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निजी राय अलग, एसकेएम की बैठक में फैसला लेने पर सब राजी
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सोनीपत। केंद्र सरकार की तरफ से तीन कृषि कानून वापस लिए जाने के बाद से कुछ किसान नेताओं का उत्साह बढ़ा हुआ है। आलम यह है कि अति उत्साह के चलते एक नेता आंदोलन वापसी का राग अलाप रहा है तो दूसरा सभी मांगें माने जाने तक आंदोलन को जोरदार तरीके से जारी रखने के पक्ष में आवाज बुलंद कर रहा है। उत्साह में आकर की गई बयानबाजी से आजिज आकर बुधवार को मोर्चा के वरिष्ठ नेता डॉ. दर्शन पाल सिंह ने किसान नेता राकेश टिकैत तक को भी नसीहत देनी पड़ी कि उन्हें सोच-समझकर बयान देने चाहिए। साथ ही पंजाब जत्थेबंदियों से लेकर हरियाणा किसान मोर्चा तक ने यह स्पष्ट करने का प्रयास किया कि उनमें कोई दो मत नहीं हैं।
प्रेम सिंह भंगू बोले-99 प्रतिशत जीत चुके, घर जाकर मनाएंगे जश्न
आल इंडिया किसान फेडरेशन के प्रमुख एवं संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य प्रेम सिंह भंगू ने कहा है कि किसानों का मुख्य मुद्दा तीन कृषि कानूनों की वापसी कराना था। जिन्हें सरकार ने वापस ले लिया है। एमएसपी पर कमेटी बनने जा रही है। किसानों पर दर्ज मुकदमों पर बातचीत हो रही है। आगे क्या करना है, यह तो मोर्चा ही फैसला लेगा लेकिन वह 99 प्रतिशत जीत हासिल कर चुके हैं। कृषि कानूनों की वापसी एतिहासिक जीत है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। दूसरे सभी मामले छोटे हैं और धीरे-धीरे निपट रहे हैं। फिलहाल सरकार का रवैया सकारात्मक है तो किसान भी जश्न मना रहे हैं। उनका मानना है कि इस एतिहासिक जीत पर वे अपने घरों पर जाकर जश्न मनाएंगे। शायद एक-दो दिन में निर्णय हो जाएगा।
संयुक्त किसान मोर्चा ही लेगा निर्णय : योगेंद्र यादव
संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े सभी संगठनों की लगातार बैठक हो रही है। 4 दिसंबर को होने वाली मोर्चा की बैठक में हरियाणा के संगठनों का स्टैंड रखा जाएगा। हरियाणा सरकार से बचे हुए केस के बारे में किस तरह से बैठक करनी है, उस बारे में भी निर्णय लिया गया है। हरियाणा सरकार की ओर से कोई अधिकारिक बुलावा नहीं आया है। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से भी लिखित में कुछ नहीं आया है। कमेटी बनाने को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं है। मोर्चा की मांग रही है कि एमएसपी को गारंटी कानून बनाने के लिए कमेटी बनाई जाए। जहां तक आंदोलन वापसी की बात है तो इस संबंधित मोर्चा की बैठक में लिया गया निर्णय ही सर्वमान्य होगा।
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हवा सिंह आंतिल ने कहा कुछ जत्थेबंदियां वापसी की तैयारी में थी
मोर्चे पर धरनारत सर्वजातीय आंतिल खाप के प्रधान हवा सिंह आंतिल ने कहा कि पंजाब की कुछ जत्थेबंदियां वापसी की तैयारी में थी, लेकिन उन्होंने साफ कह दिया कि यदि वे जाएंगे तो समझ लेना कि किसानों के साथ गद्दारी करके जाएंगे। एमएसपी का बहुत से राज्यों के लिए महत्व है। ऐसे में ऐसा कोई निर्णय लेने से पहले सोचना होगा। आंतिल खाप ने भी बैठक कर निर्णय लिया है कि एमएसपी समेत सभी मांग मान लेने के बाद ही किसान वापस जाएंगे।
पहले मुकदमे रद्द करे सरकार, फिर जाने की सोचेंगे : चढूनी
भारतीय किसान यूनियन के प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी ने स्पष्ट किया है कि हरियाणा सरकार की और उनके पास बातचीत का कोई न्योता नहीं आया है। मंगलवार को गृह मंत्रालय से यह शर्त रखी गई थी कि यदि किसान आंदोलन खत्म करने की घोषणा करें तो वह मुख्यमंत्री से मिल सकते हैं, लेकिन किसानों ने इस शर्त को नामंजूर कर दिया। पहले सरकार मुकदमे वापस ले और आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को मुआवजे की घोषणा करें तभी किसान वापसी के बारे में सोचेंगे। सरकार ने अभी तक कुछ भी लिखित में किसानों के पास नहीं भेजा है। जहां तक किसानों की बैठकों का सवाल है तो दर्जनों संगठन हैं जो रोज अपनी अपनी बैठक करते हैं और स्थिति पर चर्चा करते हैं। इसमें कोई नई बात नहीं है।
मांगें पूरी होने तक यहां से नहीं जाएंगे : सुमन हुड्डा
किसान यूनियन (चढूनी) की महिला प्रदेश अध्यक्ष सुमन हुड्डा ने कहा कि किसानों की मांगे मान लेने की बातें अभी तक मीडिया में ही चल रही हैं, किसानों के पास इसकी कोई सूचना नहीं है। जब तक किसानों की सभी मांगें नहीं मानी जाती, तब तक किसान यहां से जाने वाले नहीं हैं। किसानों का लगातार हौसला बढ़ाया जा रहा है।
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प्रेम सिंह भंगू बोले-99 प्रतिशत जीत चुके, घर जाकर मनाएंगे जश्न
आल इंडिया किसान फेडरेशन के प्रमुख एवं संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य प्रेम सिंह भंगू ने कहा है कि किसानों का मुख्य मुद्दा तीन कृषि कानूनों की वापसी कराना था। जिन्हें सरकार ने वापस ले लिया है। एमएसपी पर कमेटी बनने जा रही है। किसानों पर दर्ज मुकदमों पर बातचीत हो रही है। आगे क्या करना है, यह तो मोर्चा ही फैसला लेगा लेकिन वह 99 प्रतिशत जीत हासिल कर चुके हैं। कृषि कानूनों की वापसी एतिहासिक जीत है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। दूसरे सभी मामले छोटे हैं और धीरे-धीरे निपट रहे हैं। फिलहाल सरकार का रवैया सकारात्मक है तो किसान भी जश्न मना रहे हैं। उनका मानना है कि इस एतिहासिक जीत पर वे अपने घरों पर जाकर जश्न मनाएंगे। शायद एक-दो दिन में निर्णय हो जाएगा।
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संयुक्त किसान मोर्चा ही लेगा निर्णय : योगेंद्र यादव
संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े सभी संगठनों की लगातार बैठक हो रही है। 4 दिसंबर को होने वाली मोर्चा की बैठक में हरियाणा के संगठनों का स्टैंड रखा जाएगा। हरियाणा सरकार से बचे हुए केस के बारे में किस तरह से बैठक करनी है, उस बारे में भी निर्णय लिया गया है। हरियाणा सरकार की ओर से कोई अधिकारिक बुलावा नहीं आया है। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से भी लिखित में कुछ नहीं आया है। कमेटी बनाने को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं है। मोर्चा की मांग रही है कि एमएसपी को गारंटी कानून बनाने के लिए कमेटी बनाई जाए। जहां तक आंदोलन वापसी की बात है तो इस संबंधित मोर्चा की बैठक में लिया गया निर्णय ही सर्वमान्य होगा।
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हवा सिंह आंतिल ने कहा कुछ जत्थेबंदियां वापसी की तैयारी में थी
मोर्चे पर धरनारत सर्वजातीय आंतिल खाप के प्रधान हवा सिंह आंतिल ने कहा कि पंजाब की कुछ जत्थेबंदियां वापसी की तैयारी में थी, लेकिन उन्होंने साफ कह दिया कि यदि वे जाएंगे तो समझ लेना कि किसानों के साथ गद्दारी करके जाएंगे। एमएसपी का बहुत से राज्यों के लिए महत्व है। ऐसे में ऐसा कोई निर्णय लेने से पहले सोचना होगा। आंतिल खाप ने भी बैठक कर निर्णय लिया है कि एमएसपी समेत सभी मांग मान लेने के बाद ही किसान वापस जाएंगे।
पहले मुकदमे रद्द करे सरकार, फिर जाने की सोचेंगे : चढूनी
भारतीय किसान यूनियन के प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी ने स्पष्ट किया है कि हरियाणा सरकार की और उनके पास बातचीत का कोई न्योता नहीं आया है। मंगलवार को गृह मंत्रालय से यह शर्त रखी गई थी कि यदि किसान आंदोलन खत्म करने की घोषणा करें तो वह मुख्यमंत्री से मिल सकते हैं, लेकिन किसानों ने इस शर्त को नामंजूर कर दिया। पहले सरकार मुकदमे वापस ले और आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को मुआवजे की घोषणा करें तभी किसान वापसी के बारे में सोचेंगे। सरकार ने अभी तक कुछ भी लिखित में किसानों के पास नहीं भेजा है। जहां तक किसानों की बैठकों का सवाल है तो दर्जनों संगठन हैं जो रोज अपनी अपनी बैठक करते हैं और स्थिति पर चर्चा करते हैं। इसमें कोई नई बात नहीं है।
मांगें पूरी होने तक यहां से नहीं जाएंगे : सुमन हुड्डा
किसान यूनियन (चढूनी) की महिला प्रदेश अध्यक्ष सुमन हुड्डा ने कहा कि किसानों की मांगे मान लेने की बातें अभी तक मीडिया में ही चल रही हैं, किसानों के पास इसकी कोई सूचना नहीं है। जब तक किसानों की सभी मांगें नहीं मानी जाती, तब तक किसान यहां से जाने वाले नहीं हैं। किसानों का लगातार हौसला बढ़ाया जा रहा है।