहार व मारपीट की जा रही है। यही कारण है कि वे यहां से निकलने के लिए टैक्सी किराये पर करने से भी घबरा रहे हैं। भारतीय दूतावास ने अब तक उनसे कोई संपर्क नहीं किया है। इधर लक्षिता की मां शर्मिला का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने सरकार से बेटी को सुरक्षित वापस घर लाने की गुहार लगाई है।

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