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बिजली कटौती : 9 घंटे के कट बने संकट, जेनरेटर से चलाने पर पड़ रहे उद्योग
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बड़ी औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक फैक्टरी में जेनरेटर चलाकर काम करते कर्मचारी। संवाद
- फोटो : Sonipat
बिजली के लंबे कट आम लोगों के साथ ही उद्योगों के लिए भी संकट बन गए हैं। घंटों कट लगने से उद्योगों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। उद्योगों के संचालन पर संकट गहराने लगा है। उद्योगों को चलाने के लिए जेनरेटर की मदद ली जा रही है। इससे खर्च डेढ़ गुना तक बढ़ गया है। बिजली निगम की ओर से औद्योगिक क्षेत्र में 9 घंटे के कट लगाए जा रहे हैं। रात 8 बजे से सुबह 5 बजे तक कट लगने के कारण उद्योगों में उत्पादन पर असर पड़ रहा है। 15 दिन से बिजली संकट होने के बाद औद्योगिक क्षेत्र में बिजली आपूर्ति कम कर दी गई है। गर्मी में तापमान बढ़ने से जिले में रोजाना 90 लाख से ज्यादा यूनिट बिजली की खपत हो रही है। मुरथल, सोनीपत, बड़ी, राई, कुंडली और नाथूपुर-सबौली औद्योगिक क्षेत्रों में छोटी-बड़ी करीब 10 हजार औद्योगिक इकाइयां हैं। इनमें से करीब 50 प्रतिशत में दिन-रात की शिफ्टों में काम चलता है, लेकिन रात में 40 प्रतिशत बिजली कटौती होने से उत्पादन पर असर पड़ रहा है। फैक्टरियों मे जेनरेटर चलाने से प्रदूषण बढ़ने के साथ ही महंगा डीजल प्रयोग कर माल तैयार करने से उद्योगपतियों को नुकसान हो रहा है।
दो साल तक कोरोना की मार झेलने वाले उद्योगों के सामने अब बिजली के कटों ने संकट खड़ा कर दिया है। बिजली की कमी के चलते औद्योगिक क्षेत्र में बिना सूचना के 9 घंटे तक कट लगाए जा रहे हैं। इससे उद्योगों में न केवल उत्पादन प्रभावित हो रहा है, बल्कि उद्योगपतियों पर अतिरिक्त भार भी पड़ रहा है। इसके चलते हजारों मजदूरों और कर्मचारियों के रोजगार पर भी असर पड़ता है। उद्योगपतियों की सरकार से मांग है कि उद्योगों में निरंतर बिजली आपूर्ति की जाए, ताकि उनके उद्योग सुचारु रूप से चल सके।
उद्योगपतियों ने बताया कि उद्योगों में रात 8 बजे से सुबह 5 बजे तक के बिजली कट लगाए जा रहे हैं। जिससे काम प्रभावित हो रहे हैं। वही दिन में बिजली कट लगाने से 15 मिनट पहले सूचना दी जाती है। ऐसे में बिजली कट के दौरान फैक्टरी बंद रहने पर भी श्रमिकों को वेतन देना पड़ता है। अगर उन्हें पहले ही बिजली कट के बारे में जानकारी मिल जाए तो वह श्रमिकों को भुगतान देने से बच सकते हैं।
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औद्योगिक क्षेत्र में बिजली के घोषित व अघोषित कट के कारण उनके व्यापार पर असर पड़ रहा है। जिस कारण उन्हें नुकसान झेलना पड़ रहा है। उनकी सरकार से मांग है कि औद्योगिक क्षेत्र में बिजली आपूर्ति सुचारु की जाए, ताकि उनका व्यापार अच्छे से चल सके।
- अमित गोयल, उद्योगपति बड़ी औद्योगिक क्षेत्र
कोरोना की मार के बाद उद्योग अब सही तरीके से उत्पादन करने लगे थे। अब बिजली के कट लगने से फैक्टरी में काम करने वाले मजदूर खाली बैठे रहते हैं। जिस कारण उनका कामकाज प्रभावित हो रहा है। बिजली आपूर्ति पूरी न होने से जेनरेटर से काम चलाना पड़ता है। इस कारण अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
- विशाल गोयल, उद्योगपति बड़ी औद्योगिक क्षेत्र
रात में लंबे कट लगने के साथ ही दिन में भी घंटों बिजली गुल रहती है। कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में तो बिजली आपूर्ति ठीक नहीं है। महंगे डीजल से जेनरेटर चलाना बहुत खर्चीला है। बिजली नहीं होने के कारण श्रमिकों को खाली बैठाना पड़ रहा है। बिजली कट लगने की सूचना समय पर उद्योगपतियों को भी नहीं जा रही है।
- सुभाष गुप्ता, पदाधिकारी, कुंडली इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
रात में छह घंटे से 9 घंटे तक का कट लग रहा है। बिजली निगम की ओर से बिजली आपूर्ति बंद करने की सूचना भी नहीं दी जाती। पहले कोरोना महामारी व उसके बाद किसान आंदोलन की वजह से उद्योगों पर संकट रहा। अब बिजली किल्लत की वजह से उद्योग बंद होने की कगार पर है। सरकार की ओर से बिजली किल्लत दूर करने के लिए बेहतर कदम नहीं उठाए जा रहे।
- राकेश देवगन, प्रधान, राई इंडस्ट्रीज मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन
वर्जन
बिजली उपलब्धता के आधार पर मुख्यालय के निर्देश अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों में कट लगाए जा रहे हैं। बिजली संकट से जूझ रहे उपभोक्ताओं से भी बिजली बचाने की अपील की जा रही है। रोजाना जिले में 90 लाख से ज्यादा यूनिट बिजली आपूर्ति की जा रही है।
- संदीप जैन, अधीक्षण अभियंता बिजली निगम
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दो साल तक कोरोना की मार झेलने वाले उद्योगों के सामने अब बिजली के कटों ने संकट खड़ा कर दिया है। बिजली की कमी के चलते औद्योगिक क्षेत्र में बिना सूचना के 9 घंटे तक कट लगाए जा रहे हैं। इससे उद्योगों में न केवल उत्पादन प्रभावित हो रहा है, बल्कि उद्योगपतियों पर अतिरिक्त भार भी पड़ रहा है। इसके चलते हजारों मजदूरों और कर्मचारियों के रोजगार पर भी असर पड़ता है। उद्योगपतियों की सरकार से मांग है कि उद्योगों में निरंतर बिजली आपूर्ति की जाए, ताकि उनके उद्योग सुचारु रूप से चल सके।
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उद्योगपतियों ने बताया कि उद्योगों में रात 8 बजे से सुबह 5 बजे तक के बिजली कट लगाए जा रहे हैं। जिससे काम प्रभावित हो रहे हैं। वही दिन में बिजली कट लगाने से 15 मिनट पहले सूचना दी जाती है। ऐसे में बिजली कट के दौरान फैक्टरी बंद रहने पर भी श्रमिकों को वेतन देना पड़ता है। अगर उन्हें पहले ही बिजली कट के बारे में जानकारी मिल जाए तो वह श्रमिकों को भुगतान देने से बच सकते हैं।
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औद्योगिक क्षेत्र में बिजली के घोषित व अघोषित कट के कारण उनके व्यापार पर असर पड़ रहा है। जिस कारण उन्हें नुकसान झेलना पड़ रहा है। उनकी सरकार से मांग है कि औद्योगिक क्षेत्र में बिजली आपूर्ति सुचारु की जाए, ताकि उनका व्यापार अच्छे से चल सके।
- अमित गोयल, उद्योगपति बड़ी औद्योगिक क्षेत्र
कोरोना की मार के बाद उद्योग अब सही तरीके से उत्पादन करने लगे थे। अब बिजली के कट लगने से फैक्टरी में काम करने वाले मजदूर खाली बैठे रहते हैं। जिस कारण उनका कामकाज प्रभावित हो रहा है। बिजली आपूर्ति पूरी न होने से जेनरेटर से काम चलाना पड़ता है। इस कारण अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
- विशाल गोयल, उद्योगपति बड़ी औद्योगिक क्षेत्र
रात में लंबे कट लगने के साथ ही दिन में भी घंटों बिजली गुल रहती है। कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में तो बिजली आपूर्ति ठीक नहीं है। महंगे डीजल से जेनरेटर चलाना बहुत खर्चीला है। बिजली नहीं होने के कारण श्रमिकों को खाली बैठाना पड़ रहा है। बिजली कट लगने की सूचना समय पर उद्योगपतियों को भी नहीं जा रही है।
- सुभाष गुप्ता, पदाधिकारी, कुंडली इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
रात में छह घंटे से 9 घंटे तक का कट लग रहा है। बिजली निगम की ओर से बिजली आपूर्ति बंद करने की सूचना भी नहीं दी जाती। पहले कोरोना महामारी व उसके बाद किसान आंदोलन की वजह से उद्योगों पर संकट रहा। अब बिजली किल्लत की वजह से उद्योग बंद होने की कगार पर है। सरकार की ओर से बिजली किल्लत दूर करने के लिए बेहतर कदम नहीं उठाए जा रहे।
- राकेश देवगन, प्रधान, राई इंडस्ट्रीज मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन
वर्जन
बिजली उपलब्धता के आधार पर मुख्यालय के निर्देश अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों में कट लगाए जा रहे हैं। बिजली संकट से जूझ रहे उपभोक्ताओं से भी बिजली बचाने की अपील की जा रही है। रोजाना जिले में 90 लाख से ज्यादा यूनिट बिजली आपूर्ति की जा रही है।
- संदीप जैन, अधीक्षण अभियंता बिजली निगम