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किसान आंदोलन : संसद पर प्रदर्शन के
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कुंडली बॉर्डर पर कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर चल रहे किसान आंदोलन में संयुक्त किसान मोर्चा ने मानसून सत्र के दौरान संसद मार्च को अधिक प्रभावी बनाने का निर्णय लिया है। संसद के बाहर प्रदर्शन में 22 राज्यों के किसान हिस्सा लेंगे।
प्रदर्शन के लिए हर रोज अलग-अलग राज्यों के 200 किसान पहुंचेंगे। संसद का मानसून सत्र के दौरान 22 जुलाई से किसानों का प्रदर्शन शुरू होगा। वहीं महिलाओं का पैदल मार्च 26 जुलाई को निकाला जाएगा, जिसके लिए अभी से महिलाओं के जत्थे कुंडली बॉर्डर समेत अन्य धरनास्थलों पर पहुंचने शुरू हो गए हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा ने तय किया है कि संसद के मानसून सत्र के दौरान संसद के बाहर प्रभावी तरीके से प्रदर्शन किया जाएगा। प्रतिदिन 200 किसान संसद के बाहर पहुंचेंगे और प्रदर्शन कर मांगों की तरफ सरकार व विपक्ष का ध्यान आकर्षित करेंगे। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल व डॉ. दर्शनपाल ने कहा कि अब तक यह तय हो चुका है कि लगातार 21 दिन तक चलने वाले मानसून सत्र के दौरान प्रदर्शन में 22 राज्यों के किसान शामिल होंगे। प्रदर्शन में पंजाब व हरियाणा के किसानों के अलावा तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, मणिपुर, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के किसान भी भाग लेंगे। किसान नेताओं ने कहा कि 26 जुलाई और 9 अगस्त को महिला किसानों द्वारा विशेष मार्च में उत्तर-पूर्वी राज्यों सहित पूरे देश से महिला किसानों और नेताओं की अधिक संख्या में भागीदारी होगी। मोर्चा का दावा है कि देश के सांसद पूरे भारत के किसानों को अपनी मांगों को रखने और अपनी आवाज सुनाने के लिए अनुशासित तरीके से संसद तक मार्च करते देखेंगे।
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संयुक्त किसान मोर्चा ने सिरसा पुलिस की तरफ से ग्राम फग्गू से किसान बलकौर सिंह, नीका सिंह, दलजीत और मनदीप पर दर्ज किए गए देशद्रोह के मुकदमों को झूठा बताया है। मोर्चा के नेताओं ने कहा कि यह आरोप चौंकाने वाले हैं। हरियाणा की भाजपा सरकार के निर्देश लेकर पुलिस असांविधानिक कार्य कर रही है। मोर्चा पीड़ित किसानों को सभी प्रकार कानूनी मदद पहुंचाएगा। प्रदेश की भाजपा सरकार शांतिपूर्ण आंदोलन हमला करने और टकराव का माहौल पैदा करने में लगी हुई है।
संयुक्त किसान मोर्चा के मंच पर पहुंचे पंजाबी कलाकार बब्बू मान, अमितोज मान, गुल पनाग और अन्य ने अपने गानों से सभी का मनोरंजन किया। उन्होंने किसानों के आंदोलन को जायज बताते हुए सरकार को चेताया कि किसानों के साथ अन्याय काफी महंगा पड़ेगा। बब्बू मान ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में अपनी आवाज रखने का हक हर किसी को होता है। सहमति व असहमति हो सकती है, लेकिन सरकार को दमन नहीं करना चाहिए। तानाशाही से देश नहीं चला करता। इससे पहले कलाकारों का कुंडली बॉर्डर पर पहुंचने पर स्वागत किया गया।
चढूनी ग्रुप की तरफ से एसकेएम के बहिष्कार का झूठा मैसेज वायरल
भाकियू नेता गुरनाम सिंह चढूनी को संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से एक सप्ताह के लिए निलंबित किए जाने के बाद एक मैसेज तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मैसेज में चढूनी ग्रुप की तरफ से एसकेएम (संयुक्त किसान मोर्चा) का बहिष्कार किए जाने की बात लिखी गई थी। हालांकि मैसेज वायरल होने के बाद भाकियू नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि उनका इस मैसेज से कोई मतलब नहीं है। वह संयुक्त किसान मोर्चा के साथ खड़े हैं। किसानों के बीच मतभेद पैदा करने के लिए इस तरह के षड्यंत्र रचे जा रहे हैं।
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प्रदर्शन के लिए हर रोज अलग-अलग राज्यों के 200 किसान पहुंचेंगे। संसद का मानसून सत्र के दौरान 22 जुलाई से किसानों का प्रदर्शन शुरू होगा। वहीं महिलाओं का पैदल मार्च 26 जुलाई को निकाला जाएगा, जिसके लिए अभी से महिलाओं के जत्थे कुंडली बॉर्डर समेत अन्य धरनास्थलों पर पहुंचने शुरू हो गए हैं।
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संयुक्त किसान मोर्चा ने तय किया है कि संसद के मानसून सत्र के दौरान संसद के बाहर प्रभावी तरीके से प्रदर्शन किया जाएगा। प्रतिदिन 200 किसान संसद के बाहर पहुंचेंगे और प्रदर्शन कर मांगों की तरफ सरकार व विपक्ष का ध्यान आकर्षित करेंगे। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल व डॉ. दर्शनपाल ने कहा कि अब तक यह तय हो चुका है कि लगातार 21 दिन तक चलने वाले मानसून सत्र के दौरान प्रदर्शन में 22 राज्यों के किसान शामिल होंगे। प्रदर्शन में पंजाब व हरियाणा के किसानों के अलावा तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, मणिपुर, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के किसान भी भाग लेंगे। किसान नेताओं ने कहा कि 26 जुलाई और 9 अगस्त को महिला किसानों द्वारा विशेष मार्च में उत्तर-पूर्वी राज्यों सहित पूरे देश से महिला किसानों और नेताओं की अधिक संख्या में भागीदारी होगी। मोर्चा का दावा है कि देश के सांसद पूरे भारत के किसानों को अपनी मांगों को रखने और अपनी आवाज सुनाने के लिए अनुशासित तरीके से संसद तक मार्च करते देखेंगे।
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संयुक्त किसान मोर्चा ने सिरसा पुलिस की तरफ से ग्राम फग्गू से किसान बलकौर सिंह, नीका सिंह, दलजीत और मनदीप पर दर्ज किए गए देशद्रोह के मुकदमों को झूठा बताया है। मोर्चा के नेताओं ने कहा कि यह आरोप चौंकाने वाले हैं। हरियाणा की भाजपा सरकार के निर्देश लेकर पुलिस असांविधानिक कार्य कर रही है। मोर्चा पीड़ित किसानों को सभी प्रकार कानूनी मदद पहुंचाएगा। प्रदेश की भाजपा सरकार शांतिपूर्ण आंदोलन हमला करने और टकराव का माहौल पैदा करने में लगी हुई है।
संयुक्त किसान मोर्चा के मंच पर पहुंचे पंजाबी कलाकार बब्बू मान, अमितोज मान, गुल पनाग और अन्य ने अपने गानों से सभी का मनोरंजन किया। उन्होंने किसानों के आंदोलन को जायज बताते हुए सरकार को चेताया कि किसानों के साथ अन्याय काफी महंगा पड़ेगा। बब्बू मान ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में अपनी आवाज रखने का हक हर किसी को होता है। सहमति व असहमति हो सकती है, लेकिन सरकार को दमन नहीं करना चाहिए। तानाशाही से देश नहीं चला करता। इससे पहले कलाकारों का कुंडली बॉर्डर पर पहुंचने पर स्वागत किया गया।
चढूनी ग्रुप की तरफ से एसकेएम के बहिष्कार का झूठा मैसेज वायरल
भाकियू नेता गुरनाम सिंह चढूनी को संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से एक सप्ताह के लिए निलंबित किए जाने के बाद एक मैसेज तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मैसेज में चढूनी ग्रुप की तरफ से एसकेएम (संयुक्त किसान मोर्चा) का बहिष्कार किए जाने की बात लिखी गई थी। हालांकि मैसेज वायरल होने के बाद भाकियू नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि उनका इस मैसेज से कोई मतलब नहीं है। वह संयुक्त किसान मोर्चा के साथ खड़े हैं। किसानों के बीच मतभेद पैदा करने के लिए इस तरह के षड्यंत्र रचे जा रहे हैं।