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उद्योगों का बिजली संकट : उद्योगपतियों को फिर मिली नई तारीख, बिजली का इंतजार
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बिजली संकट झेल रहे राई और कुंडली क्षेत्र के उद्योगपतियों के लिए 10 अक्तूबर भी राहत लेकर नहीं आया। गांव दीपालपुर बिजली घर का खराब हुआ ट्रांसफार्मर अभी तक ठीक नहीं हो पाया है। बिजली निगम के अधिकारियों का कहना है कि लगातार बारिश होने के कारण खराब हुए ट्रांसफार्मर के जो पार्ट्स बदलने हैं उनको नहीं बदला जा सका। वह जब तक सूख नहीं जाते तब तक बॉक्स को बंद नहीं किया जा सकता। ऐसे में 17 अक्तूबर तक बिजली सुचारु हो सकेगी।
वहीं उद्योगपतियों का कहना है कि बिजली संकट ने उनके कारोबार को ठप कर दिया है। राई, कुंडली, नाथूपुर के उद्योगों में उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है। त्योहारी सीजन होने के बावजूद वह आवश्यकता के अनुसार मॉल तैयार नहीं कर पा रहे हैं।
दीपालपुर में 100 मेगावाट एंपीयर (एमवीए) का ट्रांसफार्मर 16 अगस्त को खराब हो गया था। उसके बाद से राई व कुंडली स्थित आसपास के औद्योगिक क्षेत्र में चार से पांच घंटे तक के कट लगाए जा रहे हैं। इससे उद्योगों में न केवल उत्पादन प्रभावित हो रहा है, बल्कि उद्योगपतियों पर अतिरिक्त भार भी पड़ रहा है। राई, कुंडली और नाथूपुर-सबौली औद्योगिक क्षेत्रों में छोटी-बड़ी करीब साढ़े तीन हजार औद्योगिक इकाइयां हैं। बिजली कटों से कई फैक्टरियों में जेनरेटर चलाना पड़ता है। जिससे खर्च में वृद्धि हो रही है। करीब एक माह पहले राई औद्योगिक क्षेत्र की सभी एसोसिएशन से संबंधित पदाधिकारियों ने बिजली निगम के अधीक्षण अभियंता संदीप जैन से मिलकर दो टूक कहा था कि जल्द बिजली संकट का समाधान नहीं हुआ तो वे उद्योगों को बंद कर सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे। इस मामले में उन्होंने उद्योगपतियों से 15 दिन की मोहलत मांगते हुए आश्वासन दिया था कि 30 सितंबर तक बिजली संकट को दूर कर दिया जाएगा और दीपालपुर पावर हाउस के खराब ट्रांसफार्मर को ठीक करवा दिया जाएगा। तय समय पर बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी थी। तब बिजली निगम के अधिकारियों ने बारिश का हवाला देते हुए कुछ दिन की और मोहलत मांगी थी। बाद में 10 अक्तूबर तक का समय दिया गया था। सोमवार को वह समय सीमा भी पूरी हो गई। उसके बावजूद बिजली संकट से निजात नहीं मिल सकी। ऐसे में अब 15 अक्तूबर तक बिजली सुचारु करने की बात कही जा रही है।
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उद्योगपति बोले-बिजली निगम की बहानेबाजी से बढ़ी मुसीबत
उद्योगपतियों का आरोप है कि बिजली निगम की बहानेबाजी के कारण उनका लगातार नुकसान हो रहा है। उन्हें भारी चपत लग रही है। उद्योगपति जगदीप धवन, बलबीर सिंह, पुनीत पोद्दार ने बताया कि हर बार नई समय सीमा बता दी जाती है। उसमें भी बहुत थोड़ा समय बताया जाता है। जिसे हर बार बढ़ा दिया जाता है। बार-बार नई तारीख मिलने से उन्हें भी लगने लगा कि निगम अधिकारी उन्हें महज दिलासा दे रहे हैं।
त्योहारी सीजन के चलते उद्योगों में काम बढ़ा है, लेकिन बिजली संकट से माल तैयार नहीं हो पा रहा है। बिजली निगम को उद्योगपतियों की समस्या को देखते हुए तुरंत समाधान करना चाहिए था। उसके विपरीत हर बार नई तारीख दे दी जाती है। पहले कोरोना ने चौपट किया, फिर किसान आंदोलन मुसीबत बना और अब ये बिजली संकट। समझ नहीं आ रहा कि उद्योगों को किस तरह बचाया जाए। उद्योगों को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। उद्योगपति काली दिवाली मनाने को मजबूर हैं। -राकेश देवगन, प्रधान, राई इंडस्ट्रियल एरिया मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन।
बिजली निगम बार-बार नई डेडलाइन जारी कर देता है। उनकी मुसीबत बढ़ती जा रही है। जेनरेटर चलाकर दोगुना खर्च कर माल तैयार किया जा रहा है। त्योहारों में ही माल समय पर नहीं भेजा तो उसकी बिक्री नहीं होगी। इसका असर भी उद्योगों पर ही पड़ेगा। ऐसे में जल्द से जल्द हमारी समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। सुभाष गुप्ता, पदाधिकारी कुंडली औद्योगिक एसोसिएशन
दीपालपुर बिजली निगम के खराब ट्रांसफार्मर को ठीक करने की पहल लगातार जारी है। वडोदरा की कंपनी के कारिंदे ट्रांसफार्मर को ठीक करने में जुटे हैं। बारिश के कारण पुर्जे सूखने में समय लग रहा है। पुर्जे सूखने के बाद बाक्स बंद किए जा सकेंगे। तब तक इंतजार करना होगा। 17 अक्तूबर तक बिजली व्यवस्था को सुचारु कर दी जाएगी। अगर बारिश का व्यवधान नहीं होता तो अब तक सप्लाई सुचारु कर चुके होते। -राजेश्वर प्रसाद, कार्यकारी अभियंता, हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम, सोनीपत।
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वहीं उद्योगपतियों का कहना है कि बिजली संकट ने उनके कारोबार को ठप कर दिया है। राई, कुंडली, नाथूपुर के उद्योगों में उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है। त्योहारी सीजन होने के बावजूद वह आवश्यकता के अनुसार मॉल तैयार नहीं कर पा रहे हैं।
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दीपालपुर में 100 मेगावाट एंपीयर (एमवीए) का ट्रांसफार्मर 16 अगस्त को खराब हो गया था। उसके बाद से राई व कुंडली स्थित आसपास के औद्योगिक क्षेत्र में चार से पांच घंटे तक के कट लगाए जा रहे हैं। इससे उद्योगों में न केवल उत्पादन प्रभावित हो रहा है, बल्कि उद्योगपतियों पर अतिरिक्त भार भी पड़ रहा है। राई, कुंडली और नाथूपुर-सबौली औद्योगिक क्षेत्रों में छोटी-बड़ी करीब साढ़े तीन हजार औद्योगिक इकाइयां हैं। बिजली कटों से कई फैक्टरियों में जेनरेटर चलाना पड़ता है। जिससे खर्च में वृद्धि हो रही है। करीब एक माह पहले राई औद्योगिक क्षेत्र की सभी एसोसिएशन से संबंधित पदाधिकारियों ने बिजली निगम के अधीक्षण अभियंता संदीप जैन से मिलकर दो टूक कहा था कि जल्द बिजली संकट का समाधान नहीं हुआ तो वे उद्योगों को बंद कर सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे। इस मामले में उन्होंने उद्योगपतियों से 15 दिन की मोहलत मांगते हुए आश्वासन दिया था कि 30 सितंबर तक बिजली संकट को दूर कर दिया जाएगा और दीपालपुर पावर हाउस के खराब ट्रांसफार्मर को ठीक करवा दिया जाएगा। तय समय पर बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी थी। तब बिजली निगम के अधिकारियों ने बारिश का हवाला देते हुए कुछ दिन की और मोहलत मांगी थी। बाद में 10 अक्तूबर तक का समय दिया गया था। सोमवार को वह समय सीमा भी पूरी हो गई। उसके बावजूद बिजली संकट से निजात नहीं मिल सकी। ऐसे में अब 15 अक्तूबर तक बिजली सुचारु करने की बात कही जा रही है।
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उद्योगपति बोले-बिजली निगम की बहानेबाजी से बढ़ी मुसीबत
उद्योगपतियों का आरोप है कि बिजली निगम की बहानेबाजी के कारण उनका लगातार नुकसान हो रहा है। उन्हें भारी चपत लग रही है। उद्योगपति जगदीप धवन, बलबीर सिंह, पुनीत पोद्दार ने बताया कि हर बार नई समय सीमा बता दी जाती है। उसमें भी बहुत थोड़ा समय बताया जाता है। जिसे हर बार बढ़ा दिया जाता है। बार-बार नई तारीख मिलने से उन्हें भी लगने लगा कि निगम अधिकारी उन्हें महज दिलासा दे रहे हैं।
त्योहारी सीजन के चलते उद्योगों में काम बढ़ा है, लेकिन बिजली संकट से माल तैयार नहीं हो पा रहा है। बिजली निगम को उद्योगपतियों की समस्या को देखते हुए तुरंत समाधान करना चाहिए था। उसके विपरीत हर बार नई तारीख दे दी जाती है। पहले कोरोना ने चौपट किया, फिर किसान आंदोलन मुसीबत बना और अब ये बिजली संकट। समझ नहीं आ रहा कि उद्योगों को किस तरह बचाया जाए। उद्योगों को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। उद्योगपति काली दिवाली मनाने को मजबूर हैं। -राकेश देवगन, प्रधान, राई इंडस्ट्रियल एरिया मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन।
बिजली निगम बार-बार नई डेडलाइन जारी कर देता है। उनकी मुसीबत बढ़ती जा रही है। जेनरेटर चलाकर दोगुना खर्च कर माल तैयार किया जा रहा है। त्योहारों में ही माल समय पर नहीं भेजा तो उसकी बिक्री नहीं होगी। इसका असर भी उद्योगों पर ही पड़ेगा। ऐसे में जल्द से जल्द हमारी समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। सुभाष गुप्ता, पदाधिकारी कुंडली औद्योगिक एसोसिएशन
दीपालपुर बिजली निगम के खराब ट्रांसफार्मर को ठीक करने की पहल लगातार जारी है। वडोदरा की कंपनी के कारिंदे ट्रांसफार्मर को ठीक करने में जुटे हैं। बारिश के कारण पुर्जे सूखने में समय लग रहा है। पुर्जे सूखने के बाद बाक्स बंद किए जा सकेंगे। तब तक इंतजार करना होगा। 17 अक्तूबर तक बिजली व्यवस्था को सुचारु कर दी जाएगी। अगर बारिश का व्यवधान नहीं होता तो अब तक सप्लाई सुचारु कर चुके होते। -राजेश्वर प्रसाद, कार्यकारी अभियंता, हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम, सोनीपत।